{"_id":"4-48411","slug":"Etah-48411-4","type":"story","status":"publish","title_hn":"कब किसी दिवाली पर सजाएंगे झालर! ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कब किसी दिवाली पर सजाएंगे झालर!
Etah
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
एटा। आजादी के दशकों बाद भी जनपद में कई गांव बिजली को मोहताज है। जनपद के सैकड़ों गांव मजरे विद्युत रोशनी के लिए तरस रहे हैं। शासन-विभाग के दावों के बाद भी इन गांव मजरों तक शासन प्रशासन और विभाग की नजर नहीं है।
पिछड़े जनपद में सैकड़ों गांव-मजरों का भाग्य आजादी के 60 बरस बितने के बाद भी नहीं बदल सका है। बिजली की रोशनी आज भी यहां सपना बनी हुई है। नगला लक्ष्मण निवासी राजकुमार, रंजीत यादव बताते हैं कि रोशनी के इंतजार में एक पीढ़ी जहां दुनियां से रुखसत कर चुकी है। वहीं दूसरी पीढ़ी की जवानी भी इसी ख्वाब के साथ ढलने लगी है। वे कहते हैं कि दीपपर्व पर जगमगाते शहरों को देखकर उन्हें भी आस लगी है कि किस दीवाली पर वे भी बिजली की झालरों की रोशनी कर पाएंगे।
वहीं, विभाग जहां हर गांवों को रोशन करने का दावा कर रहा है वहीं दर्जनों गांव एवं सैकड़ों मजरे आज भी अंधकार में डूबे हैं। जनपद के नगला रनुआ, अचलपुर, बरौली, गढ़िया, कनकपुर, नगला मदी सहित सैकड़ों गांवों को आज भी विद्युतीकरण की दरकार है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछड़े जनपद में सैकड़ों गांव-मजरों का भाग्य आजादी के 60 बरस बितने के बाद भी नहीं बदल सका है। बिजली की रोशनी आज भी यहां सपना बनी हुई है। नगला लक्ष्मण निवासी राजकुमार, रंजीत यादव बताते हैं कि रोशनी के इंतजार में एक पीढ़ी जहां दुनियां से रुखसत कर चुकी है। वहीं दूसरी पीढ़ी की जवानी भी इसी ख्वाब के साथ ढलने लगी है। वे कहते हैं कि दीपपर्व पर जगमगाते शहरों को देखकर उन्हें भी आस लगी है कि किस दीवाली पर वे भी बिजली की झालरों की रोशनी कर पाएंगे।
विज्ञापन
वहीं, विभाग जहां हर गांवों को रोशन करने का दावा कर रहा है वहीं दर्जनों गांव एवं सैकड़ों मजरे आज भी अंधकार में डूबे हैं। जनपद के नगला रनुआ, अचलपुर, बरौली, गढ़िया, कनकपुर, नगला मदी सहित सैकड़ों गांवों को आज भी विद्युतीकरण की दरकार है।
विज्ञापन