{"_id":"33-107452","slug":"Etawah-107452-33","type":"story","status":"publish","title_hn":"रुक्मिणी की उत्कृष्ट प्रेम भावना का बखान किया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रुक्मिणी की उत्कृष्ट प्रेम भावना का बखान किया
Etawah
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इटावा। सिद्ध गुफा जीव रक्षा गौशाला की ओर से यहां वृंदावन गार्डन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन ख्यातिलब्ध कथावाचक आचार्य पीयूष ने रुक्मिणी और सुदामा की कथा सुनाई। रुक्मिणी प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण के लिए जो सात श्लोक लिखे हैं, वह उनके सात फेरों के प्रतीक हैं। रुक्मिणी की उत्कृष्ट प्रेम भावना श्रीकृष्ण को उनके पास आने को विवश कर देती है।
उन्हाेंने कहा कि रुक्मिणी सौ जन्मों तक श्री कृष्ण को पाने की लालसा रखती है तथा उस लक्ष्य को पाने के लिए अनवरण व्रत करके मृत्यु वरण करने की घोषणा एक भक्त की प्रेम व्याकुलता का उत्कृष्ट उदाहरण है और उसका परिणाम सुखद है। इसी प्रसंग में कथा वाचक ने रुक्मिणी व श्रीकृष्ण विवाह का रोचक वर्णन किया।
सुदामा चरित्र के अध्यात्मिक पक्ष पर चर्चा करते हुए आचार्य पीयूष ने कहा कि सुदामा याचक नहीं साधक थे तथा वह प्रेमरस में पगे भक्तों की महिमा है। वह जीव का प्रतीक है तथा उनकी पत्नी सुशीला बुद्धि की परिचायक है। सुशीला बुद्धि की सत प्रेरणा से सुदामा (जीव) ईश्वरशरणा गत होता है और प्रभु उसको अपना बना कर मुक्ति देते है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार में अमर है।
विज्ञापन
कथा के यजमान प्रदीप चौधरी सपत्नी उपस्थित रहे और श्रीमद्भागवत पुराण की आरती कर प्रसाद वितरित किया। कथा के अंत में ब्रह्मचारी शम्भूनाथ महाराज ने बताया कि 25 नवंबर को दिन में 12 बजे से सिद्ध गुफा जीव रक्षा गौशाला में हवन एवं भंडारा होगा।
विज्ञापन
उन्हाेंने कहा कि रुक्मिणी सौ जन्मों तक श्री कृष्ण को पाने की लालसा रखती है तथा उस लक्ष्य को पाने के लिए अनवरण व्रत करके मृत्यु वरण करने की घोषणा एक भक्त की प्रेम व्याकुलता का उत्कृष्ट उदाहरण है और उसका परिणाम सुखद है। इसी प्रसंग में कथा वाचक ने रुक्मिणी व श्रीकृष्ण विवाह का रोचक वर्णन किया।
विज्ञापन
सुदामा चरित्र के अध्यात्मिक पक्ष पर चर्चा करते हुए आचार्य पीयूष ने कहा कि सुदामा याचक नहीं साधक थे तथा वह प्रेमरस में पगे भक्तों की महिमा है। वह जीव का प्रतीक है तथा उनकी पत्नी सुशीला बुद्धि की परिचायक है। सुशीला बुद्धि की सत प्रेरणा से सुदामा (जीव) ईश्वरशरणा गत होता है और प्रभु उसको अपना बना कर मुक्ति देते है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार में अमर है।
विज्ञापन
कथा के यजमान प्रदीप चौधरी सपत्नी उपस्थित रहे और श्रीमद्भागवत पुराण की आरती कर प्रसाद वितरित किया। कथा के अंत में ब्रह्मचारी शम्भूनाथ महाराज ने बताया कि 25 नवंबर को दिन में 12 बजे से सिद्ध गुफा जीव रक्षा गौशाला में हवन एवं भंडारा होगा।