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निर्यात की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा एटा
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एटा। निर्यात की राह पर एटा तेजी से आगे बढ़ रहा है। खासतौर से छह इकाइयों ने इसमें धमक दिखाई है। इनका वार्षिक निर्यात 133 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया है। खास बात यह है कि 20 फीसद से अधिक की वार्षिक बढ़ोतरी हो रही है। औद्योगिक क्षेत्र के मामले में जिला लंबे समय से पिछड़ा हुआ है। नई बड़ी इकाइयों की स्थापना हो नहीं पा रही। जबकि पुरानी तमाम इकाइयों में भी उत्पादन घटा ही है।
जिले में औद्योगिक माहौल अनुकूल न होने की बात कही जाती है, लेकिन छह औद्योगिक इकाइयों ने ये मिथक तोड़ कामयाबी की बुलंदियां हासिल की हैं। निर्यातक के रूप में यही छह इकाई जिले में पंजीकृत हैं। इनमें चार इकाई फूड प्रोसेसिंग सेक्टर तथा दो मेटल क्राफ्ट सेक्टर की हैं। इन सभी का वार्षिक निर्यात 133.79 करोड़ रुपये है। फूड प्रोसेसिंग की चारों इकाइयों की औसत वार्षिक निर्यात वृद्धि दर 21.53 और मेटल क्राफ्ट इकाइयों की 27.23 प्रतिशत है।
रेल यातायात का मिले साथ तो बढ़े बात
औद्योगिक उत्पादन में सबसे बड़ी बाधा रेलवे यातायात व परिवहन की कमी है। जिसके चलते कच्चा माल प्राप्त करना और तैयार माल को बाहर भेजने की समस्या आती है। यह लगभग पूरा काम अभी सड़क परिवहन पर ही निर्भर है। जो रेलवे परिवहन की तुलना में काफी महंगा पड़ता है।
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जिले में औद्योगिक माहौल अनुकूल न होने की बात कही जाती है, लेकिन छह औद्योगिक इकाइयों ने ये मिथक तोड़ कामयाबी की बुलंदियां हासिल की हैं। निर्यातक के रूप में यही छह इकाई जिले में पंजीकृत हैं। इनमें चार इकाई फूड प्रोसेसिंग सेक्टर तथा दो मेटल क्राफ्ट सेक्टर की हैं। इन सभी का वार्षिक निर्यात 133.79 करोड़ रुपये है। फूड प्रोसेसिंग की चारों इकाइयों की औसत वार्षिक निर्यात वृद्धि दर 21.53 और मेटल क्राफ्ट इकाइयों की 27.23 प्रतिशत है।
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रेल यातायात का मिले साथ तो बढ़े बात
औद्योगिक उत्पादन में सबसे बड़ी बाधा रेलवे यातायात व परिवहन की कमी है। जिसके चलते कच्चा माल प्राप्त करना और तैयार माल को बाहर भेजने की समस्या आती है। यह लगभग पूरा काम अभी सड़क परिवहन पर ही निर्भर है। जो रेलवे परिवहन की तुलना में काफी महंगा पड़ता है।
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