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पहलवानों ने जीतने को खूब चले दांवपेंच
अमर उजाला ब्यूरो एटा।
Updated Tue, 22 Dec 2015 11:13 PM IST
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ग्राम उलाईखेडा में मंगलवार को विशाल कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। इसमें जिले और बाहर से आए पहलवानों ने खुद को जीतने के लिए खूब दांवपेंच चले। हर पहलवान विपक्षी पहलवान को पटकनी देने की कोशिश करता रहा। एक से बढ़कर कुश्ती के मुकाबले देखकर दर्शक भी तालियां बजाते नजर आए।
दंगल का शुभारंभ बसपा नेता जहीर अहमद ने किया। इस दौरान उन्होंने पहलवानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल को खेल भावना से लें। जीत-हार से उठकर खेल को रोमांच दें। सच्चा खिलाड़ी वही होता है जो जीत और हार में एक जैसा व्यवहार करे। दंगल की पहली कुश्ती शीलू म्यासुर व नन्हें पहलवान पटियाली के बीच हुई। दोनों ही पहलवानों ने खुद को जीतने का भरसक प्रयास किया, लेकिन कुश्ती बराबरी पर छूटी। दूसरी कुश्ती रिहान बोंदर व ब्रजेश नगला अजीत के बीच रही। दस मिनट की कड़े मुकाबले के बाद यह बराबरी पर रही। तीसरी कुश्ती अरुण हाथरस व विष्णु तरसी के मध्य हुई जिसमें अरुण ने विष्णु को चित्त कर बाजी अपने नाम की। अंतिम कुश्ती जुगेंद्र सिंह सिकंदरपुरव व धर्मवीर पटियाली के बीच हुई जिसमें पहलवानों ने 30 मिनट तक अपने-अपने दांव पेंच चले, लेकिन यह कुश्ती भी बराबर पर ही छूटी। दंगल के अंत में विजयी पहलवानों को बसपा नेता द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस दौरान ठाकुर रामवीर सिंह, यासीन सैफी, बच्चे खां, राजकुमार पूर्व प्रधान, फकरुददीन, ठाकुर सहसवीर सिंह, मनोज, जमील, जाहिद कुरेशी, मोहित राघव आदि मौजूद रहे।
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दंगल का शुभारंभ बसपा नेता जहीर अहमद ने किया। इस दौरान उन्होंने पहलवानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल को खेल भावना से लें। जीत-हार से उठकर खेल को रोमांच दें। सच्चा खिलाड़ी वही होता है जो जीत और हार में एक जैसा व्यवहार करे। दंगल की पहली कुश्ती शीलू म्यासुर व नन्हें पहलवान पटियाली के बीच हुई। दोनों ही पहलवानों ने खुद को जीतने का भरसक प्रयास किया, लेकिन कुश्ती बराबरी पर छूटी। दूसरी कुश्ती रिहान बोंदर व ब्रजेश नगला अजीत के बीच रही। दस मिनट की कड़े मुकाबले के बाद यह बराबरी पर रही। तीसरी कुश्ती अरुण हाथरस व विष्णु तरसी के मध्य हुई जिसमें अरुण ने विष्णु को चित्त कर बाजी अपने नाम की। अंतिम कुश्ती जुगेंद्र सिंह सिकंदरपुरव व धर्मवीर पटियाली के बीच हुई जिसमें पहलवानों ने 30 मिनट तक अपने-अपने दांव पेंच चले, लेकिन यह कुश्ती भी बराबर पर ही छूटी। दंगल के अंत में विजयी पहलवानों को बसपा नेता द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस दौरान ठाकुर रामवीर सिंह, यासीन सैफी, बच्चे खां, राजकुमार पूर्व प्रधान, फकरुददीन, ठाकुर सहसवीर सिंह, मनोज, जमील, जाहिद कुरेशी, मोहित राघव आदि मौजूद रहे।
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