{"_id":"610a89b88ebc3e88d01859bc","slug":"no-longer-a-national-highway-call-it-another-district-road-etah-news-agr502422560","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब नेशनल हाईवे नहीं, अन्य जिला मार्ग कहिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब नेशनल हाईवे नहीं, अन्य जिला मार्ग कहिए
विज्ञापन
शहर के अंदर जीटी रोड ।संवाद
- फोटो : ETAH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटा। जी हां, दशकों पुरानी एतिहासिक पहचान शहर से छिनने जा रही है। शहर के अंदर नेशनल हाईवे जीटी रोड का अब वजूद नहीं रहेगा। शहर के बाहर से निकाले गए बाईपास को ही नेशनल हाईवे माना जाएगा। जबकि शहर के अंदर के टुकड़ा नेशनल हाईवे नहीं, अन्य जिला मार्ग में तब्दील कर दिया जाएगा।
देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय राजमार्गों में से एक जीटी रोड शहर के अंदर से गुजरता है। जिससे एटा शहर का जुड़ाव विभिन्न शहरों, जिलों और प्रदेशों से हो जाता है। दूर-दूर तक लोग शहर की पहचान जीटी रोड से करते हैं, लेकिन सकरे मार्ग के चौड़ीकरण की योजना बनी तो शहर के व्यापारियों ने चिंता जताई। साथ ही यातायात की अधिकता के मद्देनजर बाईपास की भी मांग हो रही थी। ऐसे में एनएचएआई ने पिलुआ से मलावन तक सिक्स लेन बाईपास निकाल कर नेशनल हाईवे को डायवर्ट कर दिया। अंदर छोड़ी गई लगभग 12 किमी की सड़क नेशनल हाईवे के मानक से बाहर हो गई है।
कई बार बदले नाम
इस मार्ग का सुनहरी इतिहास रहा है। इसे मौर्यकालीन बताया जाता है। मुगल शासन काल में शेरशाह सूरी ने इसे पक्का कराया। शेरशाह सूरी मार्ग से जाना गया। अंग्रेजों ने इसका नाम ग्रांड ट्रंक (जीटी) रोड कर दिया। आजादी के बाद इसे नेशनल हाईवे-91 घोषित किया गया। जबकि कुछ समय पहले इसे नेशनल हाईवे-34 का नाम दिया गया है।
विज्ञापन
एनएचएआई से टूटेगा नाता, पीडब्ल्यूडी से जुड़ेगा
अभी तक पूरे जीटी रोड का संबंध एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉर्टी ऑफ इंडिया) से हुआ करता था। मरम्मत, निर्माण, देखभाल इसी की जिम्मेदारी थी। अब एनएचएआई शहर के अंदर मार्ग से नाता तोड़ इसे पीडब्ल्यूडी के अधीन करेगा। इसके लिए विभागीय तैयारी चल रही है।
विज्ञापन
देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय राजमार्गों में से एक जीटी रोड शहर के अंदर से गुजरता है। जिससे एटा शहर का जुड़ाव विभिन्न शहरों, जिलों और प्रदेशों से हो जाता है। दूर-दूर तक लोग शहर की पहचान जीटी रोड से करते हैं, लेकिन सकरे मार्ग के चौड़ीकरण की योजना बनी तो शहर के व्यापारियों ने चिंता जताई। साथ ही यातायात की अधिकता के मद्देनजर बाईपास की भी मांग हो रही थी। ऐसे में एनएचएआई ने पिलुआ से मलावन तक सिक्स लेन बाईपास निकाल कर नेशनल हाईवे को डायवर्ट कर दिया। अंदर छोड़ी गई लगभग 12 किमी की सड़क नेशनल हाईवे के मानक से बाहर हो गई है।
विज्ञापन
कई बार बदले नाम
इस मार्ग का सुनहरी इतिहास रहा है। इसे मौर्यकालीन बताया जाता है। मुगल शासन काल में शेरशाह सूरी ने इसे पक्का कराया। शेरशाह सूरी मार्ग से जाना गया। अंग्रेजों ने इसका नाम ग्रांड ट्रंक (जीटी) रोड कर दिया। आजादी के बाद इसे नेशनल हाईवे-91 घोषित किया गया। जबकि कुछ समय पहले इसे नेशनल हाईवे-34 का नाम दिया गया है।
विज्ञापन
एनएचएआई से टूटेगा नाता, पीडब्ल्यूडी से जुड़ेगा
अभी तक पूरे जीटी रोड का संबंध एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉर्टी ऑफ इंडिया) से हुआ करता था। मरम्मत, निर्माण, देखभाल इसी की जिम्मेदारी थी। अब एनएचएआई शहर के अंदर मार्ग से नाता तोड़ इसे पीडब्ल्यूडी के अधीन करेगा। इसके लिए विभागीय तैयारी चल रही है।