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शस्त्र फैक्टरी में फर्जी नामजदगी, तत्कालीन थाना प्रभारी पर रिपोर्ट
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एटा। अलीगंज थाना पुलिस ने 2016 में शस्त्र फैक्टरी में फर्जी नामजदगी पर तत्कालीन थाना प्रभारी पर रिपोर्ट दर्ज हुई है। उस समय पुलिस ने सात लोगों को अभियुक्त बनाया। दिव्यांग को भी आरोपी बना दिया। उसकी कोरोना काल में मृत्यु हो गई। शिकायत के बाद जांच में एक अन्य व्यक्ति पर आरोप फर्जी पाए गए। इस व्यक्ति ने अदालत में प्रार्थनापत्र दिया। अदालत के आदेश पर तत्कालीन थाना प्रभारी के विरुद्ध यह कार्रवाई की गई है।
वर्ष 2016 में पुलिस ने थाने में सात लोगों पर शस्त्र फैक्टरी चलाने की रिपोर्ट दर्ज की। इनमें पैरों से दिव्यांग व्यक्ति को तो फरार दिखा दिया। इस पर आपत्ति जताई गई, हालांकि उसकी मृत्यु हो गई। शेष छह में से एक आरोपी अवधेश कुमार उर्फ मंतोष के भाई परितोष ने डीजीपी से शिकायत की। इस पर जांच कराई गई। सीओ सकीट देव रामनिवास सिंह ने जांच कर रिपोर्ट सौंपी। इसमें अवधेश के खिलाफ मामला झूठा पाया गया।
घटनास्थल पर अवधेश उस समय मौजूद ही नहीं था। इस रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन थाना प्रभारी सतीश कुमार यादव के विरुद्ध विभागीय अभिलेखों में प्रतिकूल प्रविष्टि तो दर्ज कर ली गई। लेकिन अन्य कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। इसे लेकर मंतोष ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इसे अदालत ने स्वीकार करते हुए अलीगंज थानाध्यक्ष को रिपोर्ट दर्ज करने के लिए आदेशित किया। इस पर बुधवार शाम पुलिस ने सतीश कुमार यादव व अज्ञात के विरुद्ध अलग-अलग छह धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। सीओ अलीगंज विक्रांत द्विवेदी ने बताया कि मामला करीब छह साल पुराना है। अदालत का आदेश प्राप्त हुआ था। इसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू करा दी गई है।
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वर्तमान में हैं सीओ, पदोन्नति पर भी चल रही जांच
तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक वर्तमान में सीओ के रूप में डीजीपी कार्यालय से संबद्ध हैं। जांच में उन्हें दोषी ठहराए जाने के बीच में पदोन्नति मिली थी। जिस पर पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई। इस मामले की भी जांच शासन स्तर पर चल रही है।
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वर्ष 2016 में पुलिस ने थाने में सात लोगों पर शस्त्र फैक्टरी चलाने की रिपोर्ट दर्ज की। इनमें पैरों से दिव्यांग व्यक्ति को तो फरार दिखा दिया। इस पर आपत्ति जताई गई, हालांकि उसकी मृत्यु हो गई। शेष छह में से एक आरोपी अवधेश कुमार उर्फ मंतोष के भाई परितोष ने डीजीपी से शिकायत की। इस पर जांच कराई गई। सीओ सकीट देव रामनिवास सिंह ने जांच कर रिपोर्ट सौंपी। इसमें अवधेश के खिलाफ मामला झूठा पाया गया।
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घटनास्थल पर अवधेश उस समय मौजूद ही नहीं था। इस रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन थाना प्रभारी सतीश कुमार यादव के विरुद्ध विभागीय अभिलेखों में प्रतिकूल प्रविष्टि तो दर्ज कर ली गई। लेकिन अन्य कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। इसे लेकर मंतोष ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इसे अदालत ने स्वीकार करते हुए अलीगंज थानाध्यक्ष को रिपोर्ट दर्ज करने के लिए आदेशित किया। इस पर बुधवार शाम पुलिस ने सतीश कुमार यादव व अज्ञात के विरुद्ध अलग-अलग छह धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। सीओ अलीगंज विक्रांत द्विवेदी ने बताया कि मामला करीब छह साल पुराना है। अदालत का आदेश प्राप्त हुआ था। इसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू करा दी गई है।
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वर्तमान में हैं सीओ, पदोन्नति पर भी चल रही जांच
तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक वर्तमान में सीओ के रूप में डीजीपी कार्यालय से संबद्ध हैं। जांच में उन्हें दोषी ठहराए जाने के बीच में पदोन्नति मिली थी। जिस पर पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई। इस मामले की भी जांच शासन स्तर पर चल रही है।