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लखनऊ से आए 23 घड़ियालों को चंबल नदी में छोड़ा गया

Thu, 25 Mar 2021 11:19 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 25 Mar 2021 11:19 PM IST
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23 gongs from Lucknow were released in Chambal river
लखनऊ कुकरैल घड़ियाल रिसर्च सेंटर से घड़ियाल को चंबल नदी में छोड़ा गया - फोटो : ETAWHA
चकरनगर। चंबल नदी में घड़ियालों के कुनबे में गुरुवार को और बढ़ोत्तरी हो गई। लखनऊ के कुकरैल रिसर्च सेंटर में पाले गए 23 घड़ियालों को चंबल नदी में छोड़ा गया है। छोड़े गए घड़ियालों में सबसे बड़ा तीन वर्ष की आयु का है।
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वन क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि कुकरैल स्थित घड़ियाल रिसर्च सेंटर से सुबह यहां अलग-अलग 23 बक्सों में रखकर घड़ियालों को लाया गया। इसके बाद एक-एक करके 11 घड़ियाल को चंबल नदी और 12 घड़ियालों को महुआ सूडा चंबल नदी के सहसो पॉइंट पर छोड़ा गया है। एक से डेढ़ महीने तक यह नदी के किनारे विचरण करेंगे और फिर गहरे पानी की तरफ बढ़ जाएंगे।
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घड़ियाल विशेषज्ञ जैनुद्दीन ने बताया कि कुकरैल सेंटर में चंबल सेंचुरी से घड़ियाल के अंडों के ले जाकर वहां डेवलप किया जाता है। घड़ियाल किस जलवायु में सूकून महसूस करते हैं, इस पर रिसर्च होता है। घड़ियालों के वयस्क हो जाने के बाद इन्हें प्राकृतिक वास (जगहृ) पर छोड़ दिया जाता है।
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चंबल नदी घड़ियालों के अभ्यारण्य के लिए सबसे सुरक्षित व अनुकूलित है। इससे पूर्व भी विभिन्न रिसर्च सेंटरों से घड़ियालों को लाकर चंबल सेंक्चुअरी में छोड़ा जा चुका है। यह घड़ियाल पूरी तरह स्वस्थ हैं और लगातार बढ़ रहे हैं। घड़ियालों को नदी में छोड़े जाने के दौरान वन दरोगा विष्णु पाल सिंह चौहान, सूर्यकांत शुक्ला लखनऊ से आए थे। वन जीव रक्षक ब्रजमोहन समेत कई लोग चंबल सेंक्चुअरी की तरफ से मौजूद रहे।

रिसर्च सेंटर में यह होता है
चंबल नदी के किनारे रेत में जहां मादा घड़ियाल अंडे देती हैं, वहां से अंडों को इकट्ठा करके कुकरैल घड़ियाल सेंटर ले जाया जाता है। वहां इनकी हेचिंग की जाती है। इंसानी देखरेख में ही अंडों से घड़ियाल के बच्चे बाहर आते हैं। करीब तीन साल तक इन्हें मछलियां खिलाकर सेंटर में पाला जाता है। जैसे ही इनकी लंबाई 120 सेंटीमीटर होती है। तब इन्हें चंबल नदी में छोड़ दिया जाता है।
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