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खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण, सांस लेना दूभर
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जीटी रोड स्थित सुन्ना गांव के पास हो रहे सड़क निर्माण कार्य के कारण गुजरते वाहनों से उड़ती धूल।
- फोटो : ETAH
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एटा। शहर के लोगों की सेहत का दुश्मन बन गया है जीटी रोड और बाइपास का निर्माण। वाहनों के कारण उड़ती धूल आबोहवा को प्रदूषित कर रही है। इससे सभी का सांस लेना दूभर हो गया है। आसमान में धुंध बढ़ने से सीवर लाइन डालने का काम, कलक्ट्रेट से लेकर शहर के अन्य हिस्सों में धूल भरा वातावरण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ा रहा है। इससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सोमवार को 400 पर जा पहुंचा।
शहर के लोग शुद्ध हवा में सांस भी नहीं ले पा रहे हैं। लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इसका मुख्य कारण शहर के बाहर चल रहे फोरलेन सड़क निर्माण का कार्य है। इससे चारों तरफ धूल के गुबार उड़ते नजर आते हैं। धुंध की वजह से खाना-पीना भी ढंग से नहीं बना और खा पा रहे हैं। धूल की परत आसपास के पेड़-पौधों और मकानों पर छा गई है।
पानी छिड़काव के कोई इंतजाम नहीं
सड़क पर डाली गई मिट्टी और बजरी वाहनों के आवागम से उड़ती है। निर्माणाधीन कंपनी की ओर से पानी का छिड़काव तक नहीं कराया जा रहा है। ग्रामीण धूल से बचने के लिए खुद सड़क पर पाइप लगाकर पानी का छिड़काव करते हैं। ढाबा संचालकों को भी पानी छिड़काव करना पड़ रहा है।
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सड़क पर पानी के छिड़काव के लिए 8 से 10 टैंकर लगाए हैं, जो जीटी रोड पर रोज पानी का छिड़काव कर रहे हैं।
- अमित भाटिया, पीएनसी सुपरवाइजर
दो माह में तैयार होगी सड़क
सुपरवाइजर अमित भाटिया के मुताबिक सड़क पर जहां-जहां लाल बजरी पड़ी है, उसे डाबर सड़क बनाने में दो माह का समय लगेगा। अभी 65 फीसदी कार्य बाकी है। हाल ही में लालगढ़ी से कासगंज रोड तक छह किमी कब्जा वाली सड़क का निर्माण भी कराना है।
जनवरी 2021 तक पूरा होगा फोरलेन
अमित भाटिया ने बताया कि फोरलेन सड़क का निर्माण 31 जनवरी 2021 तक पूरा किया जाएगा। हालांकि सितंबर 2020 तक कार्य को पूरा करने का हमारा लक्ष्य है।
खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण
सोमवार को शहर के एक्यूआई में और बढ़ोतरी हो गई। दोपहर के सवा बारह बजे 400 के स्तर पर पहुंच गया।
समय- एक्यूआई
रात 01:30 200
रात 03:15 150
दोपहर 12:15 400
शाम 04:00 250
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शहर के लोग शुद्ध हवा में सांस भी नहीं ले पा रहे हैं। लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा। इसका मुख्य कारण शहर के बाहर चल रहे फोरलेन सड़क निर्माण का कार्य है। इससे चारों तरफ धूल के गुबार उड़ते नजर आते हैं। धुंध की वजह से खाना-पीना भी ढंग से नहीं बना और खा पा रहे हैं। धूल की परत आसपास के पेड़-पौधों और मकानों पर छा गई है।
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पानी छिड़काव के कोई इंतजाम नहीं
सड़क पर डाली गई मिट्टी और बजरी वाहनों के आवागम से उड़ती है। निर्माणाधीन कंपनी की ओर से पानी का छिड़काव तक नहीं कराया जा रहा है। ग्रामीण धूल से बचने के लिए खुद सड़क पर पाइप लगाकर पानी का छिड़काव करते हैं। ढाबा संचालकों को भी पानी छिड़काव करना पड़ रहा है।
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सड़क पर पानी के छिड़काव के लिए 8 से 10 टैंकर लगाए हैं, जो जीटी रोड पर रोज पानी का छिड़काव कर रहे हैं।
- अमित भाटिया, पीएनसी सुपरवाइजर
दो माह में तैयार होगी सड़क
सुपरवाइजर अमित भाटिया के मुताबिक सड़क पर जहां-जहां लाल बजरी पड़ी है, उसे डाबर सड़क बनाने में दो माह का समय लगेगा। अभी 65 फीसदी कार्य बाकी है। हाल ही में लालगढ़ी से कासगंज रोड तक छह किमी कब्जा वाली सड़क का निर्माण भी कराना है।
जनवरी 2021 तक पूरा होगा फोरलेन
अमित भाटिया ने बताया कि फोरलेन सड़क का निर्माण 31 जनवरी 2021 तक पूरा किया जाएगा। हालांकि सितंबर 2020 तक कार्य को पूरा करने का हमारा लक्ष्य है।
खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण
सोमवार को शहर के एक्यूआई में और बढ़ोतरी हो गई। दोपहर के सवा बारह बजे 400 के स्तर पर पहुंच गया।
समय- एक्यूआई
रात 01:30 200
रात 03:15 150
दोपहर 12:15 400
शाम 04:00 250