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Etah News: लखनऊ भेजी सीएचसी पर दवाएं जलाने की रिपोर्ट
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एटा। शुक्रवार की रात सकीट सीएचसी पर दवाएं जलाई गईं थीं। मामले में उच्चाधिकारियों ने सीएमओ को जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं दवाएं जलाने की रिपोर्ट लखनऊ यूनीसेफ को भेजी गई है। सीएचसी परिसर में आयरन, कैल्शियम, आयरन सीरप, टीबी की सैंपलिंग किट सहित टीकाकरण की किताबें, ओआरएस के पैकट जलाए गए थे। जानकारी मिलने पर शुक्रवार की रात व शनिवार की सुबह अमर उजाला की टीम वहां पहुंची। जहां पता चला कि दवाओं की मात्रा काफी रही थी।
वहीं ये दवाएं गर्भवती महिलाओं सहित अन्य रोगियों को खिलाई जाती हैं। मामले में सीएचसी पर तैनात चिकित्साधिकारी द्वारा बताया गया था कि दवाएं एक्सपायरी डेट की थीं। जबकि कूड़े में जल रही दवाओं में एक-दो रेपर अधजले मिले। उन पर एक्सपायरी डेट वर्ष 2024 की पड़ी हुई थी। साथ ही एक्सपायरी डेट की दवाओं के निस्तारण के लिए जलाने का तरीका भी सही नहीं है। पूरे मामले में लखनऊ यूनीसेफ को रिपोर्ट भेजी गई है। सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि दवाएं एक्सपायरी डेट की बताई गईं हैं। मामले की जांच की जा रही है। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एक्सपायरी दवाओं को गड्ढे में दबाने का है प्रावधान
अगर कहीं अस्पताल में दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं, तो नियमानुसार उनकी सूची बनाई जाती है। इसके बाद किसी वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष दवाओं को रैपर से बाहर निकालकर गड्डे में दबाकर निस्तारण किए जाने का प्रावधान है, लेकिन सीएचसी पर ऐसा नहीं हुआ। यहां दवाओं को रात के अंधेरे में गुपचुप ढंग से आग के हवाले कर दिया गया, जो संदेह पैदा करता है।
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वहीं ये दवाएं गर्भवती महिलाओं सहित अन्य रोगियों को खिलाई जाती हैं। मामले में सीएचसी पर तैनात चिकित्साधिकारी द्वारा बताया गया था कि दवाएं एक्सपायरी डेट की थीं। जबकि कूड़े में जल रही दवाओं में एक-दो रेपर अधजले मिले। उन पर एक्सपायरी डेट वर्ष 2024 की पड़ी हुई थी। साथ ही एक्सपायरी डेट की दवाओं के निस्तारण के लिए जलाने का तरीका भी सही नहीं है। पूरे मामले में लखनऊ यूनीसेफ को रिपोर्ट भेजी गई है। सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि दवाएं एक्सपायरी डेट की बताई गईं हैं। मामले की जांच की जा रही है। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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एक्सपायरी दवाओं को गड्ढे में दबाने का है प्रावधान
अगर कहीं अस्पताल में दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं, तो नियमानुसार उनकी सूची बनाई जाती है। इसके बाद किसी वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष दवाओं को रैपर से बाहर निकालकर गड्डे में दबाकर निस्तारण किए जाने का प्रावधान है, लेकिन सीएचसी पर ऐसा नहीं हुआ। यहां दवाओं को रात के अंधेरे में गुपचुप ढंग से आग के हवाले कर दिया गया, जो संदेह पैदा करता है।
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