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बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Thu, 22 Oct 2015 10:10 PM IST
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रामलीला कुभंकरण और रावण वध की लीलाओं का मंचन किया गया। बुराई के प्रतीक रावण का राम ने वध किया। अग्रिबाण से रावण का पुतला फूंकते ही राम भक्तों ने जयकारे लगाए।
मेघनाद वध के बाद रावण ने युद्ध के लिए कुंभकरण को भेजा। राम-लक्ष्मण ने कुंभकरण से जमकर युद्ध किया। राम ने उसका वध कर दिया। कुंभकरण के मरने के बाद रावण स्वंय युद्ध करने के लिए रण क्षेत्र में उतर आया। राम और रावण के बीच युद्ध शुरू हुआ।
रावण रथ पर युद्ध कर रहा था और राम बिना रथ के थे। तभी भगवान इंद्र ने अपना रथ राम के लिए भेजा । राम ने उस पर सवार होकर लंकेश से युद्ध किया। जब रावण के शीश कटने के बाद फिर से नया शीश निकलने लगे तो राम ने विभीषण से रावण को मारने का राज पूछा।
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विभीषण ने बताया कि लंकेश की नाभि पर प्रहार किया जाए। राम ने नाभि में बाण मारकर रावण का अमृत सूखा दिया। जिससे उसका अंत हो गया।
रावण के विशालकाय पुतले में राम द्वारा अग्रिबाण छोड़कर आग लगाई गई। वहीं कूुभंकरण के पुतले को भी आग लगाई गई। दोनों के पुतले जल उठे। आतिशबाजी का दर्शकों ने लुत्फ लिया।
स्वंयसेवी और सामाजिक संगठन भी सक्रिय नजर आए। इनके द्वारा खोया पाया शिविर लगाए गए।
गली कूंचों में भी जले रावण के पुतले
रावण का पुतला जलाने के लिए बच्चों के बीच काफी क्रेज देखा गया। बच्चों ने कागज, गत्ते के छोटे छोटे पुतले बनाए। इन पुतलों में भी पटाखे लगाए। देर शाम इन पुतलों का दहन किया।
झांकियां रही आकर्षण का केंद्र
दशहरा पर्व के मौके पर रामलीला कमेटी ने आकर्षक झांकियां सजवाईं। इसके अलावा प्रभु पार्क में काली के अखाड़ों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। देर रात काली के अखाड़े एवं झांकियों की शोभायात्रा का आयोजन भी किया गया। यह शोभायात्रा प्रभु पार्क से बाराद्वारी, रामलीला मंच होती हुई रामलीला मंदिर पर जाकर संपन्न हुई।
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मेघनाद वध के बाद रावण ने युद्ध के लिए कुंभकरण को भेजा। राम-लक्ष्मण ने कुंभकरण से जमकर युद्ध किया। राम ने उसका वध कर दिया। कुंभकरण के मरने के बाद रावण स्वंय युद्ध करने के लिए रण क्षेत्र में उतर आया। राम और रावण के बीच युद्ध शुरू हुआ।
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रावण रथ पर युद्ध कर रहा था और राम बिना रथ के थे। तभी भगवान इंद्र ने अपना रथ राम के लिए भेजा । राम ने उस पर सवार होकर लंकेश से युद्ध किया। जब रावण के शीश कटने के बाद फिर से नया शीश निकलने लगे तो राम ने विभीषण से रावण को मारने का राज पूछा।
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विभीषण ने बताया कि लंकेश की नाभि पर प्रहार किया जाए। राम ने नाभि में बाण मारकर रावण का अमृत सूखा दिया। जिससे उसका अंत हो गया।
रावण के विशालकाय पुतले में राम द्वारा अग्रिबाण छोड़कर आग लगाई गई। वहीं कूुभंकरण के पुतले को भी आग लगाई गई। दोनों के पुतले जल उठे। आतिशबाजी का दर्शकों ने लुत्फ लिया।
स्वंयसेवी और सामाजिक संगठन भी सक्रिय नजर आए। इनके द्वारा खोया पाया शिविर लगाए गए।
गली कूंचों में भी जले रावण के पुतले
रावण का पुतला जलाने के लिए बच्चों के बीच काफी क्रेज देखा गया। बच्चों ने कागज, गत्ते के छोटे छोटे पुतले बनाए। इन पुतलों में भी पटाखे लगाए। देर शाम इन पुतलों का दहन किया।
झांकियां रही आकर्षण का केंद्र
दशहरा पर्व के मौके पर रामलीला कमेटी ने आकर्षक झांकियां सजवाईं। इसके अलावा प्रभु पार्क में काली के अखाड़ों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। देर रात काली के अखाड़े एवं झांकियों की शोभायात्रा का आयोजन भी किया गया। यह शोभायात्रा प्रभु पार्क से बाराद्वारी, रामलीला मंच होती हुई रामलीला मंदिर पर जाकर संपन्न हुई।