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रुपयों से टूटती हैं बंदिशें तभी चलता हैं बंदीराज

Tue, 03 Mar 2015 10:57 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला एटा
ब्यूरो अमर उजाला एटा Updated Tue, 03 Mar 2015 10:57 PM IST
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Stretching restrictions in prison if money runs Bandiraj
 मथुरा जिला जेल में हुए गैंगवार को लोग अभी भुला नहीं पाए थे कि मंगलवार को जिला जेल में हुए बवाल से हर कोई सकते में हैं। ये जेल हमेशा ही सुर्खियों में रही है। बताया जा रहा है मोबाइल चार्ज करने के नाम पर जेल में वसूली की जाती है। वहीं अन्य प्रतिबंधित चीजों को भी अंदर पहुंचाने की कीमत वसूली जाती है।
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 मंगलवार को हुई घटना में जेलर एएन त्रिपाठी के हाथ की अंगुली फैक्चर हो गई। डिप्टी जेलर संजय राय के आंख के नीचे चोट आई। बंदीरक्षक रघुवंशी सिंह, वीरचंद्र तिवारी, शिवते जाफरी, दीपचंद वहीं बंदी मनोज, पंकज, राजीव, भूरा घायल हो गए।
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जिला जेल हमेशा सुर्खियों में रही है। कभी बंदी की मौत, भूख हड़ताल या फिर जेल प्रशासन पर लगने वाले अवैध वसूली, प्रताड़ित करने के आरोप लगते रहे हैं। बताया जा रहा है कि जेल में वसूली का भी खेल चलता है, मगर कोई भी खुलकर कहने की जहमत नहीं उठा पाता है। फोन रीचार्ज करने और अन्य सामान पहुंचाने की कीमत ली जाती है। दूसरी ओर सवाल यह उठ रहा है कि जेल के अंदर बंदी पर मोबाइल और सिम कहां से आईं।
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घटना के बाद सायरन काफी देर तक बजा। जबकि पास में ही पुलिस लाइन है लेकिन किसी ने आवाज नहीं सुनी। काफी देर बाद डीएम, एसएसपी और अन्य अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ जेल के पहुचे और स्थिति पर काबू पाया। बंदियों में गुस्सा देख जेल प्रशासन अन्य बैरकों की चेकिंग करने से कतराता रहा। बाद में फोर्स के पहुंचने के बाद चेकिंग हुई।

मानक से ज्यादा हैं बंदी
जेल प्रशासन की मानें तो जेल में केवल 600 बंदी ही रखे जा सकते हैं, मगर अभी करीब 1400 से अधिक बंदी हैं। एक-एक बैरक में 20 -25 बंदियों को रखा जा रहा है। जबकि स्टाफ कम है। सीएम अखिलेश यादव के जीजा सौरभ यादव भी इसी जेल में निरुद्ध हैं। सौरभ पिलुआ के गांव गुलाबपुर में हुए डबल मर्डर कार्ड में नामजद हैं।

बंदियों से मिलने पहुंचे परिवारीजन
जिला जेल में हुई घटना के बाद बंदियों के परिवारीजन उसने मिलने पहुंचे, लेकिन उन्हें जल्दी नहीं मिलने दिया। इसके चलते वह घंटों जेल के बाहर खड़े रहे। जो लोग सुबह जमानत पर रिहा हो रहे थे, वह भी काफी देरी से रिहा हुए। दोपहर बाद बंदियों से उनके परिवारीजन मिल सके। इस दौरान अन्य किसी संबंधित व्यक्ति को अंदर नहीं जाने दिया गया।


जेल में घटना हुई है। मोबाइल व सिम मिली हैं। बंदी और जेल पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। मामले की जांच कराई जा रही है। सख्त कार्रवाई होगी।
डीजी जेल लखनऊ, आरआर भटनागर

पहले जांच एडीएम वित्त राजेंद्र कुमार को सौंपी थी, लेकिन मंडलायुक्त ने उन्हें जांच सौंपी है। जेल के अंदर मोबाइल, सिम आदि मिल रहे हैं। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि जेल अधिकारियों की इसमें मिलीभगत और लापरवाही है।
- निधि केसरवानी, जिलाधिकारीे
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