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किवदंती बन गया होली मोहल्ला का प्राचीन कुआं

Thu, 04 Mar 2021 12:11 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 04 Mar 2021 12:11 AM IST
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The ancient well of Holi Mohalla has become a legend
होली मोहल्ला में स्थित कुऑ ।संवाद - फोटो : ETAH
एटा। फाल्गुन माह की बयार के साथ ही होली का खुमार छाने लगता है। हालांकि ब्रज की तरह यहां वसंत पंचमी से ही रंग और गुलाल की रंगत भले न दिखाई दे पर यहां होली का इतिहास काफी पुराना और दिलचस्प है। एक समय था जब शहर के होली मोहल्ला में ही होली जलती थी। लोग होली खेलने के बाद यहीं बने कुएं पर सामूहिक रूप से स्नान करते थे, पर अब यह केवल किंवदंती बनकर रह गया है।
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शहर की व्यस्त ठंडी सड़क से लगे इलाके होली मोहल्ला में विशालकाय होली रखी जाती है। यहां होली के दिन सबसे पहले होली जलती है, इसके बाद ही पूरे शहर में होलिका दहन की शुरूआत होती है।
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यहां होलिका दहन स्थल के समीप ही एक कुआं बना हुआ है। सत्तर के दशक से पूर्व तक यहां लोग सामूहिक रूप से होलिका दहन के बाद रंग और गुलाल से होली खेलते थे और इसी कुएं पर सामूहिक रूप से स्नान करते थे। होली के दिन इस कुएं के आसपास मेले जैसा नजारा होता था, जो कालांतर में केवल किंवदंती बनकर रह गया है।
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1890 में बना था कुआं
होलिका दहन की परंपरा होली मोहल्ला में बहुत प्राचीन है। यहां कब से होली का शुभारंभ हुआ, यह कोई बुजुर्ग भी ठीक से नहीं बता पाता। हां, इतना अवश्य बताते हैं कि राजा दिलसुख राय ने 1890 में कुआं का निर्माण कराया था। उस समय इस कुएं से आसपास के खेतों में लहलहाती फसलों की सिंचाई की जाती थी। इसके बाद 1930 के आसपास राजा गढ़ी लवाइन ने इसका जीर्णोद्घार कराया। जब यहां मकान बनते चले गए तो कुआं का पानी पीने के काम आने लगा। वर्तमान में कुआं पूरी तरह से सूख चुका है।
राजा दिलसुख राय ने 1890 में कुआं का निर्माण कराया था, एक समय था जब लोग होली खेलने के बाद इसी कुएं पर स्नान करते थे। तब नजारा देखने लायक होता था। कोई बाल्टी से पानी खींच रहा होता तो कोई नहा रहा होता था।
रमेश चंद, स्थानीय निवासी
कुआं का जो प्राचीन इतिहास है, वह अब तो पूरी तरह से विलुप्त हो चुका है। अब तो कुआं केवल किंवदंती बनकर रह गया है। इसमें आसपास के लोग कूड़ा डाल जाते हैं। पालिका को बताया पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
नरेश चंद, स्थानीय निवासी
हमने तो वो नजारा कभी नहीं देखा जब लोग होली खेलने के बाद इसी कुएं पर स्नान करते थे। मगर उस समय माहौल कैसा रहा होगा, यह उस जमाने की बातों को जानकर समझा जा सकता है। लोग होली का त्योहार मिल-जुलकर मनाते रहे होंगे।

सागर, स्थानीय निवासी
होली मोहल्ला में सबसे पहले होली जलती है, इसके बाद ही किसी अन्य मोहल्ले में। यहां के प्राचीन इतिहास को संजोकर नहीं रखा गया। यही वजह है कि आज की नौजवान पीढ़ी उस इतिहास से अनभिज्ञ है।
अभिषेक शर्मा, स्थानीय निवासी
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