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नहीं बने शौचालय, गंगा मैली की मैली
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Fri, 22 May 2015 11:38 PM IST
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प्रदूषण से मैली हो चुकी गंगा को मोदी के सत्ता संभालते ही महसूस होने लगा कि उसे मोदी के रूप में फिर से भागीरथ मिल गया है। अब उसका उद्धार निश्चित है। वह पूर्व की भांति ही अपने निर्मल स्वरूप में अविरल बह सकेगी, लेकिन लगता है कि गंगा का यह सपना शायद अभी पूरा नहीं होगा। सफाई का उसे और इंतजार करना होगा।
जनपद का काफी बढ़ा हिस्सा गंगा के किनारे बसा हुआ है। पिछड़ा जनपद होने के कारण यहां साधनों की काफी कमी है। जनपद के 38 गांव से गंगा को सबसे अधिक खतरा है। इन गांवों के 14772 परिवार खुले में शौच जाकर प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। गंगा के सफाई अभियान से पहले प्रदूषण फैलाने वाले इस पर अंकुश लगाने का निर्णय लिया गया। इन गांवों में शौचालय निर्माण की योजना बनाई गई।
सर्वे के बाद सबसे पहले इन गांवों में सामुदायिक शौचालय बनाने का निर्णय लिया गया। इस प्रस्ताव को शासन ने मंजूर नहीं किया। इसके बाद प्रत्येक परिवार में व्यक्तिगत शौचालय बनवाने की योजना बनी। शासन को डिमांड भेज दी गई। लेकिन एक साल से इस फाइल पर सरकार की नजर नहीं पड़ी है। शौचालय निर्माण का कार्य पिछले वित्तीय वर्ष में शुरू नहीं हो सका। नए वित्तीय वर्ष में दो माह का समय होने जा रहा है, लेकिन अभी तक इस ओर कोई प्रयास नहीं हो रहे।
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इन गांवों में बनने हैं शौचालय
कादरगंज पुख्ता, कादरगंज खाम, गठौरा, हिम्मत नगर बझेरा, न्यौली फतुआवाद, शहवाजपुर, इंद्र जसनपुर, परसी बगवास, बरोना, उलाई खेड़ा, सून्नगढ़ी, नरदौली, पीतमनगर हरोड़ा, असदगढ़, संदवा,मनिकापुर, मुजफ्फर नगर, बाज नगर, उढैर पुख्ता, बघेला पुख्ता, पचलाना, दतलाना, चंदपुरा गऊपुरा, मानपुर नगरिया, अलीपुर बरबारा, महमूदपुर पुख्ता, इस्माइलपुर, अभयपुर, रमापुर, कादरबाडी, तारापुर नसीर, बनुपर पुख्ता, बरौरा,भडपुरा, उकर्री, मौसमपुर, हुसैनपुर।
गंगा किनारे के गांव में शौचालय निर्माण के लिए प्रोजेक्ट पिछले वित्तीय वर्ष में ही शासन को भेज दिया था, लेकिन अभी तक धन नहीं मिला है।
- डा. सरनजीत कौर डीपीआरओ कासगंज
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जनपद का काफी बढ़ा हिस्सा गंगा के किनारे बसा हुआ है। पिछड़ा जनपद होने के कारण यहां साधनों की काफी कमी है। जनपद के 38 गांव से गंगा को सबसे अधिक खतरा है। इन गांवों के 14772 परिवार खुले में शौच जाकर प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। गंगा के सफाई अभियान से पहले प्रदूषण फैलाने वाले इस पर अंकुश लगाने का निर्णय लिया गया। इन गांवों में शौचालय निर्माण की योजना बनाई गई।
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सर्वे के बाद सबसे पहले इन गांवों में सामुदायिक शौचालय बनाने का निर्णय लिया गया। इस प्रस्ताव को शासन ने मंजूर नहीं किया। इसके बाद प्रत्येक परिवार में व्यक्तिगत शौचालय बनवाने की योजना बनी। शासन को डिमांड भेज दी गई। लेकिन एक साल से इस फाइल पर सरकार की नजर नहीं पड़ी है। शौचालय निर्माण का कार्य पिछले वित्तीय वर्ष में शुरू नहीं हो सका। नए वित्तीय वर्ष में दो माह का समय होने जा रहा है, लेकिन अभी तक इस ओर कोई प्रयास नहीं हो रहे।
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इन गांवों में बनने हैं शौचालय
कादरगंज पुख्ता, कादरगंज खाम, गठौरा, हिम्मत नगर बझेरा, न्यौली फतुआवाद, शहवाजपुर, इंद्र जसनपुर, परसी बगवास, बरोना, उलाई खेड़ा, सून्नगढ़ी, नरदौली, पीतमनगर हरोड़ा, असदगढ़, संदवा,मनिकापुर, मुजफ्फर नगर, बाज नगर, उढैर पुख्ता, बघेला पुख्ता, पचलाना, दतलाना, चंदपुरा गऊपुरा, मानपुर नगरिया, अलीपुर बरबारा, महमूदपुर पुख्ता, इस्माइलपुर, अभयपुर, रमापुर, कादरबाडी, तारापुर नसीर, बनुपर पुख्ता, बरौरा,भडपुरा, उकर्री, मौसमपुर, हुसैनपुर।
गंगा किनारे के गांव में शौचालय निर्माण के लिए प्रोजेक्ट पिछले वित्तीय वर्ष में ही शासन को भेज दिया था, लेकिन अभी तक धन नहीं मिला है।
- डा. सरनजीत कौर डीपीआरओ कासगंज