श्मशान पर शव रखकर धरना: अंतिम संस्कार को पहुंचे तो मिला अतिक्रमण, SDM ने हटवाया कब्जा, फिर हुई अंत्येष्टि
एटा में श्मशान की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। बुधवार की सुबह शव का अंतिम संस्कार के लिए लोग पहुंचे। अतिक्रमण देख वह शव रखकर धरने पर बैठ गए। करीब चार घंटे तक शव रखकर बैठे रहे। सूचना अधिकारियों ने पहुंचकर पैमाइश कराई और कब्जा हटवाया। इसके बाद अंत्येष्टि की गई।
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उत्तर प्रदेश के एटा में श्मशान की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। बुधवार की सुबह शव का अंतिम संस्कार के लिए लोग पहुंचे। अतिक्रमण देख वह शव रखकर धरने पर बैठ गए। करीब चार घंटे तक शव रखकर बैठे रहे। सूचना अधिकारियों ने पहुंचकर पैमाइश कराई और कब्जा हटवाया। इसके बाद अंत्येष्टि की गई।
मामला जलेसर थाना क्षेत्र के शेरपुर गांव का है। यहां मंगलवार की शाम करीब पांच बजे गांव के किशनलाल (50) की बीमारी के चलते मौत हो गई। परिजन व अन्य लोग बुधवार सुबह करीब सात बजे शव लेकर दाह संस्कार करने के लिए श्मशान पहुंचे। लेकिन श्मशान की भूमि पर फसल हो रही थी। कब्जेदारों ने दाह संस्कार से रोक दिया। काफी देर तक वहां वाद-विवाद चलता रहा। बाद में मृतक के भाई प्रकाश ने मामले की जानकारी कोतवाली पुलिस को दी। पुलिस ने राजस्व विभाग को भी मामले से अवगत कराया।
कब्जा हटाने के बाद किया गया शव का अंतिम संस्कार
एसडीएम रामनयन सिंह क्षेत्रीय लेखपाल व कानूनगो के साथ वहां पहुंचे। जमीन की पैमाइश कराकर श्मशान की भूमि को चिह्नित किया गया। इस पर हो रही गेहूं की फसल को कटवाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराया। इसके बाद करीब 11 बजे किशनलाल के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
वाल्मीकि समाज को 20 साल बाद वापस मिला श्मशान
गांव के प्रकाश, राकेश, चोब सिंह, ओमप्रकाश आदि लोगों ने बताया कि श्मशान की चार डेसिमल जमीन पर गांव के कुछ लोगों का कब्जा बीस वर्ष से था। उन्होंने इस जमीन को अपने खेत में मिला लिया था। समाज में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद शव का अंतिम संस्कार बंबा किनारे या अन्य किसी जगह करना पड़ता था।
एसडीएम रामनयन सिंह ने बताया कि श्मशान की जगह पर गांव के ही व्यक्ति का कब्जा था। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर कब्जा मुक्त कराकर दाह संस्कार कराया गया है।