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Etah News: मक्का के बेहतर दाम नहीं मिलने से किसान मायूस
Thu, 25 Jun 2026 01:19 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Thu, 25 Jun 2026 01:19 AM IST
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राजेश द्विवेदी
जैैथरा। मक्का की फसल से किसानों को बहुत उम्मीद थी। उपज तैयार होने पर मंडी में बिक्री को जाने पर उचित दाम न मिलने पर किसान तनाव में है। मंडी में 1800 से 1950 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलने पर किसानों को उपज की लागत भी नहीं मिल पा रही है।
किसानों की मानें तो मक्का की फसल तैयार करने में लागत बहुत आती है। महंगा बीज खरीद कर डीएपी लगाने और बार-बार निराई करानी होती है। आठ से दस बार सिंचाई करानी होती है, साथ ही नीलगाय सहित अन्य जानवरों से रखाने को रातभर खेत पर रहना होता है। एक एकड़ खेत में मक्का की 35-40 क्विंटल भुट्टा तैयार हुआ है। मंडी पहुंचने पर मक्का सूखी होने पर भी व्यापारी उपज में नमी होने की बात कहकर उचित भाव न देकर किसानों का शोषण कर रहे हैं। जिससे किसान मानसिक रूप से परेशान हैं। रुपयों की आवश्यकता होने पर किसान व्यापारियों के हिसाब से फसल की बिक्री करने को मजबूर हैं।
कर्ज लेकर मक्का की फसल तैयार की थी, लागत के अनुरुप उपज का मंडी में भाव न मिलने पर पूरा परिवार तनाव में है। सबसे बड़ी समस्या कर्ज चुकाने के साथ ही अगली फसल की तैयारी करने की है। - विजय कुमार, जैथरा
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बेमौसम की मक्का की फसल करना घाटे का सौदा रहा। मंडी में उचित भाव न मिलने पर समय के साथ ही मेहनत भी बेकार गई। खेती में अधिक लागत रहना और उपज के समय भाव में गिरावट किसान को पनपने नहीं दे रही। - राजेश द्विवेदी, जैथरा
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किसानों की मानें तो मक्का की फसल तैयार करने में लागत बहुत आती है। महंगा बीज खरीद कर डीएपी लगाने और बार-बार निराई करानी होती है। आठ से दस बार सिंचाई करानी होती है, साथ ही नीलगाय सहित अन्य जानवरों से रखाने को रातभर खेत पर रहना होता है। एक एकड़ खेत में मक्का की 35-40 क्विंटल भुट्टा तैयार हुआ है। मंडी पहुंचने पर मक्का सूखी होने पर भी व्यापारी उपज में नमी होने की बात कहकर उचित भाव न देकर किसानों का शोषण कर रहे हैं। जिससे किसान मानसिक रूप से परेशान हैं। रुपयों की आवश्यकता होने पर किसान व्यापारियों के हिसाब से फसल की बिक्री करने को मजबूर हैं।
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कर्ज लेकर मक्का की फसल तैयार की थी, लागत के अनुरुप उपज का मंडी में भाव न मिलने पर पूरा परिवार तनाव में है। सबसे बड़ी समस्या कर्ज चुकाने के साथ ही अगली फसल की तैयारी करने की है। - विजय कुमार, जैथरा
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बेमौसम की मक्का की फसल करना घाटे का सौदा रहा। मंडी में उचित भाव न मिलने पर समय के साथ ही मेहनत भी बेकार गई। खेती में अधिक लागत रहना और उपज के समय भाव में गिरावट किसान को पनपने नहीं दे रही। - राजेश द्विवेदी, जैथरा

राजेश द्विवेदी