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यूक्रेन से छात्रों की वापसी शुरू, जिले के दो छात्र हुए रवाना
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यूक्रेन के जकारपत्तिया ओब्लास्ट से वापस आते समय एटा के रवि यादव व अन्य भारतीय छात्र। संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। यूक्रेन में फंसे छात्रों की वापसी शुरू हो चुकी है। रविवार को यहां के दो छात्र रवाना हो गए। जकारपत्तिया ओब्लास्ट से एटा के कस्बा पिलुआ का छात्र देर रात तक पहुंचेगा। भारत रवाना होते समय छात्रों ने तिरंगे झंडे के साथ फोटो खिंचाकर अपने वतन वापस जाने की खुशी जताई। हालांकि अपनी पढ़ाई को लेकर छात्र चिंतित भी हैं। उधर, डेनिपर में फंसे छात्रों की वापसी को लेकर अभी कोई स्पष्ट समय उन्हें नहीं बताया गया है। जिसे लेकर छात्र चिंतित हैं।
जकारपत्तिया ओब्लास्ट से बस द्वारा अन्य छात्रों के साथ रविवार सुबह के समय हंगरी बॉर्डर के लिए पिलुआ के रवि यादव रवाना हुए। सभी भारतीय छात्रों ने तिरंगे झंडे के साथ फोटो खिंचाई और उत्साह के साथ चल पड़े। उन्होंने बताया कि बॉर्डर तक बस से जाएंगे। इसके बाद बुडापेस्ट से भारतीय फ्लाइट मिलेगी। जिसके माध्यम से भारत में वापसी होगी। उन्होंने कहा कि ये खुशी की बात है कि इतने बड़े संकट से हम लोग निकलकर वापस आ रहे हैं, लेकिन ये भी दुख है कि इस सब झंझट में पढ़ाई का नुकसान होगा। यह बहुत प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी है, जिसमें प्रवेश मिलना बहुत मुश्किल होता है। सीवीओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि पुत्र शांतनु सिंह ओडेसा में था, जहां हालात ज्यादा खराब हो गए हैं। वह अन्य छात्रों के साथ रविवार को बस द्वारा रोमानिया बॉर्डर पर निकल आया है। वहां से फ्लाइट मिलने में देरी हो रही है। छात्रों की भीड़ बहुत है, जबकि यहां से फ्लाइट काफी कम भेजी जा रही हैं।
मारहरा के ईओ कैलाशनाथ मिश्र ने बताया कि उनकी पुत्री गरिमा मिश्रा को यूनिवर्सिटी के अन्य छात्र-छात्राओं सहित कीव में हॉस्टल के बंकर में रखा गया है। पूरे शहर में कर्फ्यू लगा हुआ है। जिसके चलते अभी वापस आने के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।
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उधर, डेनिपर में फंसे छात्र आनंद सिंह और अर्पित शाक्य ने बताया कि हम लोगों को अभी तक ऐसा कोई संदेश नहीं दिया गया है कि उन्हें कब भारत भेजा जाएगा, न तो यूनिवर्सिटी प्रशासन कोई जानकारी दे रहा और न ही दूतावास से ही कोई जानकारी मिल रही है। आनंद ने बताया कि रूस की सेना लगातार पास आती जा रही है, जिससे चिंता बढ़ रही है। हम लोगों को हर समय तैयार रहने के लिए अलर्ट किया गया है। बंकर के रास्ते बता दिए गए हैं, कहा गया है कि जैसे ही सायरन बजाया जाए, जरूरी सामान लेकर बंकर में पहुंच जाएं। अभी हॉस्टल में ही रुके हुए हैं।
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जकारपत्तिया ओब्लास्ट से बस द्वारा अन्य छात्रों के साथ रविवार सुबह के समय हंगरी बॉर्डर के लिए पिलुआ के रवि यादव रवाना हुए। सभी भारतीय छात्रों ने तिरंगे झंडे के साथ फोटो खिंचाई और उत्साह के साथ चल पड़े। उन्होंने बताया कि बॉर्डर तक बस से जाएंगे। इसके बाद बुडापेस्ट से भारतीय फ्लाइट मिलेगी। जिसके माध्यम से भारत में वापसी होगी। उन्होंने कहा कि ये खुशी की बात है कि इतने बड़े संकट से हम लोग निकलकर वापस आ रहे हैं, लेकिन ये भी दुख है कि इस सब झंझट में पढ़ाई का नुकसान होगा। यह बहुत प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी है, जिसमें प्रवेश मिलना बहुत मुश्किल होता है। सीवीओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि पुत्र शांतनु सिंह ओडेसा में था, जहां हालात ज्यादा खराब हो गए हैं। वह अन्य छात्रों के साथ रविवार को बस द्वारा रोमानिया बॉर्डर पर निकल आया है। वहां से फ्लाइट मिलने में देरी हो रही है। छात्रों की भीड़ बहुत है, जबकि यहां से फ्लाइट काफी कम भेजी जा रही हैं।
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मारहरा के ईओ कैलाशनाथ मिश्र ने बताया कि उनकी पुत्री गरिमा मिश्रा को यूनिवर्सिटी के अन्य छात्र-छात्राओं सहित कीव में हॉस्टल के बंकर में रखा गया है। पूरे शहर में कर्फ्यू लगा हुआ है। जिसके चलते अभी वापस आने के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।
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उधर, डेनिपर में फंसे छात्र आनंद सिंह और अर्पित शाक्य ने बताया कि हम लोगों को अभी तक ऐसा कोई संदेश नहीं दिया गया है कि उन्हें कब भारत भेजा जाएगा, न तो यूनिवर्सिटी प्रशासन कोई जानकारी दे रहा और न ही दूतावास से ही कोई जानकारी मिल रही है। आनंद ने बताया कि रूस की सेना लगातार पास आती जा रही है, जिससे चिंता बढ़ रही है। हम लोगों को हर समय तैयार रहने के लिए अलर्ट किया गया है। बंकर के रास्ते बता दिए गए हैं, कहा गया है कि जैसे ही सायरन बजाया जाए, जरूरी सामान लेकर बंकर में पहुंच जाएं। अभी हॉस्टल में ही रुके हुए हैं।