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Etah News: सपा के दांव से बढ़ेगी भाजपा की बेचैनी
Wed, 07 Feb 2024 05:55 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Wed, 07 Feb 2024 05:55 PM IST
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एटा। लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सपा ने पहला दांव लगा दिया है। इससे सत्तासीन भाजपा में बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है। क्योंकि इस बार दांव में राजनीतिक पहलुओं के साथ ही जातीय समीकरणों को और मजबूत किया गया है। शाक्यों को पूरी तरह अपना वोट बैंक मान बैठी भाजपा अब दो चुनाव से लोधी वोट बैंक पर ही फोकस कर रही है। ऐसे में शाक्य मतदाताओं के फिसलने का खतरा बढ़ गया है।
पिछले चुनावों में सपा पूरी तरह यादव और मुस्लिम वोट बैंक के सहारे ही रही है। हर बार यादव प्रत्याशी एटा लोकसभा सीट पर खड़ा किया गया। जबकि भाजपा ने पूर्व में शाक्य प्रत्याशी के रूप में महादीपक सिंह शाक्य को तवज्जो दी, जो शाक्यों के साथ अन्य सवर्ण मतदाताओं का समीकरण और पार्टी का परंपरागत वोट बैंक मिलाकर जीतते भी रहे। इनके बाद 2004 में पार्टी ने अशोक रतन शाक्य को चुनाव लड़ाया, जो जीत नहीं सके। 2009 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कल्याण सिंह के चुनाव लड़ने पर भाजपा ने डॉ. श्याम सिंह शाक्य को टिकट दे दिया।
इसके बाद शाक्य वरीयता वाली भाजपा की राजनीति बदल गई। 2014 और 2019 में पार्टी ने कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह को टिकट दिया। दोनों बार वह जीते और शाक्यों का वोट भी मिलता रहा। पार्टी के अनुसार ये मतदाता उनके परंपरागत वोट बैंक में शामिल हो चुके थे। जबकि सपा से इस वोट बैंक को अधिक वास्ता नहीं रहता था। इन परिस्थितियों को भांपते हुए सपा ने इस बार शाक्य वर्ग से ही लोकसभा प्रत्याशी दे दिया है। ऐसे में शाक्यों का वोट बंटने की संभावना बन गई है। ऐसा होने पर सपा को निश्चित रूप से फायदा मिलेगा। भाजपा के सामने इसकी काट ढूंढ़कर शाक्यों को अपने खेमे में बनाए रखने की चुनौती है।
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सपा का खुलकर प्रचार, भाजपा में टिकट को द्वंद
प्रत्याशी की घोषणा के बाद सपा ने खुलकर प्रचार कर दिया है। प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में उतर आए हैं। एटा और कासगंज में रोड शो कर चुके हैं। कासगंज में एक जनसभा भी हो गई। जबकि भाजपा प्रत्याशी चयन के द्वंद में फंसी हुई है। राजवीर सिंह जहां तीसरी बार टिकट की दावेदारी में हैं तो उनके सामने डिबाई की पूर्व विधायक डॉ. अनीता लोधी ने दावेदारी ठोंक कर सबको हैरत में डाल दिया है।
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पिछले चुनावों में सपा पूरी तरह यादव और मुस्लिम वोट बैंक के सहारे ही रही है। हर बार यादव प्रत्याशी एटा लोकसभा सीट पर खड़ा किया गया। जबकि भाजपा ने पूर्व में शाक्य प्रत्याशी के रूप में महादीपक सिंह शाक्य को तवज्जो दी, जो शाक्यों के साथ अन्य सवर्ण मतदाताओं का समीकरण और पार्टी का परंपरागत वोट बैंक मिलाकर जीतते भी रहे। इनके बाद 2004 में पार्टी ने अशोक रतन शाक्य को चुनाव लड़ाया, जो जीत नहीं सके। 2009 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कल्याण सिंह के चुनाव लड़ने पर भाजपा ने डॉ. श्याम सिंह शाक्य को टिकट दे दिया।
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इसके बाद शाक्य वरीयता वाली भाजपा की राजनीति बदल गई। 2014 और 2019 में पार्टी ने कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह को टिकट दिया। दोनों बार वह जीते और शाक्यों का वोट भी मिलता रहा। पार्टी के अनुसार ये मतदाता उनके परंपरागत वोट बैंक में शामिल हो चुके थे। जबकि सपा से इस वोट बैंक को अधिक वास्ता नहीं रहता था। इन परिस्थितियों को भांपते हुए सपा ने इस बार शाक्य वर्ग से ही लोकसभा प्रत्याशी दे दिया है। ऐसे में शाक्यों का वोट बंटने की संभावना बन गई है। ऐसा होने पर सपा को निश्चित रूप से फायदा मिलेगा। भाजपा के सामने इसकी काट ढूंढ़कर शाक्यों को अपने खेमे में बनाए रखने की चुनौती है।
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सपा का खुलकर प्रचार, भाजपा में टिकट को द्वंद
प्रत्याशी की घोषणा के बाद सपा ने खुलकर प्रचार कर दिया है। प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में उतर आए हैं। एटा और कासगंज में रोड शो कर चुके हैं। कासगंज में एक जनसभा भी हो गई। जबकि भाजपा प्रत्याशी चयन के द्वंद में फंसी हुई है। राजवीर सिंह जहां तीसरी बार टिकट की दावेदारी में हैं तो उनके सामने डिबाई की पूर्व विधायक डॉ. अनीता लोधी ने दावेदारी ठोंक कर सबको हैरत में डाल दिया है।