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जर्जर विद्युत तार और गिरासू खंभा बनने लगे हैं मुसीबत
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गांधी मार्केट उपडाक घर की दीवार पर टिका गिरासू विद्युत खंभा।
- फोटो : ETAH
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एटा। शहर में विद्युत खंभों और लाइनों की जर्जर स्थिति है। आए दिन कहीं न कहीं तार और विद्युत खंभे टूटकर गिर रहे हैं। इन्हें ठीक कराने के नाम पर घंटों शट्डाउन लिया जाता है। इससे उपभोक्ता विद्युत सप्लाई बाधित होने से जहां परेशान होते हैं। वहीं हादसों का डर भी बना रहता है। सघन बस्ती वाले इलाके नगला पोता, नई बस्ती, किदवई नगर, होली मोहल्ला, पटियाली गेट आदि इलाकों में विद्युत तार जर्जर स्थिति में है। कई जगह तो यह इतने नीचे लटक गए हैं कि किसी वाहन की छत से टकराकर यह उसमें करंट फैला सकते हैं।
शुक्रवार को जीटी रोड पर 11 हजार केवीए की लाइन का तार टूटकर सड़क पर गिरने से अफरा-तफरी मच गई थी। जबकि इससे पूर्व गांव भगीपुर में ट्रांसफार्मर से निकल रहे तारों से चिपककर चार भैंसों की मौत हो गई। वहीं शांति नगर में पिछले माह एक विद्युत खंभा इसी तरह टूटकर गली में गिर गया। जिसके चलते क्षेत्र में चौबीस घंटे से ज्यादा बिजली बाधित रही।
खंभों की नहीं की जाती ब्लॉकिंग
शहर में लगे अधिकांश खंभों को साधने, गलने से रोकने के लिए उनके नीचे सीमेंट की ब्लॉकिंग की जाती है। शहर में खंभों पर ऐसा नहीं हो रहा है। यही वजह है कि खंभे बारिश का पानी और तेज धूप में जंग लगकर गल रहे हैं।
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नहीं कराते सपोर्ट फेंसिंग
विद्युत तार आपस में टकराएं नहीं इसके लिए उनके बीच में लकड़ी की डंडी बांध दी जाती है। वहीं तारों के नीचे लोहे की तारों की फेंसिंग की जाती है, जिससे तार टूटकर नीचे न गिरे, पर यहां ऐसा नहीं हो रहा है।
एक खंभे की ब्लॉकिंग पर आता 400 रुपये का खर्च
अधिशासी अभियंता शहरी खंड आरबी राय ने बताया कि एक खंभे की ब्लॉकिंग पर करीब चार सौ रुपये का खर्च आता है। हालांकि वह कहते हैं कि शहर में सभी खंभों की ब्लॉकिंग कराई जाएगी।
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शुक्रवार को जीटी रोड पर 11 हजार केवीए की लाइन का तार टूटकर सड़क पर गिरने से अफरा-तफरी मच गई थी। जबकि इससे पूर्व गांव भगीपुर में ट्रांसफार्मर से निकल रहे तारों से चिपककर चार भैंसों की मौत हो गई। वहीं शांति नगर में पिछले माह एक विद्युत खंभा इसी तरह टूटकर गली में गिर गया। जिसके चलते क्षेत्र में चौबीस घंटे से ज्यादा बिजली बाधित रही।
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खंभों की नहीं की जाती ब्लॉकिंग
शहर में लगे अधिकांश खंभों को साधने, गलने से रोकने के लिए उनके नीचे सीमेंट की ब्लॉकिंग की जाती है। शहर में खंभों पर ऐसा नहीं हो रहा है। यही वजह है कि खंभे बारिश का पानी और तेज धूप में जंग लगकर गल रहे हैं।
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नहीं कराते सपोर्ट फेंसिंग
विद्युत तार आपस में टकराएं नहीं इसके लिए उनके बीच में लकड़ी की डंडी बांध दी जाती है। वहीं तारों के नीचे लोहे की तारों की फेंसिंग की जाती है, जिससे तार टूटकर नीचे न गिरे, पर यहां ऐसा नहीं हो रहा है।
एक खंभे की ब्लॉकिंग पर आता 400 रुपये का खर्च
अधिशासी अभियंता शहरी खंड आरबी राय ने बताया कि एक खंभे की ब्लॉकिंग पर करीब चार सौ रुपये का खर्च आता है। हालांकि वह कहते हैं कि शहर में सभी खंभों की ब्लॉकिंग कराई जाएगी।