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बच्चों पर डायरिया, बुखार का प्रकोप, 15 बेड की पीडियाट्रिक इकाई फुल
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मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती बच्चों के साथ मौजूद उनके परिजन। संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। गर्मी में बच्चों पर डायरिया और बुखार का प्रकोप टूट रहा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर दिन 100 बीमार बच्चों को लेकर परिजन पहुंच रहे हैं। यहां 15 बेड की पीडियाट्रिक इकाई फुल हो गई है। कुछ बच्चे हफ्ते भर से भर्ती हैं। वार्ड फुल होने के कारण अब बच्चे दूसरे वार्डों में भर्ती किए जाएंगे।
वीरांगना अवंतीबाई लोधी स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज की पीडियाट्रिक इकाई (बाल रोग विभाग) में सोमवार से हर दिन औसतन 100 बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं। शनिवार को यहां 98 बीमार बच्चों को लेकर उनके परिजन पहुंचे। इनमें से ज्यादातर बच्चे उल्टी, दस्त और बुखार से पीड़ित थे।
इनमें से दो बच्चों की गंभीर स्थिति देखते हुए उन्हें वार्ड में भर्ती किया गया। 15 बेड की इस इकाई में वर्तमान में डायरिया से पीड़ित 10 बच्चे भर्ती हैं। जबकि बुखार के पांच बच्चे भर्ती किए गए हैं। इसकी वजह से पीडियाट्रिक इकाई फुल हो गई है। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि अब और बच्चे आते हैं तो उन्हें दूसरे वार्ड में भर्ती किया जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी है, जिससे बच्चों के परिजन परेशान हैं। यहां भर्ती बच्चों को उपचार तो दिया जा रहा है लेकिन सीमित संसाधनों से चल रहे इलाज से स्वास्थ्य लाभ समय से नहीं मिल पा रहा है। कुछ बच्चों का हफ्ते भर से उपचार चल रहा है। परिजन को बाहर से भी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
बोले तीमारदार, खरीदकर ला रहे दवा
आठ वर्षीय बेटी कनक डायरिया की शिकार हो गई है, चार दिनों से भर्ती है। अभी भी बराबर दस्त हो रहे हैं। कुछ दवाएं बाहर से भी लानी पड़ रही हैं। इसके बाद भी पूरी तरह स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वीरेश कुमार, बाकलपुर
डेढ़ वर्षीय बेटी काव्या को तीन दिनों से भर्ती कराकर उपचार करा रहे हैं। आराम तो मिला है, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। दवाओं की कमी बताई जाती है तो कुछ दवाएं बाहर से भी खरीदनी पड़ रही हैं।
कंचन देवी, सरनऊ
सफाई पर दें ध्यान, पिलाएं ओआरएस
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. यूसुफ अहमद का कहना है कि बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए घर में सफाई का विशेष ध्यान रखें। बोतल से दूध पीने वाले बच्चों की हर बार बोतल धोएं। दस्त होने पर ओआरएस घोल का सेवन कराएं। बच्चों को धूप से बचाकर रखें। बीमार होने पर बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही दवाओं का सेवन कराएं।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी नहीं है। दवाएं बाहर से क्यों लाई जा रही हैं मेरे संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी।
डॉ. नवनीत सिंह चौहान, प्राचार्य
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वीरांगना अवंतीबाई लोधी स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज की पीडियाट्रिक इकाई (बाल रोग विभाग) में सोमवार से हर दिन औसतन 100 बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं। शनिवार को यहां 98 बीमार बच्चों को लेकर उनके परिजन पहुंचे। इनमें से ज्यादातर बच्चे उल्टी, दस्त और बुखार से पीड़ित थे।
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इनमें से दो बच्चों की गंभीर स्थिति देखते हुए उन्हें वार्ड में भर्ती किया गया। 15 बेड की इस इकाई में वर्तमान में डायरिया से पीड़ित 10 बच्चे भर्ती हैं। जबकि बुखार के पांच बच्चे भर्ती किए गए हैं। इसकी वजह से पीडियाट्रिक इकाई फुल हो गई है। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि अब और बच्चे आते हैं तो उन्हें दूसरे वार्ड में भर्ती किया जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी है, जिससे बच्चों के परिजन परेशान हैं। यहां भर्ती बच्चों को उपचार तो दिया जा रहा है लेकिन सीमित संसाधनों से चल रहे इलाज से स्वास्थ्य लाभ समय से नहीं मिल पा रहा है। कुछ बच्चों का हफ्ते भर से उपचार चल रहा है। परिजन को बाहर से भी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
बोले तीमारदार, खरीदकर ला रहे दवा
आठ वर्षीय बेटी कनक डायरिया की शिकार हो गई है, चार दिनों से भर्ती है। अभी भी बराबर दस्त हो रहे हैं। कुछ दवाएं बाहर से भी लानी पड़ रही हैं। इसके बाद भी पूरी तरह स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वीरेश कुमार, बाकलपुर
डेढ़ वर्षीय बेटी काव्या को तीन दिनों से भर्ती कराकर उपचार करा रहे हैं। आराम तो मिला है, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। दवाओं की कमी बताई जाती है तो कुछ दवाएं बाहर से भी खरीदनी पड़ रही हैं।
कंचन देवी, सरनऊ
सफाई पर दें ध्यान, पिलाएं ओआरएस
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. यूसुफ अहमद का कहना है कि बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए घर में सफाई का विशेष ध्यान रखें। बोतल से दूध पीने वाले बच्चों की हर बार बोतल धोएं। दस्त होने पर ओआरएस घोल का सेवन कराएं। बच्चों को धूप से बचाकर रखें। बीमार होने पर बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही दवाओं का सेवन कराएं।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी नहीं है। दवाएं बाहर से क्यों लाई जा रही हैं मेरे संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी।
डॉ. नवनीत सिंह चौहान, प्राचार्य