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वित्तविहीन संस्थाएं नहीं देंगी खेल, स्काउट एवं रेडक्रॉस शुल्क
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एटा। जिले में संचालित वित्तविहीन माध्यमिक स्कूल खेलकूद, स्काउट एवं रेडक्रॉस का अंशदान जमा नहीं करेंगे। वित्तविहीन प्रधानाचार्य परिषद ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा परिषद का आदेश प्रस्तुत कर दिया है।
राजकीय, एडिड विद्यालयों की तरह जिला अंश जमा करने वाली स्ववित्तपोषित संस्थाओं ने शुल्क न देने का एलान किया है। इनका कहना है कि शासन ने उन्हें विद्यार्थियों से खेलकूद, स्काउट एवं रेडक्रॉस शुल्क न लेने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में जिला व राज्य अंश की बात ही कहां है। प्रधानाचार्य परिषद के मंडलीय अध्यक्ष अभिलाख सिंह यादव ने 2015 में तत्कालीन शिक्षा निदेशक डॉ अवध नरेश शर्मा का आदेश प्रस्तुत करते हुए कहा कि वित्तविहीन संस्थाओं को शुल्क न वसूलने के आदेश दिए हैं। तो फिर विभाग इन संस्थाओं से जिला एवं राज्य अंश के नाम पर शुल्क अंश की मांग क्यों कर रहा है। बताते चलें कि डीआईओएस कार्यालय ने जिले की सभी संस्थाओं को 15 रुपये प्रतिछात्र खेलकूद एवं सात रुपये की दर से स्काउट शुल्क अंश जमा करने के निर्देश दिए हैं। जिले में संचालित 580 माध्यमिक विद्यालयों में 502 स्ववित्तपोषित विद्यालय हैं।
शुल्क के नाम पर रहता है विवाद
शुल्क अंश जमा करने के नाम पर हर वर्ष विरोध के स्वर रहे हैं। आरोप है कि छात्र-छात्राओं से पूरा शुल्क वसूलने वाली माध्यमिक संस्थाएं शुल्क अंश जमा करने में हमेशा आनाकानी करती रही हैं। विगत वर्षों के आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंजीकृत छात्र-छात्राओं की तुलना में आधा शुल्क भी जमा नहीं होता।
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राजकीय, एडिड विद्यालयों की तरह जिला अंश जमा करने वाली स्ववित्तपोषित संस्थाओं ने शुल्क न देने का एलान किया है। इनका कहना है कि शासन ने उन्हें विद्यार्थियों से खेलकूद, स्काउट एवं रेडक्रॉस शुल्क न लेने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में जिला व राज्य अंश की बात ही कहां है। प्रधानाचार्य परिषद के मंडलीय अध्यक्ष अभिलाख सिंह यादव ने 2015 में तत्कालीन शिक्षा निदेशक डॉ अवध नरेश शर्मा का आदेश प्रस्तुत करते हुए कहा कि वित्तविहीन संस्थाओं को शुल्क न वसूलने के आदेश दिए हैं। तो फिर विभाग इन संस्थाओं से जिला एवं राज्य अंश के नाम पर शुल्क अंश की मांग क्यों कर रहा है। बताते चलें कि डीआईओएस कार्यालय ने जिले की सभी संस्थाओं को 15 रुपये प्रतिछात्र खेलकूद एवं सात रुपये की दर से स्काउट शुल्क अंश जमा करने के निर्देश दिए हैं। जिले में संचालित 580 माध्यमिक विद्यालयों में 502 स्ववित्तपोषित विद्यालय हैं।
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शुल्क के नाम पर रहता है विवाद
शुल्क अंश जमा करने के नाम पर हर वर्ष विरोध के स्वर रहे हैं। आरोप है कि छात्र-छात्राओं से पूरा शुल्क वसूलने वाली माध्यमिक संस्थाएं शुल्क अंश जमा करने में हमेशा आनाकानी करती रही हैं। विगत वर्षों के आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंजीकृत छात्र-छात्राओं की तुलना में आधा शुल्क भी जमा नहीं होता।
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