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Etah News: जल्द बनेगी मदर केयर कंगारू यूनिट, प्राचार्य ने देखी जगह
Tue, 20 Feb 2024 06:43 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 20 Feb 2024 06:43 PM IST
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एटा। एमसीएच विंग का मंगलवार को कॉलेज की प्राचार्य ने निरीक्षण किया। उन्होंने कंगारू मदर केयर यूनिट बनाने के लिए जगह को देखा। इस दौरान बच्चा वार्ड सहित ओपीडी और पैथोलॉजी कक्ष में भी व्यवस्थाओं को परखा।
मेडिकल कॉलेज में एसएनसीयू वार्ड बनने के बाद से ही कंगारू मदर केयर यूनिट की बात कही जा रही है। जिससे प्रसूताएं नवजात को सीने से लगाकर दूध पिला सकें, लेकिन यह यूनिट बन नहीं पाई। इसी को लेकर मंगलवार को कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल ने निरीक्षण किया। बताया कि जन्म के दौरान यदि किसी नवजात का वजन ढाई किलो से कम होता है तो उसे तत्काल मदर केयर कंगारू यूनिट में भर्ती करने की जरूरत होती है। यहां विंग के तृतीय तल पर एसएनसीयू वार्ड संचालित है। उसमें नवजात को भर्ती किया जाता है, लेकिन प्रसूताएं बाहर रहती हैं। ऐसे में उन्हें स्तनपान कराने में भी दिक्कत होती है। कंगारू केयर यूनिट में प्रसूताएं नवजात को सीने से लगाकर स्तनपान भी करा सकेंगी। उन्होंने बताया इसके लिए कक्षों को देखा गया है। जल्द ही यूनिट बनाई जाएगी।
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ऐसे बच्चों को होती है जरूरत
कई नवजात ऐसे होते हैं, जो समय से पहले जन्म लेते हैं। यह नवजात नौ माह के बजाय 7 या 8 माह में पैदा होते हैं। समय से पहले जन्म शिशु के शारीरिक विकास को कम कर देता है। इस कारण नवजात औसत ढाई किलो से कम वजन के जन्म लेते हैं। इन बच्चों को कंगारू मदर केयर की जरूरत होती है। एक बार में कम से कम एक घंटा और एक दिन में 6 से 8 घंटे माताएं अपने बच्चे को कंगारू थैरेपी दे सकती हैं। कंगारू मदर केयर से मां में दूध बढ़ता है और साथ ही बच्चे में भी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
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मेडिकल कॉलेज में एसएनसीयू वार्ड बनने के बाद से ही कंगारू मदर केयर यूनिट की बात कही जा रही है। जिससे प्रसूताएं नवजात को सीने से लगाकर दूध पिला सकें, लेकिन यह यूनिट बन नहीं पाई। इसी को लेकर मंगलवार को कॉलेज की प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल ने निरीक्षण किया। बताया कि जन्म के दौरान यदि किसी नवजात का वजन ढाई किलो से कम होता है तो उसे तत्काल मदर केयर कंगारू यूनिट में भर्ती करने की जरूरत होती है। यहां विंग के तृतीय तल पर एसएनसीयू वार्ड संचालित है। उसमें नवजात को भर्ती किया जाता है, लेकिन प्रसूताएं बाहर रहती हैं। ऐसे में उन्हें स्तनपान कराने में भी दिक्कत होती है। कंगारू केयर यूनिट में प्रसूताएं नवजात को सीने से लगाकर स्तनपान भी करा सकेंगी। उन्होंने बताया इसके लिए कक्षों को देखा गया है। जल्द ही यूनिट बनाई जाएगी।
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ऐसे बच्चों को होती है जरूरत
कई नवजात ऐसे होते हैं, जो समय से पहले जन्म लेते हैं। यह नवजात नौ माह के बजाय 7 या 8 माह में पैदा होते हैं। समय से पहले जन्म शिशु के शारीरिक विकास को कम कर देता है। इस कारण नवजात औसत ढाई किलो से कम वजन के जन्म लेते हैं। इन बच्चों को कंगारू मदर केयर की जरूरत होती है। एक बार में कम से कम एक घंटा और एक दिन में 6 से 8 घंटे माताएं अपने बच्चे को कंगारू थैरेपी दे सकती हैं। कंगारू मदर केयर से मां में दूध बढ़ता है और साथ ही बच्चे में भी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
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