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Etah News: पल भर की दूरी, दो घंटे का इंतजार
Mon, 21 Sep 2026 11:42 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 21 Sep 2026 11:42 PM IST
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फफक पड़ी मां-मेडिकल कॉलेज में दवा काउंटर पर भीड़ के कारण दोनों बेटियों को खोने के बाद रश्मि सु
एटा। दवा लेने की आपाधापी और भीड़ के बीच मेडिकल कॉलेज में मां से बिछड़ी मासूम बेटियों की तलाश में दो घंटे तक भटकती बेबस मां की बेचैनी ने हर किसी का दिल झकझोर दिया। आखिरकार जब दोनों बेटियां सुरक्षित मिलीं तो मां ने उन्हें सीने से लगाकर जो आंसू बहाए, उसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।
दरअसल, सोमवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ थी। जैथरा थाना क्षेत्र के गांव ललहट निवासी रश्मि अपनी दो बेटियों राशि छह माह और अवंतिका चार वर्ष के साथ दवा लेने पहुंची थीं। भीड़ के कारण उसे बेटियों को एक स्थान पर छोड़कर आगे जाना पड़ा। बालिकाओं को अकेला देखकर सुरक्षा गार्डों की नजर उनपर पड़ी। गार्डों ने उनको अपने पास बैठाया और मेडिकल कॉलेज के स्टाफ को सौंप दिया। वहां मां को न पाकर अवंतिका रोने लगी, उसको सभी लोगों ने समझाने का प्रयास किया मगर उसने रोना बंद नहीं किया।
इधर, दवा लेकर लौटी मां ने बेटियों को वहां नहीं देखा तो उसके होश उड़ गए। वह आवाज लगाते हुए इधर-उधर तलाशने लगी। कुछ देर बाद उसकी बेचैनी बढ़ती गई। आंखों में चिंता और चेहरे पर घबराहट लिए वह मेडिकल कॉलेज के अलग-अलग हिस्सों में बेटियों को खोजती रही। हर पल उसे यही डर सता रहा था कि उसकी बेटियां कहां चली गईं।
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कुछ लोगों ने रश्मि को दो घंटे बाद मेडिकल कॉलेज के हॉल में भटकता देखा तो बालिकाओं के बारे में जानकारी दी। रश्मि भागती हुई उस जगह पहुंची जहां बालिकाएं सुरक्षित थीं। उनको सामने देखते ही मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। वह दौड़कर पास पहुंची और दोनों को सीने से लगा लिया। बेटियों ने भी मां से लिपटकर रोना शुरू कर दिया। बिछड़ने की घबराहट के बाद मां और बच्चों के मिलन का यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
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व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस घटना ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। ओपीडी में मरीजों की भीड़ के बीच छोटे बच्चों के साथ आने वाले तीमारदारों के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं होने से ऐसी स्थिति बनी। सुरक्षा गार्डों की सतर्कता से बच्चे सुरक्षित रहे और आखिरकार अपनी मां तक पहुंच गए, लेकिन घटना ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया कि भीड़ के बीच मरीजों और उनके बच्चों की सुरक्षा के लिए मेडिकल कॉलेज में कितनी ठोस व्यवस्था है।
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दरअसल, सोमवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ थी। जैथरा थाना क्षेत्र के गांव ललहट निवासी रश्मि अपनी दो बेटियों राशि छह माह और अवंतिका चार वर्ष के साथ दवा लेने पहुंची थीं। भीड़ के कारण उसे बेटियों को एक स्थान पर छोड़कर आगे जाना पड़ा। बालिकाओं को अकेला देखकर सुरक्षा गार्डों की नजर उनपर पड़ी। गार्डों ने उनको अपने पास बैठाया और मेडिकल कॉलेज के स्टाफ को सौंप दिया। वहां मां को न पाकर अवंतिका रोने लगी, उसको सभी लोगों ने समझाने का प्रयास किया मगर उसने रोना बंद नहीं किया।
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इधर, दवा लेकर लौटी मां ने बेटियों को वहां नहीं देखा तो उसके होश उड़ गए। वह आवाज लगाते हुए इधर-उधर तलाशने लगी। कुछ देर बाद उसकी बेचैनी बढ़ती गई। आंखों में चिंता और चेहरे पर घबराहट लिए वह मेडिकल कॉलेज के अलग-अलग हिस्सों में बेटियों को खोजती रही। हर पल उसे यही डर सता रहा था कि उसकी बेटियां कहां चली गईं।
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कुछ लोगों ने रश्मि को दो घंटे बाद मेडिकल कॉलेज के हॉल में भटकता देखा तो बालिकाओं के बारे में जानकारी दी। रश्मि भागती हुई उस जगह पहुंची जहां बालिकाएं सुरक्षित थीं। उनको सामने देखते ही मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। वह दौड़कर पास पहुंची और दोनों को सीने से लगा लिया। बेटियों ने भी मां से लिपटकर रोना शुरू कर दिया। बिछड़ने की घबराहट के बाद मां और बच्चों के मिलन का यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
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व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस घटना ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। ओपीडी में मरीजों की भीड़ के बीच छोटे बच्चों के साथ आने वाले तीमारदारों के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं होने से ऐसी स्थिति बनी। सुरक्षा गार्डों की सतर्कता से बच्चे सुरक्षित रहे और आखिरकार अपनी मां तक पहुंच गए, लेकिन घटना ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया कि भीड़ के बीच मरीजों और उनके बच्चों की सुरक्षा के लिए मेडिकल कॉलेज में कितनी ठोस व्यवस्था है।