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Etah News: गोवंश मुक्त होने का ढिंढोरा, सड़कों पर दिख रहे झूठे दावे
Thu, 18 May 2023 11:45 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Thu, 18 May 2023 11:45 PM IST
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एटा। जिले को गोवंश मुक्त होने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन गोवंश सड़कों पर भ्रमण कर लोगों को हादसों का शिकार बना रहे हैं। आए दिन लावारिश गोवंशों की वजह से लोग चोटिल हो रहे हैं तो कोई जान गंवा रहा है। गोवंश मुक्त होने का प्रमाणपत्र लेकर अधिकारियों को गुमराह किया गया है। जिले में 28 गोशालाएं संचालित हो रहीं हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें 4970 गोवंश संरक्षित हैं। जबकि 1665 गोवंश पशुपालकों को दिए गए हैं। इसके साथ ही पिछले दिनों शासन और प्रशासन की ओर से ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला निराश्रित गोवंशों से मुक्त होने का प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य किया गया। इसका पालन तो कतई नहीं हुआ लेकिन प्रमाणपत्र ले लिए गए, लेकिन सड़कों पर भटकते निराश्रित गोवंश हकीकत बयां कर रहे हैं।
शहर से लेकर गांवों तक की सड़कों पर गोवंश घूमते दिखाई दे रहे हैं। इनको देखकर दावों की पोल खुल रही है। ग्राम प्रधान, बीडीओ आदि अधिकारियों को गुमराह करने में कामयाब हो गए हैं, लेकिन लोगों को परेशानी आज भी उठानी पड़ रही है। बता दें कि अस्थायी गो आश्रय स्थलों की संख्या 13, वृहद गोशालाएं 3, कान्हा गो आश्रय स्थल 5, पंजीकृत गोशालाएं 4 और अपंजीकृत गोशालाएं 3 संचालित हो रहीं हैं। इनमें शहरी क्षेत्रों में 7 और ग्रामीण क्षेत्रों में 21 शामिल हैं।
निराश्रित गोवंशों से मुक्त होने के प्रमाणपत्र ग्राम पंचायत और बीडीओ ले चुके हैं। इसके बाद भी सड़कों पर गोवंश दिखाई दे रहे हैं। इसकी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी। गोवंशों की देखरेख और भोजन व्यवस्थाएं पंचायतों को सौंपी गई हैं। पशुपालन विभाग चिकित्सा सेवाएं और सहयोगी के रूप में कार्य कर रहा है। -डॉ. अनिल कुमार सिंह, सीवीओ
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शहर से लेकर गांवों तक की सड़कों पर गोवंश घूमते दिखाई दे रहे हैं। इनको देखकर दावों की पोल खुल रही है। ग्राम प्रधान, बीडीओ आदि अधिकारियों को गुमराह करने में कामयाब हो गए हैं, लेकिन लोगों को परेशानी आज भी उठानी पड़ रही है। बता दें कि अस्थायी गो आश्रय स्थलों की संख्या 13, वृहद गोशालाएं 3, कान्हा गो आश्रय स्थल 5, पंजीकृत गोशालाएं 4 और अपंजीकृत गोशालाएं 3 संचालित हो रहीं हैं। इनमें शहरी क्षेत्रों में 7 और ग्रामीण क्षेत्रों में 21 शामिल हैं।
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निराश्रित गोवंशों से मुक्त होने के प्रमाणपत्र ग्राम पंचायत और बीडीओ ले चुके हैं। इसके बाद भी सड़कों पर गोवंश दिखाई दे रहे हैं। इसकी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी। गोवंशों की देखरेख और भोजन व्यवस्थाएं पंचायतों को सौंपी गई हैं। पशुपालन विभाग चिकित्सा सेवाएं और सहयोगी के रूप में कार्य कर रहा है। -डॉ. अनिल कुमार सिंह, सीवीओ
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