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Etah News: एटा की प्रसूता की मौत के दो दिन बाद बच्चे की भी थमी सांसें
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आगरा। थाना एत्माद्दौला क्षेत्र के ट्रांस यमुना फेज-द्वितीय स्थित श्री कृष्णा अस्पताल में प्रसूता की मौत के दो दिन बाद बुधवार को उसके जुड़वा बच्चों में से एक की सांसें थम गईं। परिजन ने डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाकर करीब दो घंटे तक हंगामा किया।
एटा के थाना बागवाला क्षेत्र के गढ़ी बड़ेल निवासी अजीत कुमार यादव की शादी करीब 30 साल पहले अलीगंज निवासी मंजू देवी से हुई थी। दंपती के कोई संतान नहीं थी। परिजन ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले रिश्तेदार राजेश ने उन्हें श्रीकृष्णा अस्पताल की डॉ. गीता यादव से मिलवाया था। आरोप है कि डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन ने उपचार की जिम्मेदारी लेते हुए डेढ़ साल में करीब 11 लाख रुपये ले लिए। आरोप है कि सोमवार को मंजू देवी की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। रात करीब नौ बजे ऑपरेशन हुआ।
ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उपचार में लापरवाही के चलते मंजू देवी की मौत हो गई। इस दौरान उसने एक बेटी और एक बेटे को जन्म दिया। दोनों नवजात को वेंटिलेटर पर रखा गया था। आरोप है कि उन्हें जच्चा और बच्चों से मिलने नहीं दिया गया। बाद में वे मंजू का शव घर ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया।
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बुधवार सुबह करीब 9 बजे हॉस्पिटल पहुंचने पर परिजन को करीब एक लाख रुपये का बिल दिया गया। इसी दौरान उन्हें नवजात बेटे की मौत की जानकारी दी गई।
बच्ची के संबंध में परिजन ने आरोप लगाया कि उसकी भी मौत हो चुकी है, लेकिन उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। इसके बाद उन्होंने अस्पताल के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। संवाद
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एटा के थाना बागवाला क्षेत्र के गढ़ी बड़ेल निवासी अजीत कुमार यादव की शादी करीब 30 साल पहले अलीगंज निवासी मंजू देवी से हुई थी। दंपती के कोई संतान नहीं थी। परिजन ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले रिश्तेदार राजेश ने उन्हें श्रीकृष्णा अस्पताल की डॉ. गीता यादव से मिलवाया था। आरोप है कि डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन ने उपचार की जिम्मेदारी लेते हुए डेढ़ साल में करीब 11 लाख रुपये ले लिए। आरोप है कि सोमवार को मंजू देवी की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। रात करीब नौ बजे ऑपरेशन हुआ।
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ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उपचार में लापरवाही के चलते मंजू देवी की मौत हो गई। इस दौरान उसने एक बेटी और एक बेटे को जन्म दिया। दोनों नवजात को वेंटिलेटर पर रखा गया था। आरोप है कि उन्हें जच्चा और बच्चों से मिलने नहीं दिया गया। बाद में वे मंजू का शव घर ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया।
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बुधवार सुबह करीब 9 बजे हॉस्पिटल पहुंचने पर परिजन को करीब एक लाख रुपये का बिल दिया गया। इसी दौरान उन्हें नवजात बेटे की मौत की जानकारी दी गई।
बच्ची के संबंध में परिजन ने आरोप लगाया कि उसकी भी मौत हो चुकी है, लेकिन उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। इसके बाद उन्होंने अस्पताल के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। संवाद