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Etah News: साठिया धान की दो फसल, संवारेगी किसानों का कल

Wed, 22 Mar 2023 11:56 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Wed, 22 Mar 2023 11:56 PM IST
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Two crops of Sathiya paddy, tomorrow will beautify the farmers
मिरहची (एटा)।
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धान की साठिया (पूसा 1509) प्रजाति किसानों की तकदीर बदलेगी। 80-85 दिन में तैयार होने वाली इस फसल की नर्सरी तैयार हो गई है। गेहूं-सरसों की कटाई के बाद इसे बोया जाएगा। जो मानसून तक तैयार हो जाएगी। इसके बाद मानसून में दूसरी पौध लगाने का समय मिलेगा। इससे किसान धान की दो बार पैदावार प्राप्त कर सकेंगे।

जनपद के ब्लॉक क्षेत्र मारहरा के गांव मेंहनी, समोखर और निधौली कलां के रामनगर के किसान नई तकनीक वाली पूसा 1509 धान की रोपाई करीब 60 बीघा खेत में करने की तैयारियों में जुटे हुए हैं। एक ओर जहां नर्सरी लगा ली गई है। वहीं दूसरी ओर सरसों की फसल कटने के बाद खाली हुए खेत रोपाई के लिए तैयार किए जा रहे हैं। किसानों के मुताबिक यह धान की प्रजाति सिर्फ 80 से 85 दिन में पककर तैयार हो जाती है। जिसके कटने के बाद बारिश के मौसम के धान की रोपाई भी की जा सकती है। एक फसल उत्पादन के बढ़ने से किसानों को साल में तीन फसलें मिलेंगी।
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अब तक चिकनी मिट्टी रहित इस क्षेत्र को साल में दो ही फसलें मिल पाती हैं। जिसमें गेंहू और एक बारिश वाले धान की फसलें प्रमुख हैं। अप्रैल के बाद से जुलाई तक खेत खाली पड़ रहते थे। अब इस समय चक्र में खाली पडे रहने वाले खेतों में हरियाली नजर आएगी। जो किसानों की आय में वृद्धि लाने का काम करेगी। संवाद
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लागत 3 हजार और कमाई 15 हजार

पूसा 1509 धान की नई प्रजाति में लागत सिर्फ तीन हजार रुपये के करीब है। जबकि पैदावार 4 क्विंटल प्रति बीघा होगी। इसकी बिक्री कीमत के अनुसार अनुमानित करीब 15 हजार आय होगी।




हम किसानों को साल में दो फसलें उत्पादन करने का अवसर मिलता है। लेकिन इस वर्ष धान की नई किस्म का उत्पादन कर रहे हैं। इस प्रजाति के बीज को हम दिल्ली के पूसा से 250 रुपये किलो के हिसाब से लाए हैं। नर्सरी के लिए एक किलो बीज में एक बीघा खेत की पौध तैयार हो जाती है। - प्रेमवीर सिंह, रामनगर


इस धान की नर्सरी मार्च के प्रथम सप्ताह में ही डाल ली गई है। जो लगभग तैयार है। 15 अप्रैल से खेत में धान की रोपाई शुरू कर दी जाएगी। जून के अंत तक फसल पककर तैयार हो जाएगी। हमें बताया गया है कि इसमें पैदावार बारिश के सामान्य धान से अधिक मिलेगी। - सुरेश चंद्र, ओरनी





यह नई तकनीक पर आधारित प्रजाति है। अधिक तापमान में इसकी फसल तैयार होती है। सामान्य धान की अपेक्षा इसमें सिंचाई की काफी कम जरूरत होती है। क्षेत्र के लिए यह अनुकूल है, अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद है। - महेंद्र सिंह, सहायक विकास अधिकारी (कृषि)
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