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करोड़ों खर्च के बाद भी मीठे पानी को भटक रहे लोग
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Sun, 31 May 2015 11:45 PM IST
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करोड़ों खर्च करने के बाद भी पानी की किल्लत खत्म नहीं हो रही है। खारा पानी पीने को मिल रहा है। गांव के लोग मीठे पानी की तलाश में दूर-दूर तक भटक रहे हैं। कोसों दूर से महिलाएं सिर पर डिब्बा रखकर तो कोई साइकिल पर बर्तन भरकर ला रही हैं। गर्मी के मौसम में तो हालात और भी बदत्तर हो गए हैं। सरकारी नलों के खराब होने और बोरिंग फेल होने की समस्याएं भी बढ़ रही हैं। खारे पानी की समस्या से ग्रसित गांवों में सुधार के लिए सरकार ने कोई पेयजल योजना भी चलाई जा रही हैं लेकिन अधिकांश का संचालन ही ठीक नहीं है। 12 योजनाओं पर अभी भी काम चल रहा है।
शहर से सटे गांव गाजीपुर पहोर, नगला धनी, बहादुर गढ़, घिलौआ के ग्रामीण रिंकू यादव, कुलदीप यादव, पुष्पेंद्र, प्रेमादेवी ने बताया कि अंबेडकर और लोहिया समग्र विकास योजना के तहत गांव में विकास कार्य तो जरूर हुए, लेकिन शासन प्रशासन द्वारा उन्हें खारे पानी की समस्या से निजात नहीं दिलाई गई। खारे पानी की समस्या सालों से बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में सरकारी नलों के खराब हो जाने और उनकी बोरिंग फेल होने की वजह से पेयजल संकट और गहरा जाता है। गांव की महिलाएं पानी के डिब्बे-बॉल्टी लेकर दूर बसे अन्य गांवों से भरकर लाती हैं। गांव के कई लोग शहर से भी पानी भरकर ले जाते हैं।
40 योजनाएं की थीं तैयार, समस्या अब भी बरकरार
खारे पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए शासन से पेयजल योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत जलनिगम द्वारा गांवों में पानी की टंकी लगाना, पाइप लाइन द्वारा लोगों के घर तक मीठा पानी उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के तहत विकास खंड जलेसर, मारहरा, निधौलीकलां और शीतलपुर में एक दर्जन योजनाओं पर काम चल रहा है। इससे पहले भी करीब 40 योजनाएं तैयार की गई थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि योजनाएं बनकर तो तैयार हो जाती हैं, लेकिन उनका कुशल संचालन न हो पाने की वजह से उपयोग नहीं हो पाता है। इस पर विभाग का कहना है कि अब योजना ग्राम पंचायत को हैंडओवर करने से पहले उन्ह्रें संचालन करने के लिए एक व्यक्ति को दो माह का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
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मिली 478 खराब नलों की सूची
विकाय खंड अधिकारियों से जलनिगम ने क्षेत्रों के खराब नलों की सूचियां मांगी थी। इसमें जिले की सभी विकास खंडों में कुल 478 सरकारी नल खराब मिले हैं। इनको सही कराने के लिए जलनिगम ने उक्त सूचियों को सीडीओ के पास भेज दिया है।
अब तक बनी सभी योजनाओं का कुशल संचालन हो रहा है। खारे पानी की समस्या से ग्रसित गांवों में ग्रामीणों को मीठा पानी उपलब्ध कराने के लिए बजट के अनुरूप विभाग द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं।
-- एएस भाटी, अधिशासी अभियंता
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शहर से सटे गांव गाजीपुर पहोर, नगला धनी, बहादुर गढ़, घिलौआ के ग्रामीण रिंकू यादव, कुलदीप यादव, पुष्पेंद्र, प्रेमादेवी ने बताया कि अंबेडकर और लोहिया समग्र विकास योजना के तहत गांव में विकास कार्य तो जरूर हुए, लेकिन शासन प्रशासन द्वारा उन्हें खारे पानी की समस्या से निजात नहीं दिलाई गई। खारे पानी की समस्या सालों से बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में सरकारी नलों के खराब हो जाने और उनकी बोरिंग फेल होने की वजह से पेयजल संकट और गहरा जाता है। गांव की महिलाएं पानी के डिब्बे-बॉल्टी लेकर दूर बसे अन्य गांवों से भरकर लाती हैं। गांव के कई लोग शहर से भी पानी भरकर ले जाते हैं।
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40 योजनाएं की थीं तैयार, समस्या अब भी बरकरार
खारे पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए शासन से पेयजल योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत जलनिगम द्वारा गांवों में पानी की टंकी लगाना, पाइप लाइन द्वारा लोगों के घर तक मीठा पानी उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के तहत विकास खंड जलेसर, मारहरा, निधौलीकलां और शीतलपुर में एक दर्जन योजनाओं पर काम चल रहा है। इससे पहले भी करीब 40 योजनाएं तैयार की गई थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि योजनाएं बनकर तो तैयार हो जाती हैं, लेकिन उनका कुशल संचालन न हो पाने की वजह से उपयोग नहीं हो पाता है। इस पर विभाग का कहना है कि अब योजना ग्राम पंचायत को हैंडओवर करने से पहले उन्ह्रें संचालन करने के लिए एक व्यक्ति को दो माह का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
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मिली 478 खराब नलों की सूची
विकाय खंड अधिकारियों से जलनिगम ने क्षेत्रों के खराब नलों की सूचियां मांगी थी। इसमें जिले की सभी विकास खंडों में कुल 478 सरकारी नल खराब मिले हैं। इनको सही कराने के लिए जलनिगम ने उक्त सूचियों को सीडीओ के पास भेज दिया है।
अब तक बनी सभी योजनाओं का कुशल संचालन हो रहा है। खारे पानी की समस्या से ग्रसित गांवों में ग्रामीणों को मीठा पानी उपलब्ध कराने के लिए बजट के अनुरूप विभाग द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं।
-- एएस भाटी, अधिशासी अभियंता