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कोहरे से निपटने को रोडवेज बसों में इंतजाम सिफर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Dec 2016 10:37 PM IST
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कोहरे का कहर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कोहरे का कहर शुरू हो गया है। पर, इससे निपटने के लिए परिवहन निगम फिसड्डी बना है। तभी तो किसी बस के शीशे टूटे हैं, तो किसी के दरवाजों की हालत खस्ता है। फॉग लाइट भी नहीं लगाई गई है। इससे सर्दी के मौसम में निगम की बसों में सफर के दौरान सवारियों को ठिठुरना पड़ रहा है।
यूपी परिवहन निगम तकनीकी रूप से भले ही खुद को मजबूत करने में जुटा है। ऑनलाइन बुकिंग, व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम, स्मार्ट कार्ड योजना के जरिए यात्रियों को सुविधाजनक सफर मुहैया कराने की पहल की जा रही है। डिपो में भी यात्री सुविधाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है, लेकिन निगम बसों हालत सुधारने को तैयार नहीं है। तमाम बसें मानक की धज्जियां उड़ाते हुए सड़कों पर दौड़ती नजर आती हैं। अधिकांश बसों में न यात्री सुरक्षा पर ध्यान दिया जाता है और न ही सुविधा पर। एटा डिपो से 144 बसों का संचालन होता है। इनमें से अधिकतर बसें खटारा की श्रेणी में हैं। आलम यह है कि रोडवेज बसें रास्ते में कहीं भी बंद हो जाती हैं। कई बसों में शीशे, लाइटें और गेट खराब हैं। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक दीपेंद्र सिंह ने कहा बसों के शीशे, खिड़कियां, दरवाजे ठीक कराए जा रहे हैं। सर्दियों में विशेष ध्यान रहेगा। बिना शीशे और खराब दरवाजे की बसें नहीं चलाई जाएंगी।
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फर्स्ट एड बॉक्स भी खाली
प्राथमिक उपचार के लिए बसों में लगे फर्स्ट एड बॉक्स भी खाली हैं। ऐसे में लोगों को दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। हादसे के दौरान लोगों को उपचार के लिए भटकना पड़ता है।
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हर साल होते हैं हादसे
जिले में कोहरे की वजह से हर साल हादसे होते रहे हैं, जिसमें बसों की तकनीकी खामियां ही सामने आती रही हैं। फिलवक्त कोहरे से बचाव के लिए बसों में फॉग लाइट, शीशों और दरवाजों की दशा भी इसके बाद भी विभागीय अफसर बेफिक्र बने हैं।
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यूपी परिवहन निगम तकनीकी रूप से भले ही खुद को मजबूत करने में जुटा है। ऑनलाइन बुकिंग, व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम, स्मार्ट कार्ड योजना के जरिए यात्रियों को सुविधाजनक सफर मुहैया कराने की पहल की जा रही है। डिपो में भी यात्री सुविधाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है, लेकिन निगम बसों हालत सुधारने को तैयार नहीं है। तमाम बसें मानक की धज्जियां उड़ाते हुए सड़कों पर दौड़ती नजर आती हैं। अधिकांश बसों में न यात्री सुरक्षा पर ध्यान दिया जाता है और न ही सुविधा पर। एटा डिपो से 144 बसों का संचालन होता है। इनमें से अधिकतर बसें खटारा की श्रेणी में हैं। आलम यह है कि रोडवेज बसें रास्ते में कहीं भी बंद हो जाती हैं। कई बसों में शीशे, लाइटें और गेट खराब हैं। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक दीपेंद्र सिंह ने कहा बसों के शीशे, खिड़कियां, दरवाजे ठीक कराए जा रहे हैं। सर्दियों में विशेष ध्यान रहेगा। बिना शीशे और खराब दरवाजे की बसें नहीं चलाई जाएंगी।
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फर्स्ट एड बॉक्स भी खाली
प्राथमिक उपचार के लिए बसों में लगे फर्स्ट एड बॉक्स भी खाली हैं। ऐसे में लोगों को दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। हादसे के दौरान लोगों को उपचार के लिए भटकना पड़ता है।
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हर साल होते हैं हादसे
जिले में कोहरे की वजह से हर साल हादसे होते रहे हैं, जिसमें बसों की तकनीकी खामियां ही सामने आती रही हैं। फिलवक्त कोहरे से बचाव के लिए बसों में फॉग लाइट, शीशों और दरवाजों की दशा भी इसके बाद भी विभागीय अफसर बेफिक्र बने हैं।