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मैं तो हो गई रे श्याम की दीवानी जोगन बन नाचूंगी
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Sat, 07 May 2016 11:08 PM IST
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भक्ति साहित्य सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सैलई महोत्सव में चल रहे भक्ति साहित्य सम्मेलन में शनिवार की देर रात्रि भजन संध्या का आयोजन किया गया। वृंदावन से आई बाल रसिक भजन गायिका श्रीजी भारद्वाज ने भजनों की स्वर लहरियों से समां बांध दिया।
कार्यक्रम में बाल भजन गायिका श्रीजी भारद्वाज ने अपने भजन अगर श्यामा जू न होती तो हम जैसो का क्या होता...। मैं तो हो गई रे श्याम की दीवानी जोगन बन नाचूंगी। देर रात्रि तक भक्तगण भजनों का आनंद लेते रहे। प्रशांत भारद्वाज और बाल भजन गायक श्रीजी भारद्वाज देर रात्रि तक भक्तों को भजनों की स्वर लहरियों पर झूमने को मजबूर किया।
भक्ति साहित्य सम्मेलन का शुभारंभ जिलाधिकारी के विजयेंद्र पाण्डियान, विशिष्ट अतिथि एसपी सुनील कुमार, न्यायमूर्ति पीएन पाराशर, धाम ट्रस्टी दिनेश पाराशर ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। जिलाधिकारी ने कहा कि भक्ति साहित्य सम्मेलन में हिस्सा लेकर उन्हें जो सुखद अनुभूति उन्हें हुई है, यह अनुभूति सदा उनके जीवन में ताजा रहेगी। अपर जिला जज प्रथम हिमांशु भटनागर ने कहा कि न्यायमूर्ति एन पाराशर ने अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद गांव के लिए जो सेवा का संकल्प लिया है, वह प्रत्येक मनुष्य के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने पंडाल में मौजूद लोगों से आव्हान करते हुए कहा कि हमारे बच्चों में संस्कारों की कमी होती जा रही है। देश, समाज को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि बच्चों के अंदर संस्कार हो। बच्चे अधिक से अधिक जानकारी अपनी संस्कृति के बारे में रखें और उसे अपनाकर आगे बढ़े तो वह जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफल होने से नहीं रोक सकते।
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जिलाधिकारी और अन्य न्यायिक अधिकारियों ने बाल भजन गायिका श्रीजी भारद्वाज का स्वागत किया। न्यायमूर्ति पीएन पाराशर ने सभी न्यायिक अधिकारियों को पटका व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान अपर जिला जज द्वितीय हरिविंदर सिंह, प्रधान न्यायाधीश परिवार कल्याण अविनाश सक्सेना, गोपाल माहेश्वरी, डा. श्रीकृष्ण शरद, डा. पुनीत पाठक शास्त्री, अजिताभ पाराशर, नरेंद्र पाराशर, रामकिशोर वार्ष्णेय, अजय तिवारी, नरेंद्र पाराशर, अनुराग पाराशर, नेत्रपाल सिंह, गौरव जाजू, पीयूष अग्रवाल, गौरव अग्रवाल, रामाधार अग्रवाल, डा. रामसेवक सोनी मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में बाल भजन गायिका श्रीजी भारद्वाज ने अपने भजन अगर श्यामा जू न होती तो हम जैसो का क्या होता...। मैं तो हो गई रे श्याम की दीवानी जोगन बन नाचूंगी। देर रात्रि तक भक्तगण भजनों का आनंद लेते रहे। प्रशांत भारद्वाज और बाल भजन गायक श्रीजी भारद्वाज देर रात्रि तक भक्तों को भजनों की स्वर लहरियों पर झूमने को मजबूर किया।
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भक्ति साहित्य सम्मेलन का शुभारंभ जिलाधिकारी के विजयेंद्र पाण्डियान, विशिष्ट अतिथि एसपी सुनील कुमार, न्यायमूर्ति पीएन पाराशर, धाम ट्रस्टी दिनेश पाराशर ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। जिलाधिकारी ने कहा कि भक्ति साहित्य सम्मेलन में हिस्सा लेकर उन्हें जो सुखद अनुभूति उन्हें हुई है, यह अनुभूति सदा उनके जीवन में ताजा रहेगी। अपर जिला जज प्रथम हिमांशु भटनागर ने कहा कि न्यायमूर्ति एन पाराशर ने अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद गांव के लिए जो सेवा का संकल्प लिया है, वह प्रत्येक मनुष्य के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने पंडाल में मौजूद लोगों से आव्हान करते हुए कहा कि हमारे बच्चों में संस्कारों की कमी होती जा रही है। देश, समाज को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि बच्चों के अंदर संस्कार हो। बच्चे अधिक से अधिक जानकारी अपनी संस्कृति के बारे में रखें और उसे अपनाकर आगे बढ़े तो वह जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफल होने से नहीं रोक सकते।
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जिलाधिकारी और अन्य न्यायिक अधिकारियों ने बाल भजन गायिका श्रीजी भारद्वाज का स्वागत किया। न्यायमूर्ति पीएन पाराशर ने सभी न्यायिक अधिकारियों को पटका व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान अपर जिला जज द्वितीय हरिविंदर सिंह, प्रधान न्यायाधीश परिवार कल्याण अविनाश सक्सेना, गोपाल माहेश्वरी, डा. श्रीकृष्ण शरद, डा. पुनीत पाठक शास्त्री, अजिताभ पाराशर, नरेंद्र पाराशर, रामकिशोर वार्ष्णेय, अजय तिवारी, नरेंद्र पाराशर, अनुराग पाराशर, नेत्रपाल सिंह, गौरव जाजू, पीयूष अग्रवाल, गौरव अग्रवाल, रामाधार अग्रवाल, डा. रामसेवक सोनी मौजूद रहे।