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अधिकारियों की बात को कर्मचारी करते थे दरकिनार
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एटा। एटा-फर्रुखाबाद मार्ग पर सोमवार को लखनऊ से आई टीम को जांच के दौरान 52 बेटिकट यात्री मिले थे। मामले से पहले 18 जुलाई को एआरएम द्वारा डिपो प्रभारी को 24 परिचालकों का रूट बदलने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनके रूट नहीं बदले गए।
परिवहन निगम में अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर राजस्व चोरी का खेल चल रहा था। यहां अधीनस्थ कर्मचारी ही एआरएम की बात को अनसुना कर देते थे। शनिवार को निगम के कर्मचारियों ने बताया कि बीते दिनों तत्कालीन एआरएम मदनलाल ने लोड फैक्टर को लेकर समीक्षा की। जहां विभिन्न रूटों के 24 परिचालकों को उन्होंने चिह्नित किया और डिपो प्रभारी राजकुमार को 18 जुलाई को पत्र जारी किया गया।
इसमें निर्देश दिए कि परिचालकों का रूट तुरंत ही बदला जाए, लेकिन डिपो प्रभारी द्वारा परिचालकों का रूट नहीं बदला गया। वहीं 27 जुलाई को लखनऊ से आई टीम ने फर्रुखाबाद जनपद के फैजबाग में डिपो की बस संख्या यूपी 81 एएफ 1687 की चेकिंग की। इस दौरान बस में 52 यात्री बेटिकट मिले।
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जांच टीम ने इसकी शिकायत प्रबंध निदेशक से की। उन्होंने फर्रुखाबाद, एटा के एआरएम सहित चार टीआई व चालक परिचालक को बर्खास्त कर दिया गया। डिपो के चालक-परिचालकों में चर्चा है कि अगर डिपो प्रभारी द्वारा रूट बदल दिया जाता तो शायद किसी भी अधिकारी व कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं होती।
इन परिचालकों के बदलने थे रूट
नियमित परिचालक-निशा, अवनेश कुमार, समरथ सिंह, सतीश चंद्र, उपनेश कुमार, संतोश कुमार।
संविदा परिचालक-अनुज कुमार, तुरसन पाल सिंह, मुकेश कुमार,रामप्रताप,अर्जुन सिंह,राकेश कुमार बघेल,सुधीर कुमार,आंनद प्रताप सिंह, बृजेश सिंह,मनोज कुमार,बसुदेव,चकेंद्र प्रताप सिंह, गौतम स्वरुप, जय कुमार,राजीव कुमार, धमेंद्र सिंह, राहुल यादव, चंपाराम ।
जिस दिन एआरएम ने रूट बदलने के लिए पत्र जारी किया था। उस दिन मैं छुट्टी पर था और डिपो का चार्ज दूसरे कर्मचारी के पास था।
-राजकुमार, डिपो प्रभारी
कोट
लखनऊ की टीम को बस में बेटिकट यात्री मिले थे। मामले में गहनता से जांच की जाएगी। वहीं डिपो प्रभारी द्वारा रूट क्यों नहीं बदला गया। इसकी भी जांच कराई जाएगी, जो भी व्यक्ति दोषी होगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा।
-परवेज खॉ, आरएम अलीगढ़
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परिवहन निगम में अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर राजस्व चोरी का खेल चल रहा था। यहां अधीनस्थ कर्मचारी ही एआरएम की बात को अनसुना कर देते थे। शनिवार को निगम के कर्मचारियों ने बताया कि बीते दिनों तत्कालीन एआरएम मदनलाल ने लोड फैक्टर को लेकर समीक्षा की। जहां विभिन्न रूटों के 24 परिचालकों को उन्होंने चिह्नित किया और डिपो प्रभारी राजकुमार को 18 जुलाई को पत्र जारी किया गया।
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इसमें निर्देश दिए कि परिचालकों का रूट तुरंत ही बदला जाए, लेकिन डिपो प्रभारी द्वारा परिचालकों का रूट नहीं बदला गया। वहीं 27 जुलाई को लखनऊ से आई टीम ने फर्रुखाबाद जनपद के फैजबाग में डिपो की बस संख्या यूपी 81 एएफ 1687 की चेकिंग की। इस दौरान बस में 52 यात्री बेटिकट मिले।
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जांच टीम ने इसकी शिकायत प्रबंध निदेशक से की। उन्होंने फर्रुखाबाद, एटा के एआरएम सहित चार टीआई व चालक परिचालक को बर्खास्त कर दिया गया। डिपो के चालक-परिचालकों में चर्चा है कि अगर डिपो प्रभारी द्वारा रूट बदल दिया जाता तो शायद किसी भी अधिकारी व कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं होती।
इन परिचालकों के बदलने थे रूट
नियमित परिचालक-निशा, अवनेश कुमार, समरथ सिंह, सतीश चंद्र, उपनेश कुमार, संतोश कुमार।
संविदा परिचालक-अनुज कुमार, तुरसन पाल सिंह, मुकेश कुमार,रामप्रताप,अर्जुन सिंह,राकेश कुमार बघेल,सुधीर कुमार,आंनद प्रताप सिंह, बृजेश सिंह,मनोज कुमार,बसुदेव,चकेंद्र प्रताप सिंह, गौतम स्वरुप, जय कुमार,राजीव कुमार, धमेंद्र सिंह, राहुल यादव, चंपाराम ।
जिस दिन एआरएम ने रूट बदलने के लिए पत्र जारी किया था। उस दिन मैं छुट्टी पर था और डिपो का चार्ज दूसरे कर्मचारी के पास था।
-राजकुमार, डिपो प्रभारी
कोट
लखनऊ की टीम को बस में बेटिकट यात्री मिले थे। मामले में गहनता से जांच की जाएगी। वहीं डिपो प्रभारी द्वारा रूट क्यों नहीं बदला गया। इसकी भी जांच कराई जाएगी, जो भी व्यक्ति दोषी होगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा।
-परवेज खॉ, आरएम अलीगढ़