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उपसचिव ने नगर पालिका अध्यक्ष को किया तलब
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एटा। नगर पालिका परिषद एटा जहां वर्तमान बोर्ड बैठक के प्रस्तावों को लेकर जांच के घेरे में चल रही है। वहीं, एक पुरानी बैठक के एजेंडा में प्रस्ताव बढ़ाने जाने के मामले में पालिकाध्यक्ष को नगर विकास विभाग में तलब किया गया है। इससे पालिकाध्यक्ष की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
नगर विकास विभाग के उपसचिव ने पत्र भेजकर पालिकाध्यक्ष मीरा गांधी से व्यक्तिरूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण मांगा है। पत्र के अनुसार शासन ने एक अगस्त 2018 को पालिकाध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। तत्कालीन डीएम ने पालिकाध्यक्ष द्वारा भेजे गए स्पष्टीकरण को निराधार ठहराया और उन पर लगे आरोपों को सही पाया। आरोपों के संबंध में नगर विकास विभाग ने इसी साल 27 जनवरी को उन्हें दोबारा अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया, लेकिन पालिकाध्यक्ष ने अस्वस्थता का हवाला देते हुए अगली तारीख का आग्रह किया। इस पर उपसचिव ने 22 जुलाई की तारीख तय की है। उप सचिव का कहना है कि अगर पालिकाध्यक्ष अपना पक्ष रखने के लिए नहीं आती हैं तो उनके खिलाफ एकपक्षीय निर्णय ले लिया जाएगा।
नगर पालिका परिषद की वित्तीय वर्ष 2018-19 की बोर्ड बैठक में प्रस्तावों की स्वीकृत के बाद एजेंडा में कुछ प्रस्ताव बढ़ा दिए गए। बाद में पालिकाध्यक्ष ने उन प्रस्तावों को निरस्त कर दिया। इसे लेकर सभासदों ने डीएम से लेकर शासन में शिकायत की थी।
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नगर विकास विभाग के उपसचिव ने पत्र भेजकर पालिकाध्यक्ष मीरा गांधी से व्यक्तिरूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण मांगा है। पत्र के अनुसार शासन ने एक अगस्त 2018 को पालिकाध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। तत्कालीन डीएम ने पालिकाध्यक्ष द्वारा भेजे गए स्पष्टीकरण को निराधार ठहराया और उन पर लगे आरोपों को सही पाया। आरोपों के संबंध में नगर विकास विभाग ने इसी साल 27 जनवरी को उन्हें दोबारा अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया, लेकिन पालिकाध्यक्ष ने अस्वस्थता का हवाला देते हुए अगली तारीख का आग्रह किया। इस पर उपसचिव ने 22 जुलाई की तारीख तय की है। उप सचिव का कहना है कि अगर पालिकाध्यक्ष अपना पक्ष रखने के लिए नहीं आती हैं तो उनके खिलाफ एकपक्षीय निर्णय ले लिया जाएगा।
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नगर पालिका परिषद की वित्तीय वर्ष 2018-19 की बोर्ड बैठक में प्रस्तावों की स्वीकृत के बाद एजेंडा में कुछ प्रस्ताव बढ़ा दिए गए। बाद में पालिकाध्यक्ष ने उन प्रस्तावों को निरस्त कर दिया। इसे लेकर सभासदों ने डीएम से लेकर शासन में शिकायत की थी।
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