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रेलवे आवासों पर बाहरी लोग काबिज
Etah
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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एटा। शहर में बने दर्जनों रेलवे क्वाटर्स पर अनाधिकृत लोगों का कब्जा है। यह लोग मनमाने तरीके से निर्माण करा रहे हैं। वहीं, विभाग का कहना है कि अनाधिकृत लोगों और निर्माण की जानकारी कराई जाएगी।
शहर की रेलवे कालोनी के अधिकांश आवास गैर रेलवे कर्मचारियों के कब्जे में हैं। तीन टाइप के इन आवासों में पानी बिजली की सुविधा के चलते यह लोगों का आकर्षण बने हुए हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनमें दर्जनों लोग तो ऐसे हैं जो शहर में बने निजी आवासों को किराए पर उठाकर इन पर काबिज हैं। नाममात्र का किराया और सुविधाओं के चलते इनका आकर्षण कम नहीं हो रहा।
बताते चलें कि यहां बने रेलवे विभाग के 110 आवासों में से 75 टाइप वन, 35 टाइप टू के क्वार्टर हैं। इनमें से 70 से अधिक आवासों में अन्य लोग रह रहे हैं। कुछ आवासों को तो जहां विभाग ने ही आवंटित किया है। वहीं अधिकांश में तो अन्य लोगों का कब्जा है। कुछ ने बताया कि किराएदारों ने ही इसे अधिक किराए पर उठा दिया है। कई लोगों ने तो बिना विभाग की अनुमति के निर्माण तक करा लिया है। इतना ही नहीं कुछ ने तो सेनेटरी लेन पर भी कब्जा कर लिया है। पूर्व में टाइप वन के लिए साढ़े तीन सौ और टू के लिए सात सौ रुपये का किराया निर्धारित था।
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शहर की रेलवे कालोनी के अधिकांश आवास गैर रेलवे कर्मचारियों के कब्जे में हैं। तीन टाइप के इन आवासों में पानी बिजली की सुविधा के चलते यह लोगों का आकर्षण बने हुए हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनमें दर्जनों लोग तो ऐसे हैं जो शहर में बने निजी आवासों को किराए पर उठाकर इन पर काबिज हैं। नाममात्र का किराया और सुविधाओं के चलते इनका आकर्षण कम नहीं हो रहा।
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बताते चलें कि यहां बने रेलवे विभाग के 110 आवासों में से 75 टाइप वन, 35 टाइप टू के क्वार्टर हैं। इनमें से 70 से अधिक आवासों में अन्य लोग रह रहे हैं। कुछ आवासों को तो जहां विभाग ने ही आवंटित किया है। वहीं अधिकांश में तो अन्य लोगों का कब्जा है। कुछ ने बताया कि किराएदारों ने ही इसे अधिक किराए पर उठा दिया है। कई लोगों ने तो बिना विभाग की अनुमति के निर्माण तक करा लिया है। इतना ही नहीं कुछ ने तो सेनेटरी लेन पर भी कब्जा कर लिया है। पूर्व में टाइप वन के लिए साढ़े तीन सौ और टू के लिए सात सौ रुपये का किराया निर्धारित था।
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