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टमाटर को लगा झुलसा, काली टिक्की रोग
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Sun, 10 May 2015 11:12 PM IST
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बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने पहले किसानों की रबी की फसल को प्रभावित कर दिया, अब उम्मीद जायद की फसल पर टिकी थी तो इसे रोग ने अपनी चपेट में ले लिया। टमाटर में झुलसा, काली टिक्की रोग फैल रहा है। जिससे फसल की पैदावार प्रभावित हो रही है। इन रोगों की रोकथाम के लिए सरकार की सब्सिडी वाली दवा भी विकास खंड स्तर पर उपलब्ध नहीं है। बाजार में दवा महंगी है, इसके चलते हर किसान उन दवाओं को खरीद भी नहीं पा रहा है। पैदावार प्रभावित होने से बाजार में भी गत वर्ष की अपेक्षा इस बार टमाटर के दाम बढ़े हुए हैं।
किसानों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। प्रतिकूल मौसम ने पहले किसानों को खरीफ में झटका दिया, इसके बाद रबी की फसल प्रभावित की, और अब मौसम की मार जायद की फसल पर भी पड़ रही है। टमाटर में रोग फैलने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। झुलसा, काली टिक्की, गिड़ार रोग पौधे को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। इससे पौधे पर टमाटर समय से पहले ही खेत में झड़कर गिर रहा है।
किसानों की मानें तो यह रोग पिछले एक महीने से है। एक पखवाड़े पूर्व कई बार हुई हल्की बूंदाबांदी और इसके बाद चली पुरबा हवा ने इन रोगों को बढ़ावा दिया है। किसानों ने बताया कि बाजार में फसल से रोग को दूर करने के लिए बाजार में दवा तो उपलब्ध है, लेकिन किसानों की आर्थिक स्थित ठीक न होने की वजह से इसे खरीद नहीं पा रहे हैं।
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जिले में सबसे अधिक टमाटर की पैदावार विकास खंड मारहरा में होती है। जहां करीब पांस सौ हेक्टेयर से ज्यादा टमाटर है। कासिमपुर के किसान होरी लाल, सुल्तानपुर के गोपाल, नगरिया ताड़ के देवेश का कहना है कि टमाटर में फैल रही बीमारी की वजह से उन्हें बहुत नुकसान हो रहा है। इस बार मंडी में रेट अच्छा है, लेकिन पैदावार पिछले वर्ष की तुलना में चौथाई ही है।
ऋ200 की जगह 70 बीघा हो रही पैदावार
किसानों ने बताया कि टमाटर की पैदावार औसतन 200 से 250 क्रेट प्रति बीघा रहती है । जो इस बार 70 से 80 क्रेट प्रति बीघा ही रह गई है। वहीं गत वर्ष इन दिनों टमाटर के बाजार भाव पांच से छह रुपये प्रति किग्रा थे, जो इस बार 25 से 30 रुपये किग्रा है।
कीट रोग योजना के तहत कृषि रक्षा विभाग के पास जितने भी सब्सिडी वाले कीटनाशक थे, उन्हें कृषकों को वितरित कर दिया है। फिलहाल स्टॉक नहीं हैं। जल्द ही योजना के तहत कीटनाशक उपलब्ध होने की विभाग को उम्मीद है। फसलों में रोगों के प्रति किसानों को विभाग की ओर से लगातार जागरूक किया जाता है। किसान यदि बाजार से कोई कीटनाशक खरीदें तो कृषि रक्षा विभाग के अधिकारियों से जानकारी हासिल कर लें।
- आशीष कुमार, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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किसानों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। प्रतिकूल मौसम ने पहले किसानों को खरीफ में झटका दिया, इसके बाद रबी की फसल प्रभावित की, और अब मौसम की मार जायद की फसल पर भी पड़ रही है। टमाटर में रोग फैलने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। झुलसा, काली टिक्की, गिड़ार रोग पौधे को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। इससे पौधे पर टमाटर समय से पहले ही खेत में झड़कर गिर रहा है।
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किसानों की मानें तो यह रोग पिछले एक महीने से है। एक पखवाड़े पूर्व कई बार हुई हल्की बूंदाबांदी और इसके बाद चली पुरबा हवा ने इन रोगों को बढ़ावा दिया है। किसानों ने बताया कि बाजार में फसल से रोग को दूर करने के लिए बाजार में दवा तो उपलब्ध है, लेकिन किसानों की आर्थिक स्थित ठीक न होने की वजह से इसे खरीद नहीं पा रहे हैं।
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जिले में सबसे अधिक टमाटर की पैदावार विकास खंड मारहरा में होती है। जहां करीब पांस सौ हेक्टेयर से ज्यादा टमाटर है। कासिमपुर के किसान होरी लाल, सुल्तानपुर के गोपाल, नगरिया ताड़ के देवेश का कहना है कि टमाटर में फैल रही बीमारी की वजह से उन्हें बहुत नुकसान हो रहा है। इस बार मंडी में रेट अच्छा है, लेकिन पैदावार पिछले वर्ष की तुलना में चौथाई ही है।
ऋ200 की जगह 70 बीघा हो रही पैदावार
किसानों ने बताया कि टमाटर की पैदावार औसतन 200 से 250 क्रेट प्रति बीघा रहती है । जो इस बार 70 से 80 क्रेट प्रति बीघा ही रह गई है। वहीं गत वर्ष इन दिनों टमाटर के बाजार भाव पांच से छह रुपये प्रति किग्रा थे, जो इस बार 25 से 30 रुपये किग्रा है।
कीट रोग योजना के तहत कृषि रक्षा विभाग के पास जितने भी सब्सिडी वाले कीटनाशक थे, उन्हें कृषकों को वितरित कर दिया है। फिलहाल स्टॉक नहीं हैं। जल्द ही योजना के तहत कीटनाशक उपलब्ध होने की विभाग को उम्मीद है। फसलों में रोगों के प्रति किसानों को विभाग की ओर से लगातार जागरूक किया जाता है। किसान यदि बाजार से कोई कीटनाशक खरीदें तो कृषि रक्षा विभाग के अधिकारियों से जानकारी हासिल कर लें।
- आशीष कुमार, जिला कृषि रक्षा अधिकारी