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डेढ़ दशक बाद भी सौ एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र खाली
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Mon, 17 Aug 2015 06:03 PM IST
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उद्योग स्थापना तो दूर दशकों बाद भी जनपदीय उद्योग केंद्रों का विकास नहीं हो पा रहा। भूमि आवंटन के बाद डेढ़ दशक बाद भी यहां उद्योगपति नहीं पहुंच रहे। सौ एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले सैंथरी स्थित उद्योग क्षेत्र में मात्र एक यूनिट ही स्थापित हुई है।
18 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में औद्योगिक विकास न के बराबर है। उद्योग धंधे तो दूर यहां के औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित नहीं हो पा रहे। बिजली, सुरक्षा एवं वांछित इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में सैंथरी स्थित आईआईडीसी एवं यूपी एसआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र आज भी अविकसित है। अव्यवस्थाओं का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सौ एकड़ से अधिक के इस औद्योगिक क्षेत्र में न तो सड़कें हैं और न ही पेयजल की व्यवस्थाएं हैं। ऐसे में भूमि आवंटन के बाद नियमित राजस्व दे रहे कारोबारी भी यहां नहीं पहुंच रहे। पंद्रह वर्ष बाद एकीकृत उद्योग विकास केंद्र में एक फूड प्रोडक्ट इकाई की स्थापना हुई है।
विभागीय उपेक्षा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे क्षेत्र में खड़ी बड़ी बड़ी घास औद्योगिक क्षेत्र को भयाभह बना रहे हैं। वहीं काई-जंग एवं अन्य गंदगी के चलते यहां लगे बोर्ड अपठनीय हो गए हैं।
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जिले में तीन उद्योग केंद्र हैं। इनमें से जिला उद्योग केंद्र ही आंशिक रूप से विकसित है। जबकि शेष दो आईआईडीसी(इंटीग्रेटिड इंडस्ट्रियल डवलेपमेंट सेंटर) एवं यूपीएसआईडीसी पूरी तरह से अविकसित हैं। सौ एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले इस औद्योगिक क्षेत्र में पंद्रह वर्ष बाद एक मात्र जुपीटर फूड प्रोडक्ट यूनिट की स्थापना हुई है।
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आईआईडीसी(इंटीग्ऱ्ेटिड इंडस्ट्रियल डवलेपमेंट सेंटर) में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों में विकास करने के बाद भी राज्य स्तर पर इसको विकसित नहीं किया जा रहा। यहां औद्योगिक सुविधाएं तो दूर सड़क, बिजली-पानी जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं का भी अभाव है।
---प्रसून वार्ष्णेय, युवा उद्योगपति, इंडस्ट्रियल एरिया, एटा
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स्थानीय विभाग एवं अधिकारियों की मनमानी के चलते सरकारी योजनाओं का लाभ भी आम कारोबारी को नहीं मिल पा रहा। योजनाएं तो हैं लेकिन निर्णयों का विलंब कारोबार एवं कारोबारियों पर भारी पड़ता है। बिजली अव्यवस्था, असुरक्षा एवं औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर न मिलने से उद्योगपति निराश हैं।
---आलोक जैन, कारोबारी, एटा
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शहर से दूर होने के चलते कारोबारी असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। यूपीएसआईडीसी द्वारा भूमि आवंटन हो चुका है लेकिन कारोबार स्थापना नहीं हो रही। ऐसे में यहां का विकास भी गति नहीं पकड़ पा रहा। और बड़े उद्योग क्षेत्र को उद्योग इकाइयों की दरकार है।
---वीएस परिहार, असिसटेंट कमिश्नर उद्योग क्षेत्र, एटा
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18 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में औद्योगिक विकास न के बराबर है। उद्योग धंधे तो दूर यहां के औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित नहीं हो पा रहे। बिजली, सुरक्षा एवं वांछित इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में सैंथरी स्थित आईआईडीसी एवं यूपी एसआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र आज भी अविकसित है। अव्यवस्थाओं का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सौ एकड़ से अधिक के इस औद्योगिक क्षेत्र में न तो सड़कें हैं और न ही पेयजल की व्यवस्थाएं हैं। ऐसे में भूमि आवंटन के बाद नियमित राजस्व दे रहे कारोबारी भी यहां नहीं पहुंच रहे। पंद्रह वर्ष बाद एकीकृत उद्योग विकास केंद्र में एक फूड प्रोडक्ट इकाई की स्थापना हुई है।
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विभागीय उपेक्षा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे क्षेत्र में खड़ी बड़ी बड़ी घास औद्योगिक क्षेत्र को भयाभह बना रहे हैं। वहीं काई-जंग एवं अन्य गंदगी के चलते यहां लगे बोर्ड अपठनीय हो गए हैं।
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जिले में तीन उद्योग केंद्र हैं। इनमें से जिला उद्योग केंद्र ही आंशिक रूप से विकसित है। जबकि शेष दो आईआईडीसी(इंटीग्रेटिड इंडस्ट्रियल डवलेपमेंट सेंटर) एवं यूपीएसआईडीसी पूरी तरह से अविकसित हैं। सौ एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले इस औद्योगिक क्षेत्र में पंद्रह वर्ष बाद एक मात्र जुपीटर फूड प्रोडक्ट यूनिट की स्थापना हुई है।
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आईआईडीसी(इंटीग्ऱ्ेटिड इंडस्ट्रियल डवलेपमेंट सेंटर) में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों में विकास करने के बाद भी राज्य स्तर पर इसको विकसित नहीं किया जा रहा। यहां औद्योगिक सुविधाएं तो दूर सड़क, बिजली-पानी जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं का भी अभाव है।
---प्रसून वार्ष्णेय, युवा उद्योगपति, इंडस्ट्रियल एरिया, एटा
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स्थानीय विभाग एवं अधिकारियों की मनमानी के चलते सरकारी योजनाओं का लाभ भी आम कारोबारी को नहीं मिल पा रहा। योजनाएं तो हैं लेकिन निर्णयों का विलंब कारोबार एवं कारोबारियों पर भारी पड़ता है। बिजली अव्यवस्था, असुरक्षा एवं औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर न मिलने से उद्योगपति निराश हैं।
---आलोक जैन, कारोबारी, एटा
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शहर से दूर होने के चलते कारोबारी असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। यूपीएसआईडीसी द्वारा भूमि आवंटन हो चुका है लेकिन कारोबार स्थापना नहीं हो रही। ऐसे में यहां का विकास भी गति नहीं पकड़ पा रहा। और बड़े उद्योग क्षेत्र को उद्योग इकाइयों की दरकार है।
---वीएस परिहार, असिसटेंट कमिश्नर उद्योग क्षेत्र, एटा