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कागजों में रोपे, हकीकत में जमीन पर ही छोड़े पौधे
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एटा। वन महोत्सव के तहत जिले में 23 लाख पौधे रोपित किए जाने का दावा किया गया है। ये कागजों में रोपित हो गए और हकीकत में जमीन पर छोड़ दिए गए। वन विभाग सहित सभी संबंधित विभाग लक्ष्य के अनुरूप पूरे पौधे लगाने की बात कह रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। सबसे बड़े कार्यक्रम के दौरान गांव भदुआ में पौधरोपण हुआ था। जब तक अधिकारी रहे, पौधे लगाने की औपचारिकता चली, उनके जाते ही पौधे जहां के तहां छोड़ दिए। जिन्हें गड्ढों में जगह देने वाला कोई नहीं है।
विकासखंड निधौली कलां क्षेत्र के गांव भदुआ में ग्राम समाज की जमीन पर चार जुलाई को वृहद स्तर पर पौधरोपण किया गया। यहां पर 15 हजार पौधे लगाए जाने थे। शासन से भेजे गए नोडल अधिकारी गोविंद राजू एनएस, डीएम अंकित अग्रवाल की मौजूदगी में तमाम लोग पौधे लगाने पहुंचे, लेकिन अफसरों के जाने के बाद सभी चले गए। सैकड़ों पौधे पॉलीथिन में बंद जमीन पर ही रखे सूख रहे हैं।
एक पौधा तैयार करने में आती करीब 6 रुपये की लागत
रेंजर सुदेश भारती ने बताया कि एक पौधा तैयार करने में वन विभाग का करीब 6 रुपये का खर्चा होता है। इस तरह वन विभाग में लगाए गए 15 हजार पौधों की लागत करीब 90 हजार रुपये है। उन्होंने बताया कि वन विभाग स्वयं पौधे तैयार करता है।
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विकासखंड निधौली कलां क्षेत्र के गांव भदुआ में ग्राम समाज की जमीन पर चार जुलाई को वृहद स्तर पर पौधरोपण किया गया। यहां पर 15 हजार पौधे लगाए जाने थे। शासन से भेजे गए नोडल अधिकारी गोविंद राजू एनएस, डीएम अंकित अग्रवाल की मौजूदगी में तमाम लोग पौधे लगाने पहुंचे, लेकिन अफसरों के जाने के बाद सभी चले गए। सैकड़ों पौधे पॉलीथिन में बंद जमीन पर ही रखे सूख रहे हैं।
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एक पौधा तैयार करने में आती करीब 6 रुपये की लागत
रेंजर सुदेश भारती ने बताया कि एक पौधा तैयार करने में वन विभाग का करीब 6 रुपये का खर्चा होता है। इस तरह वन विभाग में लगाए गए 15 हजार पौधों की लागत करीब 90 हजार रुपये है। उन्होंने बताया कि वन विभाग स्वयं पौधे तैयार करता है।
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