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Etah News: पिता ने दिया साथ तो खेल में बना लिया करियर
Sat, 02 Mar 2024 11:39 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sat, 02 Mar 2024 11:39 PM IST
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एटा। संघर्ष, लगन और प्रेरणा से ही मुकाम हासिल किया जाता है। किसी भी क्षेत्र में जाना महिलाओं के लिए असंभव नहीं है, बस आत्मविश्वास मजबूत होना चाहिए। जिले की उप क्रीड़ाधिकारी पूजा भट्ट इसकी नजीर हैं। उन्होंने पिता की प्रेरणा पर खेल में करियर बनाया। अब बेटियों को खेल के लिए प्रेरित कर रही हैं।
पूजा भट्ट का जन्म 30 अगस्त 1990 को मुरादाबाद में हुआ। पिता आदेश कुमार भट्ट पुलिस विभाग में थे और खिलाड़ी भी थे। पिता की प्रेरणा मिली तो 10वीं के बाद ही फुटबॉल खेलने लगी। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। मंडलीय और राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर खेलने पहुंची। साथ ही बालिकाओं को खेल के प्रति प्रेरित करती रहीं।
वर्ष 2016 में फुटबॉल टीम के नेशनल स्तर पर कैप्टन बनीं। टीम सेमी फाइनल तक पहुंची। खेल कोटा से वर्ष 2012 में ही नौकरी मिल गई। पहली तैनात बिहार के हाजीपुर में मिली। नौकरी के दौरान रेलवे की फुटबॉल टीम की कोच बनीं, लेकिन खेलने का मौका कम मिलता था। इसकी वजह से मन नहीं लगा और नौकरी छोड़ दी।
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वर्ष 2018 में उप क्रीड़ाधिकारी के पद पर नौकरी लगी। पहली तैनाती एटा में ही, यहां अभी कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य लगन, संघर्ष और निष्ठा से किया जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। खेल कोटा से बेटियों को आगे बढ़ने के तमाम मौके हैं। बेटियों को खेल के प्रति प्रेरित करने का मौका मिला है उसे कर रही हूं।
बालिका फुटबाॅल प्रतियोगिता का नेशनल स्तर पर किया नेतृत्व
- सितंबर 2023 में सब जूनियर बालिका वर्ग फुटबॉल प्रतियोगिता हुई। उप जिला क्रीड़ाधिकारी के पद पर रहते हुए प्रदेश स्तरीय टीम का नेतृत्व किया। प्रदेश की राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिता में टीम सेमी फाइनल तक पहुंची जो बड़ी उपलब्धि है।
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पूजा भट्ट का जन्म 30 अगस्त 1990 को मुरादाबाद में हुआ। पिता आदेश कुमार भट्ट पुलिस विभाग में थे और खिलाड़ी भी थे। पिता की प्रेरणा मिली तो 10वीं के बाद ही फुटबॉल खेलने लगी। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। मंडलीय और राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर खेलने पहुंची। साथ ही बालिकाओं को खेल के प्रति प्रेरित करती रहीं।
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वर्ष 2016 में फुटबॉल टीम के नेशनल स्तर पर कैप्टन बनीं। टीम सेमी फाइनल तक पहुंची। खेल कोटा से वर्ष 2012 में ही नौकरी मिल गई। पहली तैनात बिहार के हाजीपुर में मिली। नौकरी के दौरान रेलवे की फुटबॉल टीम की कोच बनीं, लेकिन खेलने का मौका कम मिलता था। इसकी वजह से मन नहीं लगा और नौकरी छोड़ दी।
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वर्ष 2018 में उप क्रीड़ाधिकारी के पद पर नौकरी लगी। पहली तैनाती एटा में ही, यहां अभी कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य लगन, संघर्ष और निष्ठा से किया जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। खेल कोटा से बेटियों को आगे बढ़ने के तमाम मौके हैं। बेटियों को खेल के प्रति प्रेरित करने का मौका मिला है उसे कर रही हूं।
बालिका फुटबाॅल प्रतियोगिता का नेशनल स्तर पर किया नेतृत्व
- सितंबर 2023 में सब जूनियर बालिका वर्ग फुटबॉल प्रतियोगिता हुई। उप जिला क्रीड़ाधिकारी के पद पर रहते हुए प्रदेश स्तरीय टीम का नेतृत्व किया। प्रदेश की राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिता में टीम सेमी फाइनल तक पहुंची जो बड़ी उपलब्धि है।