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Etah News: थाईलैंड में प्रोफेसर मीना यादव का शोधपत्र प्रकाशित
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फोटो - मूलरूप से बाकलपुर गांव की रहने वाली हैं प्रोफेसर
संवाद न्यूज एजेंसी
एटा। मूल रूप से एटा की रहने वाली प्रोफेसर मीना यादव का शोधपत्र थाईलैंड में प्रकाशित हुआ है। इसमें भारत और थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां समाहित की गई हैं।
ग्राम रामनगर की रहने वाली मीना यादव वर्तमान में बरेली कॉलेज, बरेली में हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे रही हैं। 9 और 10 जून को थाईलैंड की राजधानी में यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। जिसमें मीना यादव को आमंत्रित किया गया था। अपने शोधपत्र में उन्होंने भाई-थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंधों के अलावा भारतीय शिक्षा व्यवस्था में छात्र मूल्यांकन का भी वर्णन किया है।
बता दें कि इससे पूर्व 15 से 17 फरवरी 2023 तक फिजी में आयोजित 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन, 21 से 22 जनवरी 2023 को भारत-मलेशिया के सांस्कृतिक संबंध विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, 2018 में मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में भी प्रो. मीना यादव ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर चुकी हैं। परिचर्चाओं में देश के सभी शिक्षण संस्थानों में हिंदी विषय का पठन-पाठन नहीं होने पर चिंता व्यक्त कर चुकी हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
एटा। मूल रूप से एटा की रहने वाली प्रोफेसर मीना यादव का शोधपत्र थाईलैंड में प्रकाशित हुआ है। इसमें भारत और थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां समाहित की गई हैं।
ग्राम रामनगर की रहने वाली मीना यादव वर्तमान में बरेली कॉलेज, बरेली में हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे रही हैं। 9 और 10 जून को थाईलैंड की राजधानी में यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। जिसमें मीना यादव को आमंत्रित किया गया था। अपने शोधपत्र में उन्होंने भाई-थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंधों के अलावा भारतीय शिक्षा व्यवस्था में छात्र मूल्यांकन का भी वर्णन किया है।
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बता दें कि इससे पूर्व 15 से 17 फरवरी 2023 तक फिजी में आयोजित 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन, 21 से 22 जनवरी 2023 को भारत-मलेशिया के सांस्कृतिक संबंध विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, 2018 में मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में भी प्रो. मीना यादव ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर चुकी हैं। परिचर्चाओं में देश के सभी शिक्षण संस्थानों में हिंदी विषय का पठन-पाठन नहीं होने पर चिंता व्यक्त कर चुकी हैं।
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