UP: बजट से किसान निराश, बोले- कृषि क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं, सरकार ने किसानों के साथ किया धोखा
एटा के किसान बजट से निराश नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं किया गया है। सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बृहस्पतिवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट पेश किया। इस बजट में किसानों के लिए संपदा योजना सहित कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं की बात कही गई है। आत्मनिर्भर तिलहन अभियान से किसानों को मजबूती प्रदान करने का काम किया जाएगा, लेकिन स्थानीय स्तर पर किसानों को बजट रास नहीं आया। उनका कहना था कि किसान को कुछ नहीं मिला।
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से 38 लाख किसानों को फायदा मिला है और 10 लाख रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं। कृषि क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करेंगे। आत्मनिर्भर तेल बीज अभियान को मजबूत किया जाएगा।
इसके तहत कृषि की नई प्रौद्योगिकी और कृषि बीमा को बढ़ावा दिया जाएगा। डेयरी से जुड़े किसानों के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। मत्स्य संपदा को मजबूत किया जा रहा है। रोजगार के 55 लाख नए अवसरों को उत्पन्न करने की बात कही गई है।
जबकि किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि उनकी मांग सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और इसको बढ़ाए जाने की थी। इसके अलावा किसान आयोग के गठन, किसानों को मुफ्त बिजली, ऋण माफी आदि को मांग कर रहे थे। बजट में हम लोगों की कोई भी मांग नहीं मानी गई है। इससे मायूसी है।
किसानों के साथ किया धोखा
किसान हित की बात करने वाली सरकार ने बजट में कुछ नहीं दिया है। किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है, न तो एमएसपी की गारंटी लिखित में दी गई है और न ही कोई अन्य लाभ किसानों को दिया जा रहा है। -ओमप्रकाश, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत)
बजट किसानों के हित को ध्यान में रखकर नहीं दिया गया है। एमएसपी या कर्जमाफी की कोई बात नहीं की गई है। इससे बजट अधूरा है। सरकार चंद लोगों के लिए काम कर रही है और किसानों की उपेक्षा की जा रही है। -पवन ठाकुर, भारतीय किसान यूनियन (किसान)
जिले के किसानों को बजट से काफी उम्मीदें थी। मगर कोई फायदा नहीं हुआ। न कर्ज माफी की बात हुई और न ही बिना ब्याज के ऋण मिलने की बात कही गई है। इसको देखकर किसानों को मायूसी ही हाथ लगी है। पुरानी योजनाएं ही संचालित दिखाई गई हैं। -प्रेम किशोर, नगला सेमरा
इस बार के बजट में पिछली योजनाओं का ही गुणगान किया गया है। जब तक काम धरातल पर नहीं उतरे तो घोषणा से कोई लाभ नहीं होता है। सरकार को चुनावी लॉलीपॉप की जगह किसानों के लिए धरातल पर काम करना चाहिए। इससे कुछ फायदा हो सके। -सुनील कुमार, नगला डूडा