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Etah News: प्रदूषण ने हवा को बनाया खतरनाक, सांस रोगियों की मुसीबत
Fri, 01 Nov 2024 05:49 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Fri, 01 Nov 2024 05:49 PM IST
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दिवाली के अगले दिन ही 200 से ऊपर पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक
6 मरीजों को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में कराया गया भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
एटा। दिवाली पर हुई आतिशबाजी ने लाेगों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासतौर से सांस रोगियों के लिए अचानक बढ़ा हुआ एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) मुसीबत बन गया। बारूद के साथ तमाम खतरनाक रसायन के हवा में घुलने से प्रदूषण ने हवा को खतरनाक बना दिया है। शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के ऊपर पहुंच गया। सांस संबंधी समस्या होने पर 6 लोगों को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।
दिवाली के बाद शुक्रवार को सुबह से ही मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ लगना शुरू हो गई। प्रतिदिन के सापेक्ष कॉलेज में मरीज नहीं पहुंचे, फिर भी काउंटर पर 620 मरीजाें के पर्चे बने। फिजीशियन कक्ष में डॉ. कौस्तुभ राज सिंह द्वारा मरीजों को देखा जा रहा था। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के कारण सांस के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। दिवाली से पहले 30 से 35 मरीज उनके पास पहुंचते थे। जबकि शुक्रवार को 50 मरीज सांस के रोग के पहुंचे।
वहीं, आंखों में जलन की शिकायत लेकर 15 से 20 मरीज नेत्र विभाग में पहुंचे। जबकि कॉलेज की इमरजेंसी में 6 मरीजों को सांस की समस्या के चलते भर्ती किया गया। सीएमएस डॉ. सुरेश चंदा ने बताया कि सांस रोगियों और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी बढ़ गई है। लोगों को मास्क पहनने और अनावश्यक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। आतिशबाजी से प्रदूषण बढ़ा है। इससे दिक्कत और बढ़ गई है।
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6 मरीजों को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में कराया गया भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
एटा। दिवाली पर हुई आतिशबाजी ने लाेगों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासतौर से सांस रोगियों के लिए अचानक बढ़ा हुआ एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) मुसीबत बन गया। बारूद के साथ तमाम खतरनाक रसायन के हवा में घुलने से प्रदूषण ने हवा को खतरनाक बना दिया है। शुक्रवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के ऊपर पहुंच गया। सांस संबंधी समस्या होने पर 6 लोगों को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।
दिवाली के बाद शुक्रवार को सुबह से ही मेडिकल कॉलेज में मरीजों की भीड़ लगना शुरू हो गई। प्रतिदिन के सापेक्ष कॉलेज में मरीज नहीं पहुंचे, फिर भी काउंटर पर 620 मरीजाें के पर्चे बने। फिजीशियन कक्ष में डॉ. कौस्तुभ राज सिंह द्वारा मरीजों को देखा जा रहा था। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के कारण सांस के रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। दिवाली से पहले 30 से 35 मरीज उनके पास पहुंचते थे। जबकि शुक्रवार को 50 मरीज सांस के रोग के पहुंचे।
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वहीं, आंखों में जलन की शिकायत लेकर 15 से 20 मरीज नेत्र विभाग में पहुंचे। जबकि कॉलेज की इमरजेंसी में 6 मरीजों को सांस की समस्या के चलते भर्ती किया गया। सीएमएस डॉ. सुरेश चंदा ने बताया कि सांस रोगियों और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी बढ़ गई है। लोगों को मास्क पहनने और अनावश्यक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। आतिशबाजी से प्रदूषण बढ़ा है। इससे दिक्कत और बढ़ गई है।
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