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Etah News: 20 साल पहले हुए सामूहिक हत्याकांड में 9 को उम्रकैद
Thu, 21 Nov 2024 11:11 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Thu, 21 Nov 2024 11:11 PM IST
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एटा। जैथरा थाना क्षेत्र में करीब 20 साल पहले वर्चस्व की जंग में सामूहिक हत्याकांड हुआ था। इसमें 4 लोगों को गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था। अदालत ने बृहस्पतिवार को फैसला सुनाते हुए 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है।
थाना क्षेत्र के गांव हरसिंगपुर में यह नरसंहार हुआ था। दो जातियों के बीच वर्चस्व को लेकर संघर्ष चल रहा था। गांव के किशनपाल ने थाने में 18 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 25 दिसंबर 2000 को 35 वर्षीय भाई बचान सिंह के साथ ही 53 वर्षीय ज्ञान सिंह, 24 वर्षीय सुखवीर उर्फ पप्पू और पास के गांव दौलतपुर निवासी 25 वर्षीय जगवीर उर्फ बाबा खेत में काम कर रहे थे। इसी समय दोपहर करीब 1 बजे गांव के कई लोग बंदूकें लेकर आ गए और पुरानी रंजिश के कारण ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोलियां लगने से भाई समेत चारों की मौत हो गई।
मामले में विवेचना करने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत कर दिया। 2021 से अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हो गई। करीब 23 साल तक सुनवाई की प्रक्रिया चलती रही। सभी गवाहों और सबूतों का परीक्षण तथा अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अपर सत्र न्यायालय कक्ष संख्या 1 ने मुकदमे में बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया। बृजनंदन, इसका पुत्र प्रदीप, नवीन, संजू, इसका भाई राजू, शैलेष, सतेंद्र नाथ, रामतीर्थ और मुन्नालाल को दोषी ठहराया। इन सभी को आजीवन कारावास और 30-30 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया है। अर्थदंड जमा न करने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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थाना क्षेत्र के गांव हरसिंगपुर में यह नरसंहार हुआ था। दो जातियों के बीच वर्चस्व को लेकर संघर्ष चल रहा था। गांव के किशनपाल ने थाने में 18 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 25 दिसंबर 2000 को 35 वर्षीय भाई बचान सिंह के साथ ही 53 वर्षीय ज्ञान सिंह, 24 वर्षीय सुखवीर उर्फ पप्पू और पास के गांव दौलतपुर निवासी 25 वर्षीय जगवीर उर्फ बाबा खेत में काम कर रहे थे। इसी समय दोपहर करीब 1 बजे गांव के कई लोग बंदूकें लेकर आ गए और पुरानी रंजिश के कारण ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोलियां लगने से भाई समेत चारों की मौत हो गई।
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मामले में विवेचना करने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत कर दिया। 2021 से अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हो गई। करीब 23 साल तक सुनवाई की प्रक्रिया चलती रही। सभी गवाहों और सबूतों का परीक्षण तथा अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अपर सत्र न्यायालय कक्ष संख्या 1 ने मुकदमे में बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया। बृजनंदन, इसका पुत्र प्रदीप, नवीन, संजू, इसका भाई राजू, शैलेष, सतेंद्र नाथ, रामतीर्थ और मुन्नालाल को दोषी ठहराया। इन सभी को आजीवन कारावास और 30-30 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया है। अर्थदंड जमा न करने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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