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अस्पतालों में थर्मल स्क्रीनिंग और न ही सैनिटाइजेशन
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एटा। कोरोना की तीसरी लहर की बढ़ती आहट के बीच स्वास्थ्य महकमा ही खतरे से बेपरवाह बना हुआ है। कोविड हेल्पडेस्क का संचालन नहीं करा रहा है। अस्पतालों में न थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है और न ही लोगों को सैनिटाइजर का प्रयोग कराया जा रहा है। जबकि सभी तरह के मरीजों के पहुंचने वाले इन स्थानों पर कोरोना संक्रमण का खतरा भी सबसे ज्यादा है। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और ओपीडी के मुख्य गेट, जिला महिला अस्पताल और एमसीएच विंग में हेल्पडेस्क नहीं है। ऐसा ही हाल सीएचसी और पीएचसी का भी बना हुआ है। कोरोना का नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के ज्यादा घातक होने की बातें तो स्वास्थ्य अधिकारी करते हैं, लेकिन अधूरी तैयारियों के साथ कोरोना से जंग लड़ी जा रही है।
मेडिकल कॉलेज में नहीं बनी हेल्पडेस्क
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पिछले साल कोरोना काल के दौरान हेल्पडेस्क बनाई गई थी, जो धीरे-धीरे बंद हो गई। अब यहां हेल्पडेस्क के नाम पर एक मेज रखी है, इसके अलावा कोई भी सुविधा आने वाले मरीजों के लिए नहीं है। थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजर की तक व्यवस्था नहीं है। लोग बेधड़क आते जाते हैं। दूसरी ओर ओपीडी में भी मुख्य गेट पर बनाई गई हेल्पडेस्क खत्म कर दी गई है।
एमसीएच विंग में बिना मास्क के आते हैं लोग
एमसीएच (मदर एंड चाइल्ड) विंग और महिला अस्पताल में बनाई गई हेल्पडेस्क भी काम नहीं कर रही है। एमसीएची विंग में सामान्य रोगियों की काफी भीड़ रोजाना पहुंचती है। वहीं महिला अस्पताल में गर्भवती और उनके परिजन बड़ी संख्या में आते हैं। हेल्पडेस्क सुविधाओं को हटा दिया गया है। यहां तक कि प्रवेश करने वाले मरीजों व तीमारदारों को मास्क लगाने के लिए टोकने वाला कोई नहीं है।
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मेडिकल कॉलेज में नहीं बनी हेल्पडेस्क
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पिछले साल कोरोना काल के दौरान हेल्पडेस्क बनाई गई थी, जो धीरे-धीरे बंद हो गई। अब यहां हेल्पडेस्क के नाम पर एक मेज रखी है, इसके अलावा कोई भी सुविधा आने वाले मरीजों के लिए नहीं है। थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजर की तक व्यवस्था नहीं है। लोग बेधड़क आते जाते हैं। दूसरी ओर ओपीडी में भी मुख्य गेट पर बनाई गई हेल्पडेस्क खत्म कर दी गई है।
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एमसीएच विंग में बिना मास्क के आते हैं लोग
एमसीएच (मदर एंड चाइल्ड) विंग और महिला अस्पताल में बनाई गई हेल्पडेस्क भी काम नहीं कर रही है। एमसीएची विंग में सामान्य रोगियों की काफी भीड़ रोजाना पहुंचती है। वहीं महिला अस्पताल में गर्भवती और उनके परिजन बड़ी संख्या में आते हैं। हेल्पडेस्क सुविधाओं को हटा दिया गया है। यहां तक कि प्रवेश करने वाले मरीजों व तीमारदारों को मास्क लगाने के लिए टोकने वाला कोई नहीं है।
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