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कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में एक और फर्जीवाड़े की आशंका, पांच शिक्षिकाओं के प्रमाणपत्र संदिग्ध
Sat, 27 Jun 2020 11:10 AM IST
आगरा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jun 2020 11:10 AM IST
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कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय कासगंज
- फोटो : अमर उजाला
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की शिक्षिका की टीईटी डिग्री ऑनलाइन रिकॉर्ड में न होने एवं चार शिक्षिकाओं के हाईस्कूल-इंटर प्रमाणपत्र संदिग्ध लगने पर इनका मानदेय रोक दिया गया है। साथ ही नोटिस जारी कर दी गई है।
जिले के केजीबीवी के स्टाफ के प्रमाणपत्रों की जांच में फर्जीवाड़े की पोल खुल रही है। जांच समिति द्वारा की जा रही प्रमाणपत्र-डिग्रियों, निवास, आधार एवं पैन नंबर आदि की जांच में जहां एक शिक्षिका का शिक्षक पात्रता प्रमाणपत्र विभागीय साइट पर नहीं दिख रहा। तो वहीं चार अन्य शिक्षिकाओं के हाईस्कूल व इंटर प्रमाणपत्र अंकपत्र संदिग्ध लगने पर बीएसए ने इनका मानदेय रोकते हुए नोटिस जारी किया है।
साथ ही संबंधित संस्थाओं एवं बोर्ड से इनके प्रमाणपत्रों के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। संदेह के दायरे में आई शिक्षिकाओं में दो जलेसर, एक-एक अलीगंज, मारहरा एवं शीतलपुर केजीबीवी की हैं। बताते चलें कि जिले में संचालित 8 विद्यालयों के 112 पदों के विरुद्ध 106 लोग तैनात हैं। जिनके प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है।
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केजीबीवी स्टाफ के प्रमाणपत्रों के सत्यापन में एक शिक्षिका का टीईटी रिजल्ट विभागीय साइट पर नहीं है। जबकि चार अन्य शिक्षिकाओं के हाईस्कूल-इंटर के अंकपत्र संदिग्ध लगे हैं। इन सभी का मानदेय रोकते हुए बोर्ड विद्यालय से सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। - संजय सिंह, बीएसए।
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जिले के केजीबीवी के स्टाफ के प्रमाणपत्रों की जांच में फर्जीवाड़े की पोल खुल रही है। जांच समिति द्वारा की जा रही प्रमाणपत्र-डिग्रियों, निवास, आधार एवं पैन नंबर आदि की जांच में जहां एक शिक्षिका का शिक्षक पात्रता प्रमाणपत्र विभागीय साइट पर नहीं दिख रहा। तो वहीं चार अन्य शिक्षिकाओं के हाईस्कूल व इंटर प्रमाणपत्र अंकपत्र संदिग्ध लगने पर बीएसए ने इनका मानदेय रोकते हुए नोटिस जारी किया है।
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साथ ही संबंधित संस्थाओं एवं बोर्ड से इनके प्रमाणपत्रों के सत्यापन के निर्देश दिए हैं। संदेह के दायरे में आई शिक्षिकाओं में दो जलेसर, एक-एक अलीगंज, मारहरा एवं शीतलपुर केजीबीवी की हैं। बताते चलें कि जिले में संचालित 8 विद्यालयों के 112 पदों के विरुद्ध 106 लोग तैनात हैं। जिनके प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है।
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केजीबीवी स्टाफ के प्रमाणपत्रों के सत्यापन में एक शिक्षिका का टीईटी रिजल्ट विभागीय साइट पर नहीं है। जबकि चार अन्य शिक्षिकाओं के हाईस्कूल-इंटर के अंकपत्र संदिग्ध लगे हैं। इन सभी का मानदेय रोकते हुए बोर्ड विद्यालय से सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं। - संजय सिंह, बीएसए।
केजीबीवी फर्जीवाड़ा
केजीबीवी में फर्जीवाड़े की जांच की शुरू हुई प्रक्रिया लंबी उलझती नजर आ रही है। उतर प्रदेश के अलग अलग विश्व विद्यालयों के अलावा कर्नाटक और राजस्थान के भी अलग अलग विश्व विद्यालयों के डिग्रीधारक केजीबीवी में नौकरी कर रहे हैं। अब संबंधित विश्व विद्यालयों को मैनुअल सत्यापन के लिए दस्तावेज भेजे गए हैं।
ऐसे में विभाग का मानना है कि सत्यापन में वक्त तो लग ही सकता है। बेसिक शिक्षा विभाग के कस्तूरबा विद्यालयों में फर्जीवाड़े की जांच तेजी के साथ चल रही है। सभी कर्मचारियों के मूल दस्तावेज सत्यापित कराए जा रहे हैं। वैसे तो विभाग ने हाईस्कूल और इंटर मीडिएट के दस्तावेज का सत्यापन कराने के बाद तैनात, शिक्षकाओं और वार्डन का मानदेय लगा दिया, लेकिन जैसे ही अनामिका प्रकरण खुलकर आया तो अब सभी की डिग्रियों का सत्यापन हो रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परखे जा रहे शैक्षिक दस्तावेजों में पाया गया है कि आगरा, रूहेलखंड, गोंडा विश्व विद्यालय ही नहीं बल्कि उतर प्रदेश के बाहर कर्नाटक और राजस्थान राज्य के अलग अलग विश्वविद्यालयों के डिग्रीधारक भी जिले के कस्तूरबा विद्यालयों में नौकरी कर रहे हैं। सभी की डिग्रिया संबंधित विश्व विद्यालयों में सत्यापन के लिए भेजी गई हैं। चूंकि दूसरे राज्यों के विद्यालयों से सत्यापन होना है ऐसे में वक्त लगना स्वाभाविक है और फिर जांच की प्रक्रिया यूं ही आगे बढ़ जाएगी।
केजीबीवी में फर्जीवाड़े की जांच की शुरू हुई प्रक्रिया लंबी उलझती नजर आ रही है। उतर प्रदेश के अलग अलग विश्व विद्यालयों के अलावा कर्नाटक और राजस्थान के भी अलग अलग विश्व विद्यालयों के डिग्रीधारक केजीबीवी में नौकरी कर रहे हैं। अब संबंधित विश्व विद्यालयों को मैनुअल सत्यापन के लिए दस्तावेज भेजे गए हैं।
ऐसे में विभाग का मानना है कि सत्यापन में वक्त तो लग ही सकता है। बेसिक शिक्षा विभाग के कस्तूरबा विद्यालयों में फर्जीवाड़े की जांच तेजी के साथ चल रही है। सभी कर्मचारियों के मूल दस्तावेज सत्यापित कराए जा रहे हैं। वैसे तो विभाग ने हाईस्कूल और इंटर मीडिएट के दस्तावेज का सत्यापन कराने के बाद तैनात, शिक्षकाओं और वार्डन का मानदेय लगा दिया, लेकिन जैसे ही अनामिका प्रकरण खुलकर आया तो अब सभी की डिग्रियों का सत्यापन हो रहा है।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परखे जा रहे शैक्षिक दस्तावेजों में पाया गया है कि आगरा, रूहेलखंड, गोंडा विश्व विद्यालय ही नहीं बल्कि उतर प्रदेश के बाहर कर्नाटक और राजस्थान राज्य के अलग अलग विश्वविद्यालयों के डिग्रीधारक भी जिले के कस्तूरबा विद्यालयों में नौकरी कर रहे हैं। सभी की डिग्रिया संबंधित विश्व विद्यालयों में सत्यापन के लिए भेजी गई हैं। चूंकि दूसरे राज्यों के विद्यालयों से सत्यापन होना है ऐसे में वक्त लगना स्वाभाविक है और फिर जांच की प्रक्रिया यूं ही आगे बढ़ जाएगी।
यूपी बोर्ड को भी भेजे मैनुअल दस्तावेज शिक्षा विभाग ने वैसे तो जिले में तैनात केजीबीवी के सभी कर्मचारियों के हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच कर ली, लेकिन फर्जीवाड़ा खुलने के बाद हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के भी दस्तावेजों की मैनुअल जांच यूपी बोर्ड से कराई जा रही है।
आंकड़े
8 कस्तूरबा विद्यालय हैं जिले में।
114 कर्मचारी थे विद्यालयों में।
4 फर्जी मिलने के बाद बचे हैं अब 110 कर्मचारी।
राजस्थान, कर्नाटक के डिग्रीधारक भी जिले में मिले हैं। सभी की डिग्री सत्यापन के लिए संबंधित विश्व विद्यालय को भेजी गई है, जबकि हाईस्कूल के दस्तावेज सत्यापन के लिए यूपी बोर्ड भेजे हैं- महेश कुमार, डीसी, बालिका शिक्षा।
आंकड़े
8 कस्तूरबा विद्यालय हैं जिले में।
114 कर्मचारी थे विद्यालयों में।
4 फर्जी मिलने के बाद बचे हैं अब 110 कर्मचारी।
राजस्थान, कर्नाटक के डिग्रीधारक भी जिले में मिले हैं। सभी की डिग्री सत्यापन के लिए संबंधित विश्व विद्यालय को भेजी गई है, जबकि हाईस्कूल के दस्तावेज सत्यापन के लिए यूपी बोर्ड भेजे हैं- महेश कुमार, डीसी, बालिका शिक्षा।