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फिर पूरे शहर मेें दिखा पानी ही पानी

Thu, 09 Jul 2015 11:01 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, एटा
ब्यूरो, अमर उजाला, एटा Updated Thu, 09 Jul 2015 11:01 PM IST
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heavy raining, whole city blocked with water
सुबह से सूर्यदेव की तपिश से परेशान लोगों को दोपहर बाद इंद्रदेव ने राहत दिलाई। काली घटाएं छाने के साथ एक घंटे से ज्यादा समय तक हुई झमाझम बारिश से फिर से जलभराव की समस्या हो गई। जगह-जगह गलियों, सड़कों और सरकारी कार्यालयों में पानी भरने से लोगों को परेशानी हुई, वहीं घरों के अंदर तक पानी घुस गया। तापमान गिरने से लोगों ने भी गर्मी से राहत महसूस की। स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चे भी भीगते हुए घर पहुंचे।
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दो दिन पहले हुई तेज बारिश से अभी शहर के कुछ निचले इलाकों से पानी निकल नहीं पाया था, कि गुरुवार को फिर हुई झमाझम बारिश से स्थिति और खराब हो गई। नगरपालिका के जल निकासी के दावे भी खोखले साबित हुए। सुबह से ही उमस भरी गर्मी से लोग परेशान थे, लेकिन दोपहर साढ़े 12 बजे एकाएक मौसम बदल गया और आसमान में काली घटाएं छाने के साथ बिजली भी कड़कने लगी। एक घंटे से ज्यादा समय तक हुई झमाझम बारिश से पूरे शहर में पानी भर गया। तेज बारिश के चलते जीटी रोड पर वाहनों की रफ्तार भी धीमी पड़ गई। बाजारों में खरीदारी कर रहे लोग भी बरसात से बचने के लिए इधर-उधर भागने लगे। फड़ पर दुकान सजाए बैठे दुकानदार भी सामान समेटते नजर आए।  
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बरसात से फिर से जिला अस्पताल परिसर, नगरपालिका परिसर, कोतवाली सिटी, रेलवे रोड, प्रेम नगर चौराहा, कैलाशगंज, ठंडी सड़क, कचहरी रोड, पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस, आगरा रोड आदि स्थानों पर पानी भरने से लोगों को खासी दिक्कत हुई, वहीं विजयनगर, रामदरबार मंदिर परिसर में बने घरों के अंदर तक पानी घुस गया।  
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नाले से निकली सिल्ट फिर पहुंची नाले में
पालिका द्वारा शहर में नालों की कराई जा रही सफाई के दौरान सफाईकर्मी सिल्ट को उठाने के बजाय सड़क पर ही डाल रहे हैं। बरसात के चलते यह सिल्ट फिर से नालों में ही दिखाई दी, वहीं सड़क पर फेल जाने से लोगों को निकलने में खासी दिक्कत हो रही है। पीपल अड्डा और अन्य स्थानों पर कुछ इस तरह की स्थिति देखने को मिली।

 
धान का आच्छादन क्षेत्र बढ़ने का अनुमान
बरसात के साथ जिले में खरीफ की अच्छी पैदावार बढ़ने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। किसानों के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञ भी अब धान का आच्छादन क्षेत्र बढ़ने का अनुमान लगा रहे हैं। मानसून यदि ऐसे ही मेहरबान रहा तो जिले में धान की पैदावार 18 हजार हेक्टेयर से अधिक होगी।
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