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प्रतिमा बनवाने को तरस रहीं आंखे
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Sat, 25 Jul 2015 11:00 PM IST
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देश की खातिर कारगिल युद्ध में खून बहाने वाले शहीदों को आज लोग भुला चुके हैं। वर्ष 1998-99 में हुए युद्ध में एटा के दो वीर सपूतों ने भी पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए पटखनी दी थी और देश की खातिर दुश्मनों से लड़ते-लड़ते शहीद हो गए थे। आज इन शहीदों की शहादत को शासन-प्रशासन ही नहीं इनके अपने भी भुला चुके हैं।
गांव घिलौआ निवासी शहीद पुष्पेंद्र यादव देश सेवा के लिए 22 साल की उम्र में फौज में भर्ती हुए थे। घरवाले बताते हैं कि कारगिल युद्ध के दौरान वह जम्मू कश्मीर में तैनात थे। 30 अगस्त 1999 को शहीद पुष्पेंद्र यादव पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए जम्मू-कश्मीर की सीमा पर शहीद हो गए, लेकिन इस शहीद के परिवार वालों की शासन प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा है। आज भी उनके माता-पिता शहीद की प्रतिमा लगवाने व गेट बनवाने के लिए प्रशासन की राह ताक रहे हैं। 85 वर्षीय पिता शोभाराम यादव ने बताया कि शहीद होने के बाद आर्मी के जवानों और न स्थानीय प्रशासन ने कोई ध्यान दिया है। केवल समाधि स्थल बना दिया है लेकिन मूर्ति नहीं रखवाई और न ही शहीद के नाम से गांव में गेट बनवाया गया है। हर साल कारगिल शहीद दिवस मनाया जाता है लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। ऐसे ही कारगिल युद्ध में जैथरा के गांव छोटी जरारी निवासी वीर सपूत उमेश यादव शहीद हो गए थे।
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गांव घिलौआ निवासी शहीद पुष्पेंद्र यादव देश सेवा के लिए 22 साल की उम्र में फौज में भर्ती हुए थे। घरवाले बताते हैं कि कारगिल युद्ध के दौरान वह जम्मू कश्मीर में तैनात थे। 30 अगस्त 1999 को शहीद पुष्पेंद्र यादव पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए जम्मू-कश्मीर की सीमा पर शहीद हो गए, लेकिन इस शहीद के परिवार वालों की शासन प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा है। आज भी उनके माता-पिता शहीद की प्रतिमा लगवाने व गेट बनवाने के लिए प्रशासन की राह ताक रहे हैं। 85 वर्षीय पिता शोभाराम यादव ने बताया कि शहीद होने के बाद आर्मी के जवानों और न स्थानीय प्रशासन ने कोई ध्यान दिया है। केवल समाधि स्थल बना दिया है लेकिन मूर्ति नहीं रखवाई और न ही शहीद के नाम से गांव में गेट बनवाया गया है। हर साल कारगिल शहीद दिवस मनाया जाता है लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। ऐसे ही कारगिल युद्ध में जैथरा के गांव छोटी जरारी निवासी वीर सपूत उमेश यादव शहीद हो गए थे।
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