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आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट में देरी से संक्रमण का खतरा
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एटा। एक तरफ कोरोना संक्रमण रोकने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हर वह एहतियाती कदम उठा रहा है, जिससे संक्रमण रोका जा सके। वहीं दूसरी ओर आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट आने में कई दिन लग रहे हैं। इस बीच जो संक्रमित होते हैं वह खुलेआम घूम रहे हैं। इससे संक्रमण फैलने की संभावना बनी रहती है। सबसे ज्यादा कठिनाई तो दूसरे जनपदों में जांच कराने वालों के सामने होती है। पोर्टल पर रिपोर्ट आने तक उन्हें भर्ती भी नहीं किया जाता।
शहर के मोहल्ला डॉक बगलिया निवासी एक किशोरी किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थी। परिजन बीते दिनों उसे इलाज को लेकर सैफई गए। जहां कोरोना की जांच को लेकर उसका सॅैंपल लिया गया। चिकित्सकों ने कहा रिपोर्ट आने के बाद इसका इलाज किया जाएगा। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे लेकर घर चले आए। ऐसे ही पटियाली गेट निवासी एक बुजुर्ग इलाज को सैफई गए। जहां एंटीजन किट से जांच रिपोर्ट लेकर गए थे लेकिन वहां पहुंचते ही चिकित्सकों ने अपने यहां जांच करने का हवाला दिया जबकि वह गंभीर स्थिति में थे।
वहीं उनका सैंपल लेकर एक बेड दे दिया गया, लेकिन अब रिपोर्ट का आने का इंतजार किया जा रहा है। जबकि उनके साथ गए परिजन में एक व्यक्ति वापस लौट आया है। जिले से प्रतिदिन 250 से अधिक आरटीपीसीआर के सैंपल जा रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन का समय लग जाता है। ऐसे में अगर कोई पॉजिटिव है तो बाहर खुले में घूमता रहता है।
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पोर्टल पर रिपोर्ट आने में लगते 48 घंटे
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जो लोग दूसरे जनपदों की लैब में जांच कराते हैं। उनकी जांच रिपोर्ट पोर्टल पर आने में 24 से 48 घंटे का समय लग जाता है।
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पोर्टल पर रिपोर्ट आने के बाद संक्रमित व्यक्ति की तलाश की जाती है। वहीं उसे कोविड अस्पताल या होम आइसोलेट किया जाता है। जो लोग जांच कराते हैं, रिपोर्ट आने तक उन्हें होम आइसोलेट रहना चाहिए।
-डॉ अरविंद गर्ग, सीएमओ
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शहर के मोहल्ला डॉक बगलिया निवासी एक किशोरी किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थी। परिजन बीते दिनों उसे इलाज को लेकर सैफई गए। जहां कोरोना की जांच को लेकर उसका सॅैंपल लिया गया। चिकित्सकों ने कहा रिपोर्ट आने के बाद इसका इलाज किया जाएगा। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे लेकर घर चले आए। ऐसे ही पटियाली गेट निवासी एक बुजुर्ग इलाज को सैफई गए। जहां एंटीजन किट से जांच रिपोर्ट लेकर गए थे लेकिन वहां पहुंचते ही चिकित्सकों ने अपने यहां जांच करने का हवाला दिया जबकि वह गंभीर स्थिति में थे।
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वहीं उनका सैंपल लेकर एक बेड दे दिया गया, लेकिन अब रिपोर्ट का आने का इंतजार किया जा रहा है। जबकि उनके साथ गए परिजन में एक व्यक्ति वापस लौट आया है। जिले से प्रतिदिन 250 से अधिक आरटीपीसीआर के सैंपल जा रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन का समय लग जाता है। ऐसे में अगर कोई पॉजिटिव है तो बाहर खुले में घूमता रहता है।
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पोर्टल पर रिपोर्ट आने में लगते 48 घंटे
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जो लोग दूसरे जनपदों की लैब में जांच कराते हैं। उनकी जांच रिपोर्ट पोर्टल पर आने में 24 से 48 घंटे का समय लग जाता है।
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पोर्टल पर रिपोर्ट आने के बाद संक्रमित व्यक्ति की तलाश की जाती है। वहीं उसे कोविड अस्पताल या होम आइसोलेट किया जाता है। जो लोग जांच कराते हैं, रिपोर्ट आने तक उन्हें होम आइसोलेट रहना चाहिए।
-डॉ अरविंद गर्ग, सीएमओ
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