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शिक्षित युवा और अभिभावक बनाए जाएंगे शिशु मित्र
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एटा। बेसिक शिक्षा परिषद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और निपुण भारत के तहत नई पहल की है पूर्व प्राथमिक शिक्षा को मूलभूत साक्षरता के रूप में चिह्नित किया गया है। इसको लेकर कक्षा एक के बच्चों के लिए 12 सप्ताह का गतिविधि कलेंडर जारी किया गया है। इसके माध्यम से शिक्षित युवाओं और अभिभावकों को शिशु मित्र बनाया जाएगा।
बीएसए संजय सिंह ने बताया कि स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक की ओर से कक्षा एक के बच्चों के लिए 12 सप्ताह का गतिविधि कलेंडर जारी किया गया है। इसके तहत 20 अप्रैल तक बच्चों का नामांकन, 25 से 14 मई तक विद्यालय तैयारियां और अन्य गतिविधियां रहेंगी। बच्चों के अधिक से अधिक नामांकन करने के लिए शिक्षित युवाओं और अभिभावकों, खासकर माताओं को शिशु मित्र बनाया जाएगा। इनकी मदद से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के नामांकन को बढ़ाया जाएगा।
शिशु मित्रों से बच्चों की पढ़ाई और बौद्धिक विकास की गतिविधियों के बारे में भी समय-समय पर जानकारी की जाएगी। बाल मनोविज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो 80 फीसदी मानसिक विकास छह वर्ष की आयु से पहले ही होता है। इस लिहाज से पूर्व प्राथमिक कक्षाएं और उनमें सीखने का आधार अत्यंत महत्वूपूर्ण है।
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बीएसए ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय के एक शिक्षक को नोडल बनाया जाएगा, इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है। नोडल शिक्षक अपने विद्यालय के आसपास रहने वाले शिक्षित युवाओं और अभिभावकों को शिशु मित्र बनाएंगे और उनके बच्चों की गतिविधियों के बारे में जानकारी लेकर प्रगति रिपोर्ट भेजेंगे।
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बीएसए संजय सिंह ने बताया कि स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक की ओर से कक्षा एक के बच्चों के लिए 12 सप्ताह का गतिविधि कलेंडर जारी किया गया है। इसके तहत 20 अप्रैल तक बच्चों का नामांकन, 25 से 14 मई तक विद्यालय तैयारियां और अन्य गतिविधियां रहेंगी। बच्चों के अधिक से अधिक नामांकन करने के लिए शिक्षित युवाओं और अभिभावकों, खासकर माताओं को शिशु मित्र बनाया जाएगा। इनकी मदद से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के नामांकन को बढ़ाया जाएगा।
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शिशु मित्रों से बच्चों की पढ़ाई और बौद्धिक विकास की गतिविधियों के बारे में भी समय-समय पर जानकारी की जाएगी। बाल मनोविज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो 80 फीसदी मानसिक विकास छह वर्ष की आयु से पहले ही होता है। इस लिहाज से पूर्व प्राथमिक कक्षाएं और उनमें सीखने का आधार अत्यंत महत्वूपूर्ण है।
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बीएसए ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय के एक शिक्षक को नोडल बनाया जाएगा, इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है। नोडल शिक्षक अपने विद्यालय के आसपास रहने वाले शिक्षित युवाओं और अभिभावकों को शिशु मित्र बनाएंगे और उनके बच्चों की गतिविधियों के बारे में जानकारी लेकर प्रगति रिपोर्ट भेजेंगे।