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Etah News: घरों में फातिहा पढ़कर मनाया चेहल्लुम
Thu, 07 Sep 2023 11:24 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Thu, 07 Sep 2023 11:24 PM IST
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सकीट। चेहल्लुम पर हर साल बैंड-बाजों के साथ ताजिये उठाए जाते हैं, लेकिन इस बार ताजिये तैयार नहीं हो सके। ऐसे में केबल सीरीनी (प्रसाद) बांट, मस्जिदों और घरों में फातिहा पढ़कर चेहल्लुम मनाया गया। ताजिये के कारीगरों के यहां किसी की मृत्यु हो गई है। इसके कारण इस बार ताजिये तैयार नहीं किए गए।
मो. शकील ने बताया कि मातम के साथ मनाए जाने वाले मोहर्रम के चालीस दिन होने पर चेहल्लुम का दिन होता है। इसमें ताजिये उठाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार ताजिया बन नहीं पाए हैं। मो. आशिफ अली ने बताया कि परंपरा के अनुसार मोहर्रम व चेहल्लुम पर बैंड-बाजों के साथ ताजिया जुलूस निकाला जाता रहा है। इस बार चेहल्लुम पर ताजिया नहीं उठाए गए हैं। घरों व मस्जिदों में फातिहा पढ़कर प्रसाद वितरण किया गया।
छड़ी लगाकर फातिहा पढ़ी
निधौली कलां। मुस्लिम समुदाय द्वारा चेहल्लुम का पर्व बृहस्पतिवार को मनाया गया। ताजिया की जगह छड़ी लगाकर मौलाना मंसूर आलम द्वारा फातिहा पढ़ी गई। बड़ी मस्जिद में लोगों ने शांति की दुआएं मांगीं। घरों में पकवान बनाए गए। पप्पू कुरैशी, शमशाद कुरैशी, कायम बरकाती, रहीस अहमद, मुस्तकीम अहमद, शमशाद सलमानी आदि ने घरों पर आयोजन किए। संवाद
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मो. शकील ने बताया कि मातम के साथ मनाए जाने वाले मोहर्रम के चालीस दिन होने पर चेहल्लुम का दिन होता है। इसमें ताजिये उठाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार ताजिया बन नहीं पाए हैं। मो. आशिफ अली ने बताया कि परंपरा के अनुसार मोहर्रम व चेहल्लुम पर बैंड-बाजों के साथ ताजिया जुलूस निकाला जाता रहा है। इस बार चेहल्लुम पर ताजिया नहीं उठाए गए हैं। घरों व मस्जिदों में फातिहा पढ़कर प्रसाद वितरण किया गया।
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छड़ी लगाकर फातिहा पढ़ी
निधौली कलां। मुस्लिम समुदाय द्वारा चेहल्लुम का पर्व बृहस्पतिवार को मनाया गया। ताजिया की जगह छड़ी लगाकर मौलाना मंसूर आलम द्वारा फातिहा पढ़ी गई। बड़ी मस्जिद में लोगों ने शांति की दुआएं मांगीं। घरों में पकवान बनाए गए। पप्पू कुरैशी, शमशाद कुरैशी, कायम बरकाती, रहीस अहमद, मुस्तकीम अहमद, शमशाद सलमानी आदि ने घरों पर आयोजन किए। संवाद
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