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जल्द ही जिले की ब्लड बैंक से मिलेगी प्लेटलेट्स
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एटा। हर साल डेंगू के दंश से प्रभावित लोगों को प्लेटलेट्स के लिए आगरा, अलीगढ़ और दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है। जिले में कहीं भी इसकी व्यवस्था नहीं है। अब जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज के अधीन आने पर व्यवस्थाएं मजबूत की जा रही हैं। यहां स्थापित ब्लड बैंक में एक करोड़ रुपये की ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाई जाएगी। जिससे प्लेटलेट्स ही नहीं, प्लाज्मा, आरबीसी और डब्ल्यूबीसी की समस्या भी दूर होगी।
मेडिकल कॉलेज की सुविधाएं धीरे-धीरे मिलना शुरू हो रही हैं। कॉलेज के चिकित्सक जिला अस्पताल की ओपीडी में बैठने लगे हैं। इससे लोगों को उम्मीद है कि अब उन्हें जिले में ही बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके तहत जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक से भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। यहां दो पैथोलॉजिस्ट ने तैनाती ले ली है। साथ ही ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाने की कवायद शुरू कर दी गई है। मशीन लगते ही जिले को लोगों को प्लेटलेट्स के अलावा प्लाज्मा, आरबीसी और डब्ल्यूवीसी यहीं से उपलब्ध होने लगेंगे। अभी पूरा ब्लड एक ही मरीज को दिया जाता है। कंपोनेंट अलग होने के बाद डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, झुलसे मरीजों को प्लाज्मा, एचआइवी मरीजों को डब्ल्यूबीसी और थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी दी जा सकेगी।
जिले में एक ही ब्लड बैंक
20 लाख की आबादी में पूरे जिले में मात्र एक ही ब्लड बैंक संचालित है। इसकी क्षमता 273 यूनिट की है। जबकि अधिकांश दिनों में यहां निगेटिव ग्रुप का ब्लड उपलब्ध नहीं रहता है।
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मेडिकल कॉलेज की सुविधाएं धीरे-धीरे मिलना शुरू हो रही हैं। कॉलेज के चिकित्सक जिला अस्पताल की ओपीडी में बैठने लगे हैं। इससे लोगों को उम्मीद है कि अब उन्हें जिले में ही बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके तहत जिला अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक से भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। यहां दो पैथोलॉजिस्ट ने तैनाती ले ली है। साथ ही ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाने की कवायद शुरू कर दी गई है। मशीन लगते ही जिले को लोगों को प्लेटलेट्स के अलावा प्लाज्मा, आरबीसी और डब्ल्यूवीसी यहीं से उपलब्ध होने लगेंगे। अभी पूरा ब्लड एक ही मरीज को दिया जाता है। कंपोनेंट अलग होने के बाद डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, झुलसे मरीजों को प्लाज्मा, एचआइवी मरीजों को डब्ल्यूबीसी और थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी दी जा सकेगी।
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जिले में एक ही ब्लड बैंक
20 लाख की आबादी में पूरे जिले में मात्र एक ही ब्लड बैंक संचालित है। इसकी क्षमता 273 यूनिट की है। जबकि अधिकांश दिनों में यहां निगेटिव ग्रुप का ब्लड उपलब्ध नहीं रहता है।
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