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छात्र कैसे हो सफल, जब लाइब्रेरी में रखी हों पुराने संस्करण की किताबें
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पुस्तकालय हाल मे अलमारी में रखी कितावे
- फोटो : ETAH
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एटा। 12वीं पास करने के बाद छात्र स्नातक की शिक्षा के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। निर्धन और मेधावी छात्रों के लिए मेहता पार्क में पालिका की ओर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकालय खोला गया था। अब यहां किताबें पुरानी होेने के साथ ही धूल फांक रहीं हैं। वहीं, कोचिंग भी बंद कर दी गई है। शिक्षक नहीं होने की वजह से छात्र यहां पढ़ने के लिए नहीं आते हैं।
पुस्तकालय प्रभारी देवेद्र बहादुर दीक्षित ने बताया कि साल 2014 में जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी ने पुस्तकालय में गरीब छात्रों को पढ़ने के लिए करीब तीन लाख रुपये की नई किताबें उपलब्ध कराई थीं। साथ ही कोचिंग के लिए दो शिक्षकों को भी नियुक्त किया था। शिक्षकों को वेतन जिलाधिकारी की स्वीकृति से नगर पालिका की तरफ से किया जाता था। इस दौरान लाइब्रेरी में आईएएस, पीसीएस, एसएससी, बैंक पीओ व क्लर्क, लेखपाल, यूडीसी आदि की तैयारी कराई जाती थी।
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हर साल 60 से ज्यादा बच्चों का होता था चयन
प्रभारी ने बताया कि पुस्तकालय में शिक्षकों द्वारा छात्रों को पढ़ाया जाता था। उस वक्त हर साल 60 से ज्यादा छात्रों का सरकारी नौकरी में चयन होता था। जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समय समय पर पुस्तकालय का औचक निरीक्षण करते थे और छात्रों से बातचीत भी करते थे।
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-----वर्जन----
पुस्तकालय में पहले शिक्षकों द्वारा पढ़ाई कराई जाती थी, लेकिन अब वहां शिक्षक तो दूर किताबें भी पुराने संस्करण की है, जिसे कोई पढ़ना नहीं चाहता है।
- कौशल कुमार, छात्र
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पुस्तकालय में पढ़ने के लिए नई किताबें भी नहीं मिल रही हैं। वहीं सामान्य अध्ययन के लिए अखबार तक नहीं उपलब्ध होता है।
- राजीव यादव, छात्र
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पुस्तकालय प्रभारी देवेद्र बहादुर दीक्षित ने बताया कि साल 2014 में जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी ने पुस्तकालय में गरीब छात्रों को पढ़ने के लिए करीब तीन लाख रुपये की नई किताबें उपलब्ध कराई थीं। साथ ही कोचिंग के लिए दो शिक्षकों को भी नियुक्त किया था। शिक्षकों को वेतन जिलाधिकारी की स्वीकृति से नगर पालिका की तरफ से किया जाता था। इस दौरान लाइब्रेरी में आईएएस, पीसीएस, एसएससी, बैंक पीओ व क्लर्क, लेखपाल, यूडीसी आदि की तैयारी कराई जाती थी।
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हर साल 60 से ज्यादा बच्चों का होता था चयन
प्रभारी ने बताया कि पुस्तकालय में शिक्षकों द्वारा छात्रों को पढ़ाया जाता था। उस वक्त हर साल 60 से ज्यादा छात्रों का सरकारी नौकरी में चयन होता था। जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समय समय पर पुस्तकालय का औचक निरीक्षण करते थे और छात्रों से बातचीत भी करते थे।
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पुस्तकालय में पहले शिक्षकों द्वारा पढ़ाई कराई जाती थी, लेकिन अब वहां शिक्षक तो दूर किताबें भी पुराने संस्करण की है, जिसे कोई पढ़ना नहीं चाहता है।
- कौशल कुमार, छात्र
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पुस्तकालय में पढ़ने के लिए नई किताबें भी नहीं मिल रही हैं। वहीं सामान्य अध्ययन के लिए अखबार तक नहीं उपलब्ध होता है।
- राजीव यादव, छात्र