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यूरिया की किल्लत ने बढ़ाई कालाबाजारी

Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
Etah
Etah Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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एटा। जिले की सहकारी समितियों पर यूरिया की किल्लत ने कालाबाजारी बढ़ा दी है। प्रति बोरी 301 रुपये की यूरिया चार सौ रुपये तक में बेची जा रही है। किसान कहते हैं कि शिकायत के बाद भी किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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जनपद में किसान सुविधाओं के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। हजारों टन खाद के स्टाक का आंकड़ा देने वाला सहकारिता विभाग भी किसानों की मांग पूरी नहीं कर पा रहा। गांव खतिया निवासी कृपाल सिंह यादव का आरोप है कि बीते तीन माह से सहकारी समितियों पर यूरिया नहीं मिल रही। ऐसे में वे निजी विक्रेताओं से सौ रुपये ब्लेैक पर खाद खरीद रहे हैं।
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पहरई निवासी कृषक सौदान सिंह कहते हैं कि इन दिनों आलू, लहा में यूरिया की जरूरत पड़ रही है, लेकिन तहसील क्षेत्र की अधिकांश समितियों पर यूरिया का टोटा है। मिरहची निवासी किसान ज्योति कश्यप एवं क्यामुद्दीन कहते हैं कि हमेशा की तरह इन दिनों भी किसानों को यूरिया नहीं मिल रही। लालपुर निवासी अनार सिंह चौहान कहते हैं कि यूरिया मांगने पर डीएपी की उपलब्धता बताई जा रही है। साधन सहकारी समिति नाबर के सचिव अनेक पाल सिंह बताते हैं कि बीते दो माह से यूरिया नहीं है। किसान परेशान हैं।
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मुहम्मद नगर बझेरा के सचिव एसबी सिंह बताते हैं कि सोसाइटी पर यूरिया डेढ़ माह से नहीं है। मांग के बाद भी उपलब्धता नहीं हुई है।
साधन सहकारी समिति मिरहची के सचिव नरेंद्र सिंह यादव, मारहरा के नेम सिंह वर्मा एवं भोजपुर के सचिवों का कहना है कि केंद्र पर डीएपी है लेकिन यूरिया बीते एक माह से नहीं है।

केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के सत्य प्रकाश यादव एवं क्रय विक्रय समिति के राधेश्याम चतुर्वेदी ने बताया कि यूरिया समाप्त हो गई है। उपलब्ध होते ही किसानों को दी जाएगी। सोसाइटी पर किल्लत बाजार में भरमार!। सहकारिता विभाग की अव्यवस्था कहें या विभागीय मिलीभगत? जनपदीय सहकारी संस्थाएं जहां खाद की किल्लत से जूझ रही हैं, वहीं निजी विक्रेताओं के हजारों टन यूरिया का भंडार है। विभाग के इस खेल को अधिकांश किसान नहीं समझ पा रहे, वहीं विभागीय लोग भी इस पर कुछ कहने से बच रहे हैं। क्या कहते हैं सहकारिता अधिकारी। विभाग पर उपलब्ध 1400 एमटी यूरिया केंद्रों पर भेजी जा रही है। शीघ्र ही यूरिया की एक रैक आने वाली है। स्टाक में रखी 2400 एमटी यूरिया दिसंबर माह से पहले रिलीज नहीं की जा सकती। सुरेश चंद्र यादव, एआर कोआपरेटिव
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