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गलन से ठिठुर रहे गरीब, अफसर कागजी इंतजाम कर मस्त
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रोडवेज बस स्टेंड पर रैन बसेरा में सुविधा न होने के कारण रोडवेज परिसर में सोते दिखे लोग- संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। सर्द मौसम में खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे गरीबों के दर्द से नगर पालिका को कोई सरोकार नहीं है। ज्यों-ज्यों सर्दी का सितम बढ़ता जा रहा है, पालिका के इंतजाम कागजों में तो दुरुस्त होते जा रहे हैं, पर हकीकत कोसों दूर है। सर्द मौसम में हीटर के आगे बैठ बजट ठिकाने लगाने वाले यह तक देखना मुनासिब नहीं समझ रहे कि उनके कागजी इंतजाम अभी तक धरा पर उतर भी पाए हैं या नहीं। यही हाल अलावों का है। शहर में अभी तक किसी भी स्थान पर अलाव नहीं जलवाए गए हैं।
शनिवार की रात अब तक की सबसे सर्द रात रही। इस रात पारा करीब नौ डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को हुई जो किसी न किसी काम से घर से बाहर रहे। गरीब तबके सहित बाहर से आने वाले यात्रियों को कड़ाके की ठंड में पालिका रैन बसेरा में सुविधाएं मुहैया नहीं करा पा रहा है। नगर पालिका और डूडा ने रैन बसेरा बनाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री तो कर ली पर हकीकत जानने कोई अधिकारी फील्ड में नहीं उतरा।
अमर उजाला टीम ने शनिवार देर रात बस स्टैंड पर बने रैन बसेरा की पड़ताल की। यहां रैन बसेरा के नाम पर टेंट तो लगा था, पर न कोई कर्मचारी तैनात था और न ही रजाई, गद्दे और कंबल की कोई व्यवस्था थी। बस स्टैंड पर लोग अपने-अपने कंबल ओढ़ कर जमीन पर सोते मिले जबकि, गरीब और असहाय लोग सर्दी से ठिठुरते देखे गए।
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यहां भी ठिठुरते मिले
शहर में जिला अस्पताल महिला व पुरुष, सैनिक पड़ाव, शिकोहाबाद रोड, मंडी समिति, आगरा रोड, कैलाश मंदिर, रेलवे स्टेशन, रेलवे रोड आदि स्थानों पर लोग रात में दुकानों के आगे फुटपाथ पर गुदड़ी और कंबलों में रात बिताने को मजबूर दिखे।
अलाव को तरसे लोग
नगर पालिका के दावे थे कि चार स्थानों पर अलाव जल रहे हैं। बस स्टैंड, जिला अस्पताल महिला व पुरुष, रेलवे स्टेशन चारों ही स्थानों पर अलाव नहीं जलाए गए। सबसे ज्यादा दिक्कत बस स्टैंड पर लोगों को उठानी पड़ी। यहां यात्री बसों का इंतजार सर्दी में ठिठुरते हुए कर रहे तो रिक्शा और टेंपो चालक भी सिकुड़ते रहे।
रैन बसेरा के बाहर लोग करते टॉयलेट
बस स्टैंड पर बने रैन बसेरा के आसपास साफ-सफाई नहीं है। यहां तक शौचालय की भी व्यवस्था नहीं की गई है। चलते-फिरते यात्री टेंट के पास ही टॉयलेट कर जाते हैं। ऐसे में कोई भी रैन बसेरा में जाने की कोशिश भी नहीं करेगा, जहां टॉयलेट की बदबू आएगी।
--
अलीगढ़ जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे हैं। ठंड ज्यादा होने की वजह से यहां पर बैठे हैं। रैन बसेरा में रजाई, गद्दे तक नहीं हैं।
- चंद्रपाल, यात्री।
दिल्ली जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे हैं, यहां पर महिलाओं के लिए को रुकने के लिए रैन बसेरा की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
- रज्जो देवी, यात्री।
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शनिवार की रात अब तक की सबसे सर्द रात रही। इस रात पारा करीब नौ डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को हुई जो किसी न किसी काम से घर से बाहर रहे। गरीब तबके सहित बाहर से आने वाले यात्रियों को कड़ाके की ठंड में पालिका रैन बसेरा में सुविधाएं मुहैया नहीं करा पा रहा है। नगर पालिका और डूडा ने रैन बसेरा बनाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री तो कर ली पर हकीकत जानने कोई अधिकारी फील्ड में नहीं उतरा।
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अमर उजाला टीम ने शनिवार देर रात बस स्टैंड पर बने रैन बसेरा की पड़ताल की। यहां रैन बसेरा के नाम पर टेंट तो लगा था, पर न कोई कर्मचारी तैनात था और न ही रजाई, गद्दे और कंबल की कोई व्यवस्था थी। बस स्टैंड पर लोग अपने-अपने कंबल ओढ़ कर जमीन पर सोते मिले जबकि, गरीब और असहाय लोग सर्दी से ठिठुरते देखे गए।
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यहां भी ठिठुरते मिले
शहर में जिला अस्पताल महिला व पुरुष, सैनिक पड़ाव, शिकोहाबाद रोड, मंडी समिति, आगरा रोड, कैलाश मंदिर, रेलवे स्टेशन, रेलवे रोड आदि स्थानों पर लोग रात में दुकानों के आगे फुटपाथ पर गुदड़ी और कंबलों में रात बिताने को मजबूर दिखे।
अलाव को तरसे लोग
नगर पालिका के दावे थे कि चार स्थानों पर अलाव जल रहे हैं। बस स्टैंड, जिला अस्पताल महिला व पुरुष, रेलवे स्टेशन चारों ही स्थानों पर अलाव नहीं जलाए गए। सबसे ज्यादा दिक्कत बस स्टैंड पर लोगों को उठानी पड़ी। यहां यात्री बसों का इंतजार सर्दी में ठिठुरते हुए कर रहे तो रिक्शा और टेंपो चालक भी सिकुड़ते रहे।
रैन बसेरा के बाहर लोग करते टॉयलेट
बस स्टैंड पर बने रैन बसेरा के आसपास साफ-सफाई नहीं है। यहां तक शौचालय की भी व्यवस्था नहीं की गई है। चलते-फिरते यात्री टेंट के पास ही टॉयलेट कर जाते हैं। ऐसे में कोई भी रैन बसेरा में जाने की कोशिश भी नहीं करेगा, जहां टॉयलेट की बदबू आएगी।
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अलीगढ़ जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे हैं। ठंड ज्यादा होने की वजह से यहां पर बैठे हैं। रैन बसेरा में रजाई, गद्दे तक नहीं हैं।
- चंद्रपाल, यात्री।
दिल्ली जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे हैं, यहां पर महिलाओं के लिए को रुकने के लिए रैन बसेरा की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
- रज्जो देवी, यात्री।